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शिमला। हिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग में आउटसोर्स आधार पर होने वाली नई भर्तियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। अब शिक्षा विभाग में किसी भी पद पर आउटसोर्स कर्मचारी की नियुक्ति वित्त विभाग की पूर्व मंजूरी के बाद ही की जा सकेगी। सरकार के इस फैसले के बाद शिक्षा विभाग ने सभी संबंधित संस्थानों को वित्त विभाग के आदेशों का पालन करने के निर्देश जारी कर दिए हैं।
उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त निदेशक राकेश कुमार ने प्रदेश के सरकारी डिग्री कॉलेजों और संस्कृत महाविद्यालयों के प्राचार्यों को वित्त विभाग द्वारा जारी सर्कुलर भेजकर नई व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत अब बिना वित्त विभाग की लिखित स्वीकृति के किसी भी नई आउटसोर्स सेवा को शुरू नहीं किया जा सकेगा।
वित्त विभाग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि किसी भी विभाग, बोर्ड, निगम या संस्थान को नई आउटसोर्स नियुक्ति करने से पहले वित्त विभाग की अनुमति लेना अनिवार्य होगा। सरकार ने यह कदम आउटसोर्स कर्मचारियों की बढ़ती संख्या और अनावश्यक नियुक्तियों पर नियंत्रण लगाने के उद्देश्य से उठाया है।
वित्त विभाग ने कहा है कि आउटसोर्स व्यवस्था केवल अस्थायी जरूरतों को पूरा करने के लिए बनाई गई है। इसे नियमित सरकारी रोजगार का विकल्प नहीं माना जाएगा। यह व्यवस्था तब तक ही लागू रहेगी, जब तक संबंधित पदों पर नियमित भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती।
सरकार ने यह भी साफ किया है कि जिन पदों पर भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के तहत नियमित कर्मचारियों की नियुक्ति पहले से की जा रही है, वहां आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं की जाएगी। इससे नियमित भर्ती प्रक्रिया को प्राथमिकता देने का संकेत मिला है।
विभागों में आउटसोर्स कर्मचारियों की संख्या की भी समीक्षा की जाएगी। सरकार के अनुसार कई स्थानों पर स्वीकृत पदों से अधिक या आवश्यकता से ज्यादा आउटसोर्स कर्मचारी तैनात हैं। ऐसे मामलों की जांच कर कर्मचारियों की संख्या को वास्तविक जरूरत के अनुसार सीमित किया जाएगा।
शिक्षा विभाग में लंबे समय से विभिन्न कार्यों के लिए आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्तियां की जा रही थीं। इनमें कार्यालय सहायक, डाटा एंट्री ऑपरेटर, सुरक्षा कर्मचारी और अन्य सहायक सेवाओं से जुड़े पद शामिल हैं। अब नई नियुक्तियों पर रोक लगने के बाद संस्थानों को अपनी जरूरतों के लिए पहले वित्त विभाग से अनुमति लेनी होगी।
सरकार का मानना है कि इस फैसले से सरकारी खर्चों को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी और कर्मचारियों की तैनाती को अधिक व्यवस्थित किया जा सकेगा। साथ ही विभागों में मानव संसाधन की वास्तविक आवश्यकता का आकलन भी किया जाएगा।
हालांकि, आउटसोर्स कर्मचारियों को लेकर यह फैसला आने के बाद कर्मचारियों और संगठनों में चर्चा शुरू हो गई है। कई कर्मचारी संगठन लंबे समय से आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए स्थायी नीति बनाने की मांग करते रहे हैं। उनका कहना है कि वर्षों से सेवाएं दे रहे कर्मचारियों के भविष्य को लेकर सरकार को स्पष्ट नीति बनानी चाहिए।
फिलहाल शिक्षा विभाग ने वित्त विभाग के निर्देशों के अनुसार सभी संस्थानों को नई व्यवस्था का पालन करने को कहा है। अब किसी भी नई आउटसोर्स नियुक्ति के लिए संबंधित विभाग को पहले वित्त विभाग से अनुमति प्राप्त करनी होगी। सरकार के इस कदम को प्रशासनिक सुधार और खर्च नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है।





