हरियाणा

किसानों के लिए खुशखबरी! अब पराली जलाने की नहीं जरूरत

Ratna Netam
22 Oct 2026 7:10 PM IST
किसानों के लिए खुशखबरी! अब पराली जलाने की नहीं जरूरत
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करनाल। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को हरियाणा के करनाल में 'खेत बचाओ अभियान–रबी 2026' की शुरुआत करते हुए किसानों से पराली नहीं जलाने की अपील की। उन्होंने कहा कि खेतों में बचने वाले फसल अवशेष किसानों के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत बन सकते हैं। यदि पराली का सही तरीके से प्रबंधन किया जाए, तो इसे 200 से 250 रुपये प्रति क्विंटल तक के भाव पर बेचा जा सकता है। इससे किसानों को आर्थिक लाभ मिलने के साथ पर्यावरण प्रदूषण को कम करने में भी मदद मिलेगी।कृषि मंत्री ने कहा कि पराली जलाने से न केवल हवा प्रदूषित होती है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता और खेतों में मौजूद लाभकारी जीवों को भी नुकसान पहुंचता है। उन्होंने किसानों से आधुनिक कृषि मशीनों का उपयोग करके फसल अवशेषों को एकत्र करने और उन्हें औद्योगिक इकाइयों को बेचने का सुझाव दिया।
पराली बेचकर किसान कर सकते हैं अतिरिक्त कमाई
करनाल में पत्रकारों से बातचीत करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि फसल कटाई के बाद खेतों में बचने वाली पराली को बेकार समझकर जलाने की आवश्यकता नहीं है।उन्होंने किसानों को पराली प्रबंधन की आधुनिक तकनीक अपनाने की सलाह दी। इसके तहत सबसे पहले कटर मशीन से फसल के अवशेष काटे जाते हैं। इसके बाद रेक मशीन की सहायता से उन्हें एक स्थान पर एकत्र किया जाता है। अंत में बेलर मशीन से पराली के बंडल तैयार किए जाते हैं।इन बंडलों को विभिन्न औद्योगिक इकाइयों को बेचा जा सकता है। कृषि मंत्री के अनुसार, उचित व्यवस्था होने पर किसान पराली से प्रति क्विंटल 200 से 250 रुपये तक प्राप्त कर सकते हैं।हालांकि वास्तविक कीमत पराली की गुणवत्ता, स्थानीय मांग, परिवहन खर्च और खरीदारों की उपलब्धता पर निर्भर करेगी।
पराली जलाने से मिट्टी को होता है नुकसान
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पराली जलाने से खेतों में मौजूद उपयोगी कीट और सूक्ष्मजीव नष्ट हो सकते हैं। ये जीव मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और जैविक पदार्थों के विघटन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।फसल अवशेष जलाने से मिट्टी की ऊपरी सतह का तापमान तेजी से बढ़ता है। इससे जैविक गतिविधियां प्रभावित होती हैं और लंबे समय में मिट्टी की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता हैइसके अलावा पराली जलाने से निकलने वाला धुआं वायु प्रदूषण बढ़ाता है। इससे सांस संबंधी बीमारियों और आंखों में जलन जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।कृषि मंत्री ने किसानों से पर्यावरण और मिट्टी की सेहत को ध्यान में रखते हुए फसल अवशेषों का वैज्ञानिक प्रबंधन करने की अपील की।
30 नवंबर तक चलेगा खेत बचाओ अभियान
केंद्र सरकार का 'खेत बचाओ अभियान–रबी 2026' देशभर में 22 अक्टूबर से 30 नवंबर तक संचालित किया जाएगा। इस 40 दिवसीय अभियान का उद्देश्य मिट्टी की गुणवत्ता सुधारना, खेती की लागत कम करना और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना है।कृषि मंत्रालय के अनुसार, अभियान के माध्यम से करीब एक करोड़ किसानों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें कृषि वैज्ञानिकों, कृषि विभाग के अधिकारियों और कृषि विज्ञान केंद्रों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
किसानों को आधुनिक खेती का प्रशिक्षण
अभियान के अंतर्गत किसानों को मिट्टी की जांच के आधार पर संतुलित उर्वरकों के उपयोग की जानकारी दी जाएगी। साथ ही फसल विविधीकरण, प्राकृतिक खेती, जैविक उत्पादों के इस्तेमाल और जल संरक्षण की तकनीकों को बढ़ावा दिया जाएगा।सरकार की योजना के अनुसार, राज्य, जिला, ब्लॉक और ग्राम पंचायत स्तर पर किसान सम्मेलन, चौपाल, प्रशिक्षण कार्यक्रम और खेतों में तकनीकी प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे।इन कार्यक्रमों में कृषि विशेषज्ञ किसानों को आधुनिक मशीनों के उपयोग और फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन की जानकारी देंगे।
उद्योगों में भी काम आ सकती है पराली
फसल अवशेषों का इस्तेमाल बायोमास आधारित ऊर्जा उत्पादन, ईंधन और विभिन्न औद्योगिक प्रक्रियाओं में किया जा सकता है। कुछ उद्योगों में पराली का उपयोग कच्चे माल के रूप में भी होता है।यदि किसानों को स्थानीय स्तर पर खरीदार, मशीनें और परिवहन सुविधाएं उपलब्ध हों, तो पराली का व्यावसायिक उपयोग अधिक लाभकारी बन सकता है।
खेती को लाभकारी बनाने पर सरकार का जोर
केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के साथ मिट्टी की उर्वरता बनाए रखना भी जरूरी है। सरकार ऐसी कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना चाहती है, जिनसे उत्पादन बेहतर हो और प्राकृतिक संसाधनों को कम नुकसान पहुंचे।'खेत बचाओ अभियान' के माध्यम से किसानों को पराली प्रबंधन, संतुलित खाद के उपयोग और आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रति जागरूक किया जाएगा।कृषि मंत्री की अपील का मुख्य संदेश है कि पराली को जलाने के बजाय उसका उपयोग किया जाए, ताकि किसानों को अतिरिक्त आमदनी मिल सके और पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान हो।
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