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बेंगलुरु/बेलगावी। कर्नाटक में नंदिनी दूध की कीमत बढ़ाने के प्रस्ताव पर राज्य सरकार ने फिलहाल अंतिम फैसला टाल दिया है। सहकारिता मंत्री लक्ष्मण सावदी ने बुधवार को कहा कि मंगलवार की कैबिनेट बैठक में दूध की कीमतों में बढ़ोतरी के मुद्दे पर चर्चा हुई थी, लेकिन राज्य में आदर्श आचार संहिता लागू होने के कारण निर्णय को रोक दिया गया। सरकार अब चुनाव आयोग से मंजूरी मांगेगी और अनुमति मिलने के बाद आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।
बेलगावी जिले के अथानी में मीडिया से बातचीत करते हुए सावदी ने कहा कि कैबिनेट में दूध की कीमत बढ़ाने के प्रस्ताव पर विचार किया गया। उन्होंने बताया कि आचार संहिता लागू होने की वजह से तत्काल कोई औपचारिक घोषणा नहीं की जा सकती। उनके मुताबिक सरकार इस संबंध में चुनाव आयोग को पत्र लिखकर अनुमति मांगेगी। अनुमति मिलने के बाद ही कीमतों में संशोधन से जुड़ा अगला कदम उठाया जाएगा।
कर्नाटक में इस समय विधान परिषद चुनाव से संबंधित आदर्श आचार संहिता लागू है। इसी कारण सरकार ने दूध की कीमतों पर लिए जाने वाले निर्णय की सार्वजनिक घोषणा रोक रखी है। रिपोर्टों के मुताबिक कैबिनेट ने नंदिनी दूध की कीमत में प्रति लीटर अधिकतम 8 रुपये तक बढ़ोतरी के प्रस्ताव पर विचार किया है। हालांकि अंतिम राशि और इसे लागू करने की तारीख पर औपचारिक फैसला चुनाव आयोग की मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होगा।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्तावित बढ़ोतरी लागू होने की स्थिति में लोकप्रिय ब्लू पैकेट टोंड मिल्क की कीमत 46 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 54 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच सकती है। प्रस्ताव में बढ़ी हुई राशि का बड़ा हिस्सा दूध उत्पादक किसानों को देने की बात सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक संभावित 8 रुपये की बढ़ोतरी में से 6 रुपये दूध उत्पादकों और शेष 2 रुपये दूध संघों को दिए जाने का प्रस्ताव है।
दूध की कीमत बढ़ाने की मांग पिछले कुछ समय से कर्नाटक के विभिन्न दुग्ध संघों की ओर से उठाई जा रही थी। सितंबर में कर्नाटक स्टेट कोऑपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर्स यूनियनों के प्रतिनिधियों ने सरकार से नंदिनी दूध के दाम में 8 से 10 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की मांग की थी। संघों का कहना था कि पशु चारे, दवाओं, परिवहन और पैकेजिंग समेत दूध उत्पादन से जुड़ी लागत लगातार बढ़ रही है।
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने उस बैठक के बाद अधिकारियों से दूसरे राज्यों में दूध की कीमतों और किसानों को मिलने वाले खरीद मूल्य का ब्योरा मांगा था। सरकार यह समझना चाहती थी कि कर्नाटक में दूध उत्पादकों को मिलने वाला मूल्य पड़ोसी राज्यों के मुकाबले कितना है और मौजूदा उत्पादन लागत के हिसाब से कितनी बढ़ोतरी उचित होगी।
रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि कर्नाटक के कई हिस्सों में सूखे की स्थिति और चारे की कमी ने दूध उत्पादकों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव डाला है। राज्य के बड़ी संख्या में तालुक सूखा प्रभावित घोषित किए जा चुके हैं और सरकार ने केंद्र से राहत राशि भी मांगी है। किसानों को फसल नुकसान, पानी की कमी और पशु चारे की उपलब्धता से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
इसी पृष्ठभूमि में दुग्ध संघों ने तर्क दिया है कि दूध की खरीद कीमत बढ़ाए बिना किसानों के लिए पशुपालन को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाए रखना मुश्किल हो रहा है। संघों का कहना है कि उत्पादन लागत बढ़ने के बावजूद किसानों को मिलने वाली राशि उसी अनुपात में नहीं बढ़ी है। सरकार भी इस प्रस्ताव को किसानों के हित और उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले अतिरिक्त बोझ, दोनों पहलुओं से देख रही है।
नंदिनी दूध की कीमत में पिछले कुछ वर्षों में कई बार संशोधन हो चुका है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार नवंबर 2022 में कीमत 3 रुपये प्रति लीटर बढ़ाई गई थी। जुलाई 2023 में फिर 3 रुपये, जून 2024 में 2 रुपये और मार्च 2025 में 4 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई थी। यदि मौजूदा प्रस्ताव लागू होता है तो नवंबर 2022 के बाद यह पांचवां बड़ा संशोधन होगा।
जून 2024 में कर्नाटक मिल्क फेडरेशन ने उपभोक्ताओं को प्रति लीटर अतिरिक्त 50 मिलीलीटर दूध देने की व्यवस्था भी शुरू की थी, जिसे बाद में वापस ले लिया गया। इसके बाद कीमतों और मात्रा को लेकर अलग-अलग समय पर उपभोक्ताओं तथा दूध उत्पादक संगठनों के बीच चर्चा होती रही है।
मंगलवार की कैबिनेट बैठक के बाद सामने आई जानकारी के मुताबिक सरकार दूध की कीमत बढ़ाने के प्रस्ताव पर सकारात्मक रूप से विचार कर रही है, लेकिन आदर्श आचार संहिता के कारण तत्काल घोषणा करने से बच रही है। कैबिनेट ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को बढ़ोतरी की मात्रा और इसे लागू करने के तौर-तरीकों पर अंतिम निर्णय लेने का अधिकार भी दिया है।
हालांकि मंत्री लक्ष्मण सावदी का बुधवार का बयान इस बात पर केंद्रित रहा कि प्रक्रिया चुनाव आयोग की अनुमति के बाद ही आगे बढ़ेगी। उन्होंने साफ किया कि सरकार आचार संहिता का पालन करते हुए आयोग से औपचारिक मंजूरी मांगेगी। ऐसे में जब तक आयोग का जवाब नहीं आता, तब तक नंदिनी दूध की नई कीमतों को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं मानी जाएगी।
दूध की संभावित कीमत बढ़ोतरी का सीधा असर राज्य के लाखों उपभोक्ताओं पर पड़ेगा, वहीं दूसरी ओर सरकार इसे किसानों और दुग्ध उत्पादकों की आय से भी जोड़कर देख रही है। कर्नाटक में नंदिनी ब्रांड का बड़ा उपभोक्ता आधार है और घरेलू उपयोग से लेकर होटल, चाय दुकान तथा खाद्य व्यवसाय तक इसकी व्यापक मांग है। इसलिए कीमत में किसी भी बड़े बदलाव का असर राज्य की रोजमर्रा की उपभोक्ता अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा।
फिलहाल सरकार की अगली कार्रवाई चुनाव आयोग के रुख पर निर्भर करेगी। आयोग से अनुमति मिलने के बाद ही दूध की कीमत में बढ़ोतरी की राशि, लागू होने की तारीख और किसानों व दूध संघों के बीच अतिरिक्त राशि के वितरण को लेकर औपचारिक घोषणा होने की उम्मीद है।
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