कर्नाटक

मन की बात में PM मोदी ने की थी तारीफ अब निंगम्मा को दुकान नहीं लगाने का निर्देश

Kavita2
5 Sept 2026 12:58 PM IST
मन की बात में PM मोदी ने की थी तारीफ अब निंगम्मा को दुकान नहीं लगाने का निर्देश
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बेंगलुरु। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम में तारीफ पाने वाली बेंगलुरु की स्ट्रीट वेंडर टीएस निंगम्मा एक बार फिर चर्चा में हैं। अपनी मेहनत और पीएम स्वनिधि योजना की मदद से छोटे कारोबार को आगे बढ़ाकर परिवार की जिंदगी बदलने वाली निंगम्मा को अब मुश्किल स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। होसाहल्ली मेट्रो स्टेशन के पास फुटपाथ पर इडली, डोसा और सांभर बेचकर आजीविका चलाने वाली निंगम्मा का कहना है कि ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) के अधिकारियों ने उन्हें मौखिक रूप से वहां कारोबार नहीं करने और दुकान नहीं लगाने का निर्देश दिया है।

निंगम्मा की कहानी इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि कुछ समय पहले प्रधानमंत्री मोदी ने ‘मन की बात’ में उनके संघर्ष और आत्मनिर्भर बनने की यात्रा की सराहना की थी। वह पीएम स्वनिधि योजना की मदद से अपने छोटे कारोबार को बेहतर बनाने में सफल रही थीं और इससे होने वाली कमाई के जरिए अपने बच्चों की पढ़ाई का खर्च भी उठा रही हैं।

हासन से बेंगलुरु आकर शुरू किया छोटा कारोबार

टीएस निंगम्मा मूल रूप से कर्नाटक के हासन की रहने वाली हैं। वह अपने पति के साथ बेंगलुरु में रहती हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर करने और नियमित आमदनी का साधन तैयार करने के लिए दोनों ने मिलकर छोटा कारोबार शुरू किया।

उन्होंने इडली, डोसा और सांभर बेचने से शुरुआत की। सीमित संसाधनों के बावजूद दंपती ने मेहनत जारी रखी और धीरे-धीरे ग्राहकों के बीच अपनी पहचान बनाई।

निंगम्मा मगाडी रोड स्थित होसाहल्ली मेट्रो स्टेशन के पास सड़क किनारे अपना छोटा सा फूड स्टॉल चलाती रही हैं।

PM स्वनिधि से मिली मदद

छोटे कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए निंगम्मा को अतिरिक्त पूंजी की जरूरत थी। इसी दौरान उन्हें केंद्र सरकार की पीएम स्वनिधि योजना से सहायता मिली।

इस मदद से उन्होंने अपनी रेहड़ी को बेहतर कराया और कारोबार का विस्तार किया। पहले सीमित स्तर पर चल रहा उनका काम धीरे-धीरे परिवार की आजीविका का महत्वपूर्ण साधन बन गया।

पीएम स्वनिधि योजना का उद्देश्य रेहड़ी-पटरी और छोटे स्तर पर कारोबार करने वाले स्ट्रीट वेंडरों को कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराकर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है।

मन की बात में पीएम मोदी ने की तारीफ

निंगम्मा की मेहनत और योजना के जरिए अपने कारोबार को आगे बढ़ाने की कहानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक भी पहुंची। प्रधानमंत्री ने अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में उनकी तारीफ की।

इसके बाद निंगम्मा की कहानी व्यापक स्तर पर चर्चा में आई। एक साधारण स्ट्रीट वेंडर के रूप में शुरुआत कर सरकारी योजना की मदद से अपने कारोबार को मजबूत करने की उनकी यात्रा को आत्मनिर्भरता की मिसाल के रूप में देखा गया।

प्रधानमंत्री की ओर से उल्लेख किए जाने के बाद निंगम्मा की पहचान उनके इलाके से बाहर भी बनी।

बच्चों की शिक्षा का खर्च उठा रही निंगम्मा

निंगम्मा के लिए यह छोटा कारोबार केवल कमाई का साधन नहीं है। इससे होने वाली आय के जरिए वह अपने परिवार की जरूरतों को पूरा करने के साथ बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने का प्रयास कर रही हैं।

उनकी कहानी यह दिखाती है कि छोटे स्तर पर शुरू किया गया व्यवसाय भी किसी परिवार के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है।

निंगम्मा और उनके पति ने मेहनत के जरिए अपने कारोबार को परिवार की आर्थिक मजबूती का आधार बनाया।

अब सामने आई नई मुश्किल

प्रधानमंत्री की तारीफ मिलने के कुछ समय बाद निंगम्मा को नई समस्या का सामना करना पड़ा है। होसाहल्ली मेट्रो स्टेशन के पास फुटपाथ पर कारोबार करने वाली निंगम्मा को GBA अधिकारियों ने कथित तौर पर मौखिक निर्देश दिया कि वह वहां दुकान न लगाएं।

इस निर्देश के बाद उनकी रोजी-रोटी को लेकर चिंता पैदा हो गई है। सड़क किनारे फूड स्टॉल ही उनके परिवार की आय का प्रमुख साधन है।

यदि वह वहां कारोबार नहीं कर पाती हैं तो उनके सामने आजीविका बनाए रखने के लिए वैकल्पिक स्थान तलाशने की चुनौती खड़ी हो सकती है।

फुटपाथ पर कारोबार को लेकर सवाल

बेंगलुरु जैसे बड़े शहर में फुटपाथ और सार्वजनिक स्थानों पर स्ट्रीट वेंडिंग का मुद्दा लंबे समय से प्रशासन के लिए चुनौती रहा है।

एक तरफ पैदल यात्रियों के लिए फुटपाथ खाली रखना और यातायात व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है, वहीं दूसरी तरफ हजारों परिवारों की आजीविका रेहड़ी-पटरी के कारोबार पर निर्भर है।

निंगम्मा का मामला भी इसी संतुलन से जुड़ा हुआ दिखाई देता है।

छोटे कारोबार से बदली परिवार की जिंदगी

हासन से बेंगलुरु आने के बाद निंगम्मा और उनके पति ने इडली, डोसा और सांभर बेचने का काम शुरू किया था। धीरे-धीरे उन्होंने अपनी मेहनत से इसे आगे बढ़ाया।

पीएम स्वनिधि से मिली सहायता ने उन्हें अपने कारोबार को व्यवस्थित करने का अवसर दिया। रेहड़ी में सुधार करने के बाद वह अधिक व्यवस्थित तरीके से काम करने लगीं।

इस कारोबार से होने वाली आमदनी ने उनके परिवार को आर्थिक सहारा दिया और बच्चों की शिक्षा जारी रखने में भी मदद की।

स्ट्रीट वेंडरों के लिए बनीं उदाहरण

निंगम्मा की कहानी उन हजारों स्ट्रीट वेंडरों के लिए उदाहरण बनकर सामने आई, जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपना छोटा व्यवसाय चला रहे हैं।

सरकारी सहायता का सही इस्तेमाल और मेहनत के जरिए व्यवसाय को आगे बढ़ाने की उनकी कोशिश की प्रधानमंत्री ने भी सराहना की थी।

यही वजह है कि अब उन्हें दुकान नहीं लगाने के कथित निर्देश की खबर सामने आने के बाद मामला चर्चा में है।

आजीविका और नियमों के बीच संतुलन की चुनौती

स्ट्रीट वेंडरों से जुड़े मामलों में प्रशासन के सामने नियमों के पालन के साथ उनकी आजीविका की सुरक्षा की चुनौती भी रहती है।

ऐसे मामलों में निर्धारित वेंडिंग जोन, वैकल्पिक स्थान और नियमानुसार कारोबार की व्यवस्था महत्वपूर्ण होती है।

निंगम्मा के मामले में अब यह देखना होगा कि स्थानीय प्रशासन उनकी आजीविका को लेकर क्या कदम उठाता है और क्या उन्हें कारोबार जारी रखने के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराई जाती है।

आगे के फैसले पर नजर

फिलहाल निंगम्मा को मौखिक रूप से दुकान नहीं लगाने का निर्देश दिए जाने की बात सामने आई है। ऐसे में उनके कारोबार के भविष्य को लेकर स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार है।

पीएम स्वनिधि की मदद से अपना छोटा व्यवसाय आगे बढ़ाकर परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत करने वाली निंगम्मा की कहानी पहले आत्मनिर्भरता की मिसाल बनी और अब उनकी आजीविका से जुड़ा यह मामला नई चर्चा का विषय बन गया है।

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