कर्नाटक
आंध्र प्रदेश में चक्रवात का कहर, बिजली बहाली के लिए कर्नाटक का बड़ा फैसला
Ratna Netam
2 Nov 2026 9:12 PM IST

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बेंगलुरु। चक्रवाती तूफान 'अरनब' (Arnab) से प्रभावित आंध्र प्रदेश में बिजली आपूर्ति बहाल करने के लिए कर्नाटक सरकार ने बड़ी पहल की है। राज्य सरकार ने आंध्र प्रदेश के प्रभावित क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था को फिर से सुचारू बनाने के लिए 500 प्रशिक्षित बिजली कर्मचारियों और आवश्यक उपकरणों को भेजने का फैसला किया है। सोमवार, 2 नवंबर 2026 को कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने इस सहायता की घोषणा की। उन्होंने बताया कि आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू से बातचीत के बाद यह निर्णय लिया गया है। चक्रवात के कारण आंध्र प्रदेश में हजारों बिजली के खंभे क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिससे कई इलाकों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई है।कर्नाटक सरकार का कहना है कि संकट की इस घड़ी में पड़ोसी राज्य को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। बिजली कर्मचारियों की विशेष टीमें क्षतिग्रस्त बिजली लाइनों, खंभों और अन्य बुनियादी ढांचे की मरम्मत में आंध्र प्रदेश के अधिकारियों का सहयोग करेंगी। इससे प्रभावित क्षेत्रों में बिजली बहाली के काम में तेजी आने की उम्मीद है।
चंद्रबाबू नायडू के अनुरोध पर लिया गया फैसला
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने चक्रवात से बिजली व्यवस्था को हुए व्यापक नुकसान के बाद कर्नाटक सरकार से सहायता मांगी थी। उन्होंने बिजली आपूर्ति बहाल करने के लिए अतिरिक्त तकनीकी कर्मचारियों और आवश्यक उपकरणों की जरूरत बताई थी।इसके बाद कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री से बातचीत की और सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया।शिवकुमार ने कहा कि कर्नाटक संकट की इस घड़ी में आंध्र प्रदेश के लोगों के साथ खड़ा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्राकृतिक आपदाओं के समय राज्यों के बीच सहयोग बेहद जरूरी है।कर्नाटक का ऊर्जा विभाग इस सहायता अभियान का समन्वय कर रहा है। राज्य के ऊर्जा मंत्री केजे जॉर्ज बिजली बहाली से जुड़े प्रयासों की निगरानी कर रहे हैं।
15 हजार से अधिक बिजली के खंभों को नुकसान
चक्रवाती तूफान अरनब ने आंध्र प्रदेश के बिजली वितरण ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, राज्य में 15 हजार से अधिक बिजली के खंभे उखड़ गए या क्षतिग्रस्त हो गए।तेज हवाओं और भारी बारिश के कारण कई स्थानों पर बिजली की लाइनें टूट गईं। इससे अनेक गांवों और शहरी क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बाधित हुई।बिजली आपूर्ति प्रभावित होने से घरेलू उपभोक्ताओं के अलावा कृषि, पेयजल आपूर्ति और छोटे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।आंध्र प्रदेश के ऊर्जा मंत्री गोट्टीपति रवि कुमार के अनुसार, चक्रवात से बिजली क्षेत्र को प्रारंभिक तौर पर लगभग 500 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है। पश्चिम गोदावरी जिला सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल है, जहां लगभग 3,700 बिजली के खंभे क्षतिग्रस्त हुए हैं।
मरम्मत कार्य में तेजी लाएंगी विशेष टीमें
कर्नाटक से भेजे जाने वाले 500 प्रशिक्षित बिजली कर्मचारियों को आंध्र प्रदेश के स्थानीय बिजली विभाग के साथ समन्वय कर काम करना होगा। इन कर्मचारियों की मदद से क्षतिग्रस्त बिजली के खंभों को बदलने, टूटी लाइनों की मरम्मत करने और बिजली वितरण व्यवस्था को दोबारा चालू करने में तेजी आने की उम्मीद है।बिजली आपूर्ति बहाल करने के दौरान कर्मचारियों की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण होगी। चक्रवात प्रभावित इलाकों में पानी भरने, पेड़ गिरने और बिजली के तार टूटने जैसी परिस्थितियों में मरम्मत कार्य चुनौतीपूर्ण हो सकता है।ऐसे में बिजली आपूर्ति शुरू करने से पहले संबंधित उपकरणों और लाइनों की सुरक्षा जांच करना जरूरी होगा। कर्नाटक की टीमों के पहुंचने से स्थानीय कर्मचारियों पर काम का दबाव भी कम होने की उम्मीद है।
तेलंगाना और तमिलनाडु भी मदद के लिए आगे आए
आंध्र प्रदेश में बिजली बहाली के लिए कर्नाटक के अलावा अन्य पड़ोसी राज्यों ने भी सहायता की पहल की है। तेलंगाना सरकार ने पहले ही बिजली विभाग के कर्मचारियों और तकनीकी विशेषज्ञों की टीमों को प्रभावित क्षेत्रों में भेजा है।आंध्र प्रदेश सरकार के अनुसार, तेलंगाना से लगभग 500 बिजली कर्मचारी मरम्मत कार्य में सहयोग कर रहे हैं। तमिलनाडु सरकार ने भी 500 बिजली कर्मचारियों को 25 टीमों में विभाजित कर आवश्यक उपकरणों के साथ आंध्र प्रदेश भेजने की जानकारी दी है।इन राज्यों के सहयोग से आंध्र प्रदेश में बिजली बहाली के लिए अतिरिक्त मानव संसाधन और उपकरण उपलब्ध हो रहे हैं। इससे क्षतिग्रस्त क्षेत्रों में मरम्मत कार्य तेज करने में मदद मिल सकती है।
नए चक्रवात 'मुरासु' को लेकर भी सतर्कता
आंध्र प्रदेश अभी चक्रवात अरनब से हुए नुकसान की भरपाई में जुटा है। इसी बीच बंगाल की खाड़ी में विकसित चक्रवाती तूफान 'मुरासु' ने नई चिंता बढ़ा दी है।भारतीय मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, चक्रवात मुरासु के 2 नवंबर की मध्यरात्रि से 3 नवंबर की सुबह के बीच आंध्र प्रदेश के दक्षिणी तट से टकराने की आशंका है। इस दौरान हवा की गति 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे और झोंकों की रफ्तार 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।तेज हवाओं और भारी बारिश से बिजली वितरण व्यवस्था को फिर नुकसान पहुंचने का खतरा है। इसे देखते हुए आंध्र प्रदेश के ऊर्जा विभाग ने बिजली कंपनियों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने और आवश्यक संसाधन तैयार रखने के निर्देश दिए हैं।अधिकारियों को बिजली के खंभे, ट्रांसफॉर्मर, तार, वाहन और मरम्मत उपकरण पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रखने को कहा गया है।
डीके शिवकुमार ने दिया हरसंभव सहयोग का भरोसा
उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं के समय राज्यों के बीच एकजुटता केवल आश्वासन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि वास्तविक सहायता के रूप में दिखाई देनी चाहिए।उन्होंने आंध्र प्रदेश सरकार को भरोसा दिलाया कि कर्नाटक जरूरत के अनुसार आगे भी सहयोग करेगा। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार चक्रवात मुरासु के संभावित प्रभावों पर नजर बनाए हुए है।कर्नाटक सरकार स्थिति का आकलन करने के बाद अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता पर भी विचार करेगी।
प्रभावित परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद
चक्रवात के कारण बिजली आपूर्ति बाधित होने से आम जनजीवन पर व्यापक असर पड़ता है। बिजली नहीं होने पर घरों, अस्पतालों, पेयजल आपूर्ति प्रणालियों, संचार सेवाओं और छोटे उद्योगों के संचालन में कठिनाइयां पैदा हो सकती हैं।ग्रामीण इलाकों में बिजली आपूर्ति बहाल करना विशेष रूप से जरूरी है, क्योंकि कई स्थानों पर पानी की मोटर और कृषि संबंधी गतिविधियां बिजली पर निर्भर रहती हैं।कर्नाटक से मिलने वाली तकनीकी सहायता के कारण आंध्र प्रदेश सरकार को मरम्मत कार्य में अतिरिक्त सहयोग मिलेगा। हालांकि, बिजली बहाली में कितना समय लगेगा, यह क्षति की गंभीरता और मौसम की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।फिलहाल आंध्र प्रदेश में बिजली व्यवस्था को सामान्य बनाने के प्रयास जारी हैं। कर्नाटक, तेलंगाना और तमिलनाडु की सहायता से प्रभावित क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति जल्द बहाल होने की उम्मीद जताई जा रही है।
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