झारखंड

36 साल का IAS करियर फिर JPSC विवाद में गिरफ्तारी कौन हैं खियांग्ते

Ratna Netam
10 Aug 2026 6:16 PM IST
36 साल का IAS करियर फिर JPSC विवाद में गिरफ्तारी कौन हैं खियांग्ते
x
रांची : झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एल. खांग्याते को सोमवार को सीआईडी ने गिरफ्तार कर लिया। उनकी गिरफ्तारी ऐसे समय हुई है, जब झारखंड में JPSC और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन तेज है। एल. खांग्याते के खिलाफ खास तौर पर JPSC की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित गड़बड़ी से जुड़े मामले की जांच चल रही थी। जांच के दौरान सीआईडी की टीम JPSC मुख्यालय में छापेमारी भी कर चुकी है।
14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को लेकर अभ्यर्थियों ने परीक्षा प्रक्रिया पर कई गंभीर सवाल उठाए थे। आरोपों में परीक्षा संचालन, ओएमआर शीट और उत्तर पुस्तिकाओं से जुड़ी कथित अनियमितताओं के साथ-साथ कुछ परीक्षा केंद्रों की व्यवस्थाओं को लेकर भी सवाल उठे। अभ्यर्थियों की शिकायतों के बाद मामले की जांच आगे बढ़ी और सीआईडी ने अलग-अलग पहलुओं की पड़ताल शुरू की। अब पूर्व JPSC अध्यक्ष की गिरफ्तारी के बाद इस पूरे मामले की जांच और महत्वपूर्ण हो गई है।
एल. खांग्याते का पूरा नाम लाल बियाकतुलुआंगा खांग्याते है। वह झारखंड कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रहे हैं। उनका प्रशासनिक करियर करीब 36 वर्षों का रहा। उन्होंने इतिहास विषय से स्नातक की पढ़ाई की और वर्ष 1987 में संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा पास की। इसके बाद वह 1988 बैच के आईएएस अधिकारी बने। लंबे प्रशासनिक करियर के दौरान उन्होंने झारखंड सरकार में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं।
खांग्याते राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पद पर भी काम कर चुके हैं। इसके अलावा वह प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थान के महानिदेशक जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी रहे। सेवानिवृत्ति से पहले उन्होंने झारखंड के मुख्य सचिव की जिम्मेदारी भी संभाली थी। प्रशासनिक क्षेत्र में लंबे अनुभव के कारण उनकी पहचान राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों में रही है।
सेवानिवृत्ति के बाद फरवरी 2025 में झारखंड सरकार ने एल. खांग्याते को झारखंड लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया था। हालांकि, उनके कार्यकाल के दौरान आयोजित 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा विवादों में आ गई। अभ्यर्थियों की ओर से परीक्षा में कथित गड़बड़ी के आरोप लगाए गए। कुछ अभ्यर्थियों ने ओएमआर शीट में कथित हेरफेर, कुछ परीक्षा केंद्रों पर उत्तरों से जुड़ी जानकारी पहले पहुंचने और परीक्षा संचालन में शामिल एजेंसी की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए।
इन आरोपों के सामने आने के बाद अभ्यर्थियों का विरोध बढ़ता गया। परीक्षा में पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग को लेकर अभ्यर्थियों ने आंदोलन किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच एजेंसी ने परीक्षा से जुड़े दस्तावेजों और व्यवस्थाओं की पड़ताल शुरू की। इसी क्रम में JPSC मुख्यालय में भी छापेमारी की गई थी। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताएं किस स्तर पर हुईं और इसमें किन लोगों की भूमिका रही।
जांच का दायरा बढ़ने के बीच एल. खांग्याते ने 22 जुलाई 2026 को JPSC अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने कथित तौर पर निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से स्वेच्छा से पद छोड़ने की बात कही थी। इसके बाद राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया था।
अब गिरफ्तारी के बाद सीआईडी की जांच में कई सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि परीक्षा से जुड़ी कथित अनियमितताओं के पीछे क्या वजह थी, परीक्षा संचालन में किन लोगों की भूमिका रही और क्या किसी स्तर पर जानबूझकर प्रक्रिया को प्रभावित किया गया। हालांकि, मामले में सामने आने वाले आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी।
एल. खांग्याते की गिरफ्तारी ने झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और भर्ती प्रक्रिया को लेकर चल रही बहस को और तेज कर दिया है। अभ्यर्थी लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि सरकारी भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए और यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो। अब सीआईडी की जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।
Next Story