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जम्मू और कश्मीर
डल झील में बड़ा हादसा टला, रेस्क्यू टीम ने 15 से अधिक पर्यटकों को बचाया
Ashish verma
8 Oct 2026 7:17 PM IST

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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर की विश्व प्रसिद्ध डल झील में अचानक तेज हवाएं चलने से पर्यटकों की मुश्किलें बढ़ गईं। झील में शिकारे की सवारी कर रहे कई पर्यटक खराब मौसम के कारण बीच पानी में फंस गए। तेज हवाओं से झील में लहरें उठने लगीं और शिकारे सुरक्षित तरीके से आगे नहीं बढ़ पा रहे थे। हालात की गंभीरता को देखते हुए राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की टीम ने बचाव अभियान चलाया और फंसे पर्यटकों को सुरक्षित किनारे पहुंचाया। इस घटना ने एक बार फिर खराब मौसम के दौरान डल झील में नौकायन करने वाले पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, 23 सितंबर 2026 को श्रीनगर की डल झील में तेज हवाओं के कारण शिकारे में सवार कई पर्यटक फंस गए थे। नेहरू पार्क में तैनात एसडीआरएफ की क्विक रिस्पॉन्स टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए झील के बीच फंसे पर्यटकों को बाहर निकाला। राहत की बात यह रही कि बचाव अभियान के दौरान किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली। हालांकि इस घटना में 15 से अधिक पर्यटक फंसे होने की संख्या की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
अचानक बदला मौसम, पर्यटकों की बढ़ी परेशानी
डल झील कश्मीर के सबसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में शामिल है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में देश-विदेश से पर्यटक प्राकृतिक खूबसूरती देखने और शिकारे की सवारी का आनंद लेने पहुंचते हैं। लेकिन मौसम में अचानक बदलाव होने पर झील में नौकायन जोखिमपूर्ण हो सकता है।
तेज हवाओं के कारण पानी में ऊंची लहरें उठने लगती हैं, जिससे छोटी नावों और शिकारों का संतुलन प्रभावित होता है। ऐसी परिस्थितियों में शिकारा चलाने वालों के लिए नाव को नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है। विशेष रूप से झील के बीच में पहुंचने के बाद अचानक मौसम बिगड़ने से यात्रियों को सुरक्षित किनारे तक पहुंचाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
रेस्क्यू टीम ने दिखाई तत्परता
पर्यटकों के फंसने की जानकारी मिलने के बाद एसडीआरएफ की क्विक रिस्पॉन्स टीम ने बचाव अभियान शुरू किया। टीम ने प्रभावित क्षेत्र तक पहुंचकर पर्यटकों को सुरक्षित बाहर निकालने की कार्रवाई की।
23 सितंबर की घटना से जुड़ी रिपोर्ट के अनुसार, बचाव दल ने झील के मध्य भाग से पर्यटकों को निकाला और सभी को सुरक्षित किनारे तक पहुंचाया। टीम की त्वरित कार्रवाई से स्थिति को गंभीर होने से रोका जा सका।
जलाशयों में बचाव अभियान चलाना आसान नहीं होता। तेज हवाओं के बीच बचाव नौकाओं का संचालन, फंसे यात्रियों तक पहुंचना और उन्हें सुरक्षित स्थान पर लाना विशेष सावधानी की मांग करता है। ऐसी परिस्थितियों में प्रशिक्षित बचावकर्मियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
पहले भी डल झील में सामने आ चुकी हैं ऐसी घटनाएं
डल झील में तेज हवाओं के कारण पर्यटकों के फंसने की यह पहली घटना नहीं है। 5 सितंबर 2026 को भी अचानक मौसम बिगड़ने से तेज हवाओं और बारिश के बीच शिकारा सवारी कर रहे पर्यटक फंस गए थे। उस दौरान भी एसडीआरएफ की टीम ने मौके पर पहुंचकर पर्यटकों को सुरक्षित बाहर निकाला था।
इससे पहले मई 2023 में तेज हवाओं के कारण डल झील में कई शिकारे पलट गए थे। उस घटना में पुलिस ने 20 पर्यटकों को सुरक्षित बचाया था। बचाए गए लोगों को प्राथमिक उपचार भी दिया गया था। उस समय नदी पुलिस ने खराब मौसम के दौरान झील में प्रवेश नहीं करने की सलाह दी थी।
इन घटनाओं से स्पष्ट होता है कि डल झील में अचानक मौसम बदलना पर्यटकों की सुरक्षा के लिए एक गंभीर चुनौती है।
पर्यटकों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल
डल झील में पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर पहले भी चिंताएं सामने आ चुकी हैं। मई 2026 में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, डल और नगीन झील के लिए एसडीआरएफ की 18 सदस्यीय बचाव टीम तैनात थी। उस समय अधिकारियों ने बताया था कि बचाव दल के पास 15 नावें उपलब्ध थीं, जिनमें लाइफ जैकेट, रस्सियां, ऑक्सीजन मास्क और प्राथमिक उपचार जैसी सुविधाएं मौजूद थीं।
पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों ने झील में आने वाले पर्यटकों की संख्या को देखते हुए बचावकर्मियों की संख्या बढ़ाने की आवश्यकता बताई थी।
झील में पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही को देखते हुए सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता, मौसम की निगरानी और त्वरित बचाव व्यवस्था का मजबूत होना जरूरी माना जा रहा है।
खराब मौसम में शिकारा सवारी से बचना जरूरी
डल झील की खूबसूरती पर्यटकों को आकर्षित करती है, लेकिन यहां सैर करते समय मौसम संबंधी सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। नौकायन से पहले मौसम की जानकारी लेना और स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों का पालन करना चाहिए।
विशेषज्ञ सुरक्षा उपायों के तहत शिकारे में सवार होने से पहले लाइफ जैकेट पहनना, निर्धारित क्षमता से अधिक यात्रियों को नहीं बैठाना और तेज हवाओं के दौरान नौकायन से बचना महत्वपूर्ण है। मौसम अचानक बिगड़ने पर नाव संचालकों को जल्द से जल्द सुरक्षित किनारे की ओर लौटने का प्रयास करना चाहिए।
बच्चों और बुजुर्गों के साथ यात्रा करने वाले पर्यटकों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। इसके अलावा पर्यटन स्थलों पर मौसम संबंधी चेतावनी प्रणाली और आपातकालीन संपर्क सुविधाओं की जानकारी भी यात्रियों के लिए उपयोगी हो सकती है।
समय पर बचाव अभियान से टला बड़ा खतरा
डल झील में तेज हवाओं के बीच फंसे पर्यटकों को सुरक्षित निकालने की घटना ने आपदा प्रतिक्रिया टीमों की अहमियत को एक बार फिर सामने रखा है। खराब मौसम के दौरान समय पर सहायता मिलने से पर्यटकों को सुरक्षित किनारे तक पहुंचाया जा सका।
इस घटना के बाद झील में पर्यटकों की सुरक्षा, मौसम की पूर्व चेतावनी और आपातकालीन बचाव सुविधाओं पर ध्यान देने की आवश्यकता और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। पर्यटन गतिविधियों को सुरक्षित बनाए रखने के लिए प्रशासन, बचाव दल, शिकारा संचालकों और पर्यटकों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।
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