जम्मू और कश्मीर

बांदीपोरा में पुलिस की बड़ी कार्रवाई, अलगाववादी नेटवर्क से जुड़े 8 लोग गिरफ्तार

Ratna Netam
6 Nov 2026 5:12 PM IST
बांदीपोरा में पुलिस की बड़ी कार्रवाई, अलगाववादी नेटवर्क से जुड़े 8 लोग गिरफ्तार
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बांदीपोरा। जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा जिले में प्रतिबंधित संगठन इत्तिहाद-उल-मुस्लिमीन से कथित रूप से जुड़े अलगाववादी नेटवर्क के मामले में पुलिस की जांच आगे बढ़ रही है। ताजा जानकारी के अनुसार, इस मामले में दो और संदिग्ध सहयोगियों को गिरफ्तार किया गया है। इसके साथ ही गिरफ्तार लोगों की कुल संख्या छह से बढ़कर आठ हो गई है। पुलिस इस नेटवर्क के कथित सीमा पार संपर्कों, संदिग्ध वित्तीय लेनदेन और अलगाववादी गतिविधियों की जांच कर रही है।मामला उत्तरी कश्मीर के बांदीपोरा जिले का है, जहां पुलिस ने 24 अक्टूबर को प्रतिबंधित संगठन से जुड़े एक कथित गुप्त नेटवर्क का खुलासा किया था। शुरुआती जांच के बाद छह लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जिनमें चार महिलाएं शामिल थीं। पुलिस का आरोप है कि यह नेटवर्क पाकिस्तान में मौजूद एक व्यक्ति के निर्देश पर संचालित किया जा रहा था और इसके जरिए अलगाववादी विचारधारा का प्रचार करने की कोशिश की जा रही थी।इस मामले में बांदीपोरा पुलिस थाने में एफआईआर संख्या 168/2026 दर्ज की गई है। पुलिस ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए की धारा 10 और 13 के तहत मामला दर्ज किया है। ये धाराएं प्रतिबंधित संगठनों से संबंधित गतिविधियों और गैरकानूनी गतिविधियों के आरोपों से जुड़ी हैं। पुलिस का कहना है कि जांच का उद्देश्य कथित नेटवर्क की गतिविधियों, उससे जुड़े लोगों और धन के स्रोतों का पता लगाना है।
पहले गिरफ्तार किए गए छह लोगों की पहचान मुबीना बानो, वहीद अहमद भट, खुशबू जान, महक जान, आलिया जान और इरफान अहमद रेशी उर्फ रईस के रूप में हुई थी। मुबीना बानो बांदीपोरा के दाचीगाम की रहने वाली हैं। वहीद अहमद भट और इरफान अहमद रेशी का संबंध कुपवाड़ा जिले के हंदवाड़ा क्षेत्र से बताया गया है। वहीं खुशबू जान, महक जान और आलिया जान बांदीपोरा के चेक पंजिगाम इलाके की निवासी हैं।हालांकि, ताजा गिरफ्तार किए गए दो संदिग्धों के नाम और उनकी कथित भूमिका के संबंध में स्वतंत्र रूप से पुष्ट विवरण अभी उपलब्ध नहीं हो सका है। इन गिरफ्तारियों के बाद जांच का दायरा और बढ़ने की संभावना है।पुलिस के अनुसार, मामले की जांच के दौरान कुछ ऐसे सुराग सामने आए हैं, जिनसे जेल में बंद व्यक्तियों और जेल के बाहर मौजूद संदिग्ध सहयोगियों के बीच संपर्क होने की आशंका जताई गई है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कथित नेटवर्क किस तरह काम करता था और उसके सदस्यों के बीच संपर्क बनाए रखने के लिए किन माध्यमों का इस्तेमाल किया जाता था।
अधिकारियों के हवाले से प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, जांच का एक प्रमुख नाम वहीद अहमद भट है। वह इससे पहले वर्ष 2022 में आयोजित एक सम्मेलन से संबंधित यूएपीए मामले में गिरफ्तार हुआ था। पुलिस का दावा है कि कुपवाड़ा जेल में रहने के दौरान उसने पाकिस्तान में मौजूद कथित हैंडलर मंजूर अहमद शाह से दोबारा संपर्क स्थापित किया था। हालांकि, इन आरोपों की न्यायिक पुष्टि होना अभी बाकी है।जांच में यह भी आरोप सामने आया है कि वहीद अहमद भट के अगस्त 2024 में चिकित्सकीय आधार पर रिहा होने के बाद बांदीपोरा और आसपास के इलाकों में लगभग 14 से 15 गुप्त बैठकें आयोजित की गई थीं। इनमें से कुछ बैठकें बांदीपोरा-बारामूला मार्ग पर स्थित एक छोटे होटल में होने का दावा किया गया है।पुलिस को संदेह है कि इन बैठकों का उद्देश्य अलगाववादी विचारधारा का प्रचार करना और कथित संगठन के लिए समर्थन जुटाना था। जांच में महिलाओं की संभावित भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। हालांकि, किसी बैठक में भाग लेने या किसी व्यक्ति के संपर्क में होने से अपने आप आपराधिक संलिप्तता सिद्ध नहीं होती। इस संबंध में प्रस्तुत साक्ष्यों और आरोपों पर अंतिम निर्णय अदालत को करना होगा।
मामले में संदिग्ध वित्तीय लेनदेन भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पुलिस से संबंधित रिपोर्टों के अनुसार, कथित नेटवर्क तक एक वर्ष से अधिक की अवधि में लगभग सात से आठ लाख रुपये पहुंचने का संदेह है। इनमें करीब 2.26 लाख रुपये मुबीना बानो के बैंक खाते में जमा होने का आरोप लगाया गया है। शेष धनराशि कथित तौर पर नकदी पहुंचाने वाले व्यक्तियों के माध्यम से भेजी गई थी।पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित रकम किसने भेजी, किन लोगों तक पहुंची और उसका इस्तेमाल किन उद्देश्यों के लिए किया गया। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि संदिग्ध धनराशि का संबंध किसी प्रतिबंधित गतिविधि से था या नहीं।इससे पहले सामने आई जानकारी में एक धार्मिक व्यक्ति और कुपवाड़ा के दो संदिग्ध धनवाहकों की संभावित भूमिका की जांच किए जाने की बात कही गई थी। अधिकारियों के अनुसार, उनके कथित संपर्कों और आर्थिक लेनदेन की भी पड़ताल की जा रही है।
सुरक्षा के लिहाज से बांदीपोरा उत्तरी कश्मीर का महत्वपूर्ण जिला है। यहां किसी भी कथित प्रतिबंधित नेटवर्क की गतिविधियों की जांच करते समय स्थानीय संपर्कों के साथ सीमा पार संबंधों की संभावना भी देखी जाती है। ऐसे मामलों में जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती आरोपों की पुष्टि के लिए विश्वसनीय साक्ष्य जुटाना और प्रत्येक संदिग्ध की व्यक्तिगत भूमिका निर्धारित करना होती है।इस मामले में पुलिस की कार्रवाई का अगला चरण गिरफ्तार व्यक्तियों के कथित संपर्कों, बैंक लेनदेन और बैठकों से संबंधित जानकारी के परीक्षण पर केंद्रित हो सकता है। जांच एजेंसियों को यह भी स्पष्ट करना होगा कि कथित नेटवर्क में शामिल लोगों के बीच किस स्तर का समन्वय था।फिलहाल दो और गिरफ्तारियों की जानकारी के साथ कुल संख्या आठ बताई जा रही है। हालांकि, नई गिरफ्तारियों से संबंधित विस्तृत आधिकारिक विवरण की पुष्टि बाकी है। पुलिस की जांच जारी है और आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप अभी न्यायालय में सिद्ध नहीं हुए हैं।
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