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हिमाचल प्रदेश: कुल्लू जिले में ग्रामीणों की एकजुटता और आत्मनिर्भरता की मिसाल सामने आई है। यहां भलाण-एक पंचायत के लोगों ने सरकार और प्रशासन का करीब 10 साल तक इंतजार करने के बाद आखिरकार खुद ही अपनी समस्या का समाधान निकाल लिया। ग्रामीणों ने श्रमदान कर मनिहार खड्ड पर 100 फीट लंबा लकड़ी का पुल तैयार कर दिया। इस काम में शुरुआत पांच लोगों ने की थी, लेकिन धीरे-धीरे यह मुहिम जनआंदोलन बन गई और करीब 500 ग्रामीण इसमें शामिल हो गए।
भलाण-एक पंचायत के लोगों के लिए मनिहार खड्ड लंबे समय से परेशानी का कारण बनी हुई थी। वर्ष 2016 में खड्ड पर बना पुल बरसात के दौरान आई भीषण बाढ़ में बह गया था। इसके बाद ग्रामीणों ने कई बार सरकार और प्रशासन से यहां दोबारा पुल बनाने की मांग की, लेकिन वर्षों तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी। हर बरसात में खड्ड का जलस्तर बढ़ने के कारण आसपास के गांवों का संपर्क प्रभावित हो जाता था और लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ती थी।
पुल नहीं होने से भलाण-एक, भलाण-दो, ज्येष्ठा, गड़सा और पारली समेत कई क्षेत्रों के हजारों लोगों को अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती थी। सबसे ज्यादा दिक्कत स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को होती थी। बरसात के दिनों में कई बार लोगों को जान जोखिम में डालकर खड्ड पार करनी पड़ती थी। लंबे समय तक समस्या का समाधान नहीं होने के बाद ग्रामीणों ने खुद आगे बढ़ने का फैसला किया।
नई पंचायत के गठन के बाद पंचायत प्रधान विनोद शर्मा समेत पांच लोगों ने पुल निर्माण की योजना बनाई। शुरुआत में इन पांच लोगों ने मिलकर काम शुरू किया, लेकिन जब ग्रामीणों ने इस पहल को देखा तो बड़ी संख्या में लोग जुड़ते चले गए। देखते ही देखते पांच लोगों की छोटी सी मुहिम में 500 से ज्यादा ग्रामीण शामिल हो गए। सभी ने श्रमदान कर एक महीने के भीतर 100 फीट लंबा लकड़ी का पुल तैयार कर दिया।
ग्रामीणों की मेहनत से तैयार हुआ यह पुल अब लोगों के लिए आवागमन का साधन बन गया है। पुल बनने के बाद करीब पांच हजार से अधिक आबादी को राहत मिली है। अब लोगों को लंबा चक्कर लगाकर दूसरे रास्तों से जाने की मजबूरी नहीं रहेगी।
पुल निर्माण में ग्रामीणों ने आर्थिक सहयोग भी किया। पंचायत प्रधान के अनुसार, इस पुल को तैयार करने में साढ़े तीन लाख रुपये से अधिक की राशि खर्च हुई है। इसके अलावा सैकड़ों ग्रामीणों ने अपनी मेहनत देकर इस काम को पूरा किया। पंचायत प्रतिनिधियों ने भी आर्थिक मदद कर इस अभियान को सफल बनाने में सहयोग दिया।
ग्रामीणों का कहना है कि यह पुल उनकी मजबूरी का परिणाम है। वे चाहते हैं कि सरकार अब यहां स्थायी और मजबूत पक्के पुल का निर्माण कराए, ताकि भविष्य में बरसात के दौरान लोगों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
पंचायत प्रधान विनोद शर्मा ने बताया कि 10 वर्षों से लोग इस समस्या को झेल रहे थे। पुल नहीं होने के कारण बच्चों की पढ़ाई, मरीजों की आवाजाही और रोजमर्रा के काम प्रभावित होते थे। ग्रामीणों ने मिलकर जो प्रयास किया है, वह सिर्फ एक पुल का निर्माण नहीं बल्कि सामूहिक इच्छाशक्ति और एकता का उदाहरण है।
भलाण-एक पंचायत के ग्रामीणों की यह पहल अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गई है। पांच लोगों से शुरू हुई मुहिम का 500 लोगों तक पहुंचना यह दिखाता है कि जब लोग एकजुट होकर प्रयास करते हैं तो बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान निकाला जा सकता है। हालांकि ग्रामीण अभी भी सरकार से मांग कर रहे हैं कि लकड़ी के इस अस्थायी पुल की जगह जल्द से जल्द पक्का पुल बनाया जाए, ताकि लोगों को स्थायी सुविधा मिल सके।





