
JHARKHAND झारखण्ड: राजधानी रांची के कांके नगड़ी में प्रस्तावित RIMS-2 अस्पताल के निर्माण के लिए चिन्हित 200 एकड़ जमीन पर रविवार को ग्रामीणों ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया। प्रशासन द्वारा लाखों की सुरक्षा और फेंसिंग के बावजूद ग्रामीणों ने जमीन पर पहुंचकर धनरोपनी की और अपने साथियों को पुलिस से छुड़ाने के लिए कांके-पिठोरिया रोड को भी जाम कर दिया। ग्रामीणों ने अपने आंदोलन के लिए दिशोम गुरु शिबू सोरेन के स्लोगन “हरवा तो जोतो न यार” को आधार बनाया। यह आंदोलन पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन के आह्वान पर किया गया था, जिन्होंने ग्रामीणों से उस जमीन पर हल-बैल चलाने और विरोध जताने की अपील की थी। प्रशासन ने रविवार सुबह ही चंपाई सोरेन को उनके आवास पर हाउस अरेस्ट कर लिया और कांके नगड़ी की विवादित जमीन से दो किलोमीटर पहले बैरिकेडिंग लगाई। इसके बावजूद ग्रामीणों ने खेत, नदी और अहरा पार कर सैकड़ों की संख्या में जमीन पर पहुंचकर प्रशासन की कंटीली तारों वाली फेंसिंग को काट दिया और जमीन में हल चला कर धनरोपनी की।
ग्रामीणों का कहना है कि यह जमीन उनकी है और वे इसे RIMS-2 के लिए नहीं बनने देंगे। प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने जोरदार नारेबाजी की और प्रशासन के साथ मुठभेड़ की कोशिश की। अधिकारियों ने बताया कि स्थिति को शांत करने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है और रोड को कुछ समय के लिए बंद करना पड़ा। स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि उन्होंने अपने खेतों और जमीनों की रक्षा के लिए यह कदम उठाया। आंदोलन में शामिल कई ग्रामीणों ने कहा कि सरकार को उनके अधिकारों और जमीन की सुरक्षा का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और बड़े स्तर पर जारी रहेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, यह घटना ग्रामीण और प्रशासन के बीच जमीन को लेकर चल रहे पुराने विवाद का नया अध्याय है। RIMS-2 जैसे बड़े सरकारी प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण हमेशा संवेदनशील मामला होता है और ग्रामीणों की भागीदारी और विरोध इसे और जटिल बना देता है। इस आंदोलन ने न केवल स्थानीय प्रशासन के सामने चुनौती खड़ी की है बल्कि राज्य के अन्य हिस्सों में भी लोगों के बीच समान मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाई है। ग्रामीणों का मानना है कि वे अपनी जमीन को बचाकर ही शांतिपूर्ण विकास सुनिश्चित कर सकते हैं।





