कर्नाटक

मंदिरों के दान पर HC सख्त, डिजिटल सिस्टम लागू करने के निर्देश

Kavita2
8 Sept 2026 1:59 PM IST
मंदिरों के दान पर HC सख्त, डिजिटल सिस्टम लागू करने के निर्देश
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बेंगलुरु। राज्य के मंदिरों में होने वाले दान, फंड और संपत्तियों के प्रबंधन को लेकर हाई कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। अदालत ने मंदिरों की आर्थिक व्यवस्था को पारदर्शी बनाने, फंड की सुरक्षा सुनिश्चित करने और चोरी, गलत इस्तेमाल या हेराफेरी जैसी अनियमितताओं को रोकने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं।

हाई कोर्ट ने हिंदू धार्मिक संस्थान और बंदोबस्त विभाग के कमिश्नर को निर्देश दिया है कि राज्य के सभी मंदिरों में इन गाइडलाइंस को लागू कराया जाए। अदालत ने कहा कि मंदिरों की संपत्ति और आर्थिक संसाधनों की सुरक्षा के लिए प्रभावी व्यवस्था जरूरी है।

मंदिरों के फंड का सही हिसाब रखने पर जोर

कोर्ट ने कहा कि मंदिरों को मिलने वाले दान, आय और संपत्तियों का सही रिकॉर्ड रखा जाना चाहिए। इसके लिए ऐसी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए जिससे हर लेन-देन की निगरानी हो सके और किसी भी तरह की वित्तीय अनियमितता को रोका जा सके।

अदालत ने स्पष्ट किया कि धार्मिक संस्थानों के फंड का इस्तेमाल पूरी पारदर्शिता के साथ होना चाहिए और इसके लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाना चाहिए।

ई-गवर्नेंस विभाग के साथ मिलकर लागू होंगी गाइडलाइंस

हाई कोर्ट ने राज्य के प्रधान सचिव को निर्देश दिया है कि वह ई-गवर्नेंस विभाग के साथ समन्वय बनाकर इन गाइडलाइंस को लागू कराएं।

अदालत का उद्देश्य है कि मंदिरों की वित्तीय व्यवस्था को डिजिटल और सुरक्षित बनाया जाए, ताकि दान और अन्य आय का रिकॉर्ड आसानी से उपलब्ध हो सके।

सभी भुगतान के लिए डिजिटल व्यवस्था पर जोर

कोर्ट की गाइडलाइंस के अनुसार, जहां तक संभव हो, मंदिरों में सभी प्रकार के भुगतान के लिए इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट सिस्टम उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

मंदिरों में आने वाले श्रद्धालुओं को डिजिटल माध्यम से भुगतान की सुविधा दी जाएगी। इससे नकद लेन-देन कम होगा और आर्थिक पारदर्शिता बढ़ेगी।

इन सेवाओं में लागू होगी डिजिटल पेमेंट व्यवस्था

अदालत ने कहा है कि मंदिरों में मिलने वाले विभिन्न प्रकार के भुगतान को डिजिटल सिस्टम से जोड़ा जाना चाहिए।

इसमें शामिल हैं—

हुंडी दान

सामान्य दान

अर्चना और पूजा सेवा टिकट

मंदिर में रहने का शुल्क

पार्किंग शुल्क

प्रसाद बिक्री

धार्मिक पुस्तकों और प्रकाशनों की बिक्री

इन सभी सेवाओं के लिए डिजिटल भुगतान की सुविधा उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।

डिजिटल कियोस्क लगाने की भी अनुमति

कोर्ट ने कहा है कि जहां जरूरत हो, वहां डिजिटल कियोस्क और सेल्फ-सर्विस पेमेंट मशीनें लगाई जा सकती हैं।

इन मशीनों के माध्यम से श्रद्धालु आसानी से भुगतान कर सकेंगे और मंदिर प्रशासन को भी लेन-देन का डिजिटल रिकॉर्ड मिलेगा।

चोरी और हेराफेरी रोकने की कोशिश

हाई कोर्ट ने कहा कि मंदिरों में आने वाले फंड और संपत्तियां धार्मिक और सामाजिक महत्व रखती हैं। इसलिए इनकी सुरक्षा करना जरूरी है।

अदालत ने निर्देश दिया कि फंड के गलत इस्तेमाल, चोरी और हेराफेरी को रोकने के लिए मजबूत निगरानी व्यवस्था बनाई जाए।

डिजिटल रिकॉर्ड और ऑनलाइन भुगतान व्यवस्था से वित्तीय अनियमितताओं पर नियंत्रण लगाने में मदद मिलेगी।

मंदिर प्रशासन में बढ़ेगी जवाबदेही

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल व्यवस्था लागू होने से मंदिर प्रशासन में जवाबदेही बढ़ेगी।

दान और खर्च का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध रहने से निगरानी आसान होगी और श्रद्धालुओं का भरोसा भी मजबूत होगा।

तकनीक के इस्तेमाल से पारदर्शिता

आज के दौर में डिजिटल भुगतान और ई-गवर्नेंस व्यवस्था कई क्षेत्रों में पारदर्शिता बढ़ाने का माध्यम बन चुकी है।

हाई कोर्ट का यह निर्देश भी मंदिरों की वित्तीय व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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