
बेंगलुरु। कर्नाटक के प्रसिद्ध मैसूर दशहरा महोत्सव के दौरान नंदी ध्वज पूजा कार्यक्रम में मंत्रियों को प्रवेश से रोके जाने का मामला अब राजनीतिक विवाद में बदल गया है। बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को मैसूर पैलेस परिसर में हुई घटना को लेकर विपक्षी दल भाजपा और जनता दल सेक्युलर (जेडीएस) ने कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। जेडीएस के पूर्व विधायक अश्विन कुमार ने इस घटना को दलित मंत्रियों का अपमान बताते हुए मंत्री प्रियांक खड़गे के इस्तीफे की मांग की है। उनका कहना है कि कार्यक्रम से संबंधित प्रोटोकॉल की जिम्मेदारी जिस विभाग के अंतर्गत आती है, उसके मंत्री को जवाबदेही स्वीकार करनी चाहिए। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने घटना को गंभीर बताते हुए मुख्य सचिव शालिनी रजनीश को जांच के निर्देश दिए हैं।
मैसूर दशहरा में मंत्रियों को रोकने पर विवाद
कर्नाटक में बुधवार को विजयादशमी के अवसर पर विश्व प्रसिद्ध मैसूर दशहरा महोत्सव का आयोजन किया गया।
मैसूर पैलेस परिसर में नंदी ध्वज पूजा और जंबू सवारी की तैयारियां चल रही थीं। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार सहित राज्य सरकार के कई मंत्री शामिल हुए।
इसी दौरान कार्यक्रम स्थल की ओर जा रहे कुछ मंत्रियों को पुलिस अधिकारियों ने प्रवेश करने से रोक दिया।
घटना के बाद मंत्रियों और पुलिस अधिकारियों के बीच बहस होने की जानकारी सामने आई।
मामले का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गईं।
एसपी सीबी ऋष्यंत पर मंत्रियों को रोकने का आरोप
रिपोर्टों के अनुसार, कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी सीबी ऋष्यंत ने मुख्यमंत्री के साथ आगे बढ़ रहे कुछ मंत्रियों को रोक दिया।
इनमें कन्नड़ एवं संस्कृति मंत्री शिवराज तंगदागी, पीएम नरेंद्र स्वामी और केएस बसवंतप्पा शामिल थे।
कुछ रिपोर्टों में एचसी बालकृष्ण का नाम भी सामने आया है।
बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री को कार्यक्रम स्थल की ओर जाने दिया गया, लेकिन उनके पीछे चल रहे मंत्रियों को सुरक्षा और प्रवेश अनुमति का हवाला देकर रोका गया।
इसके बाद मौके पर कुछ समय के लिए असहज स्थिति पैदा हो गई।
जेडीएस नेता अश्विन कुमार ने उठाए सवाल
जेडीएस के पूर्व विधायक अश्विन कुमार ने इस घटना को लेकर कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला।
टी. नरसीपुर विधानसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक रहे अश्विन कुमार ने बेंगलुरु स्थित जेडीएस कार्यालय जेपी भवन में पत्रकारों से बातचीत की।
उन्होंने आरोप लगाया कि दशहरा जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन में दलित समुदाय से आने वाले मंत्रियों को रोकना अपमानजनक है।
अश्विन कुमार ने सवाल उठाया कि जब राज्य सरकार के मंत्रियों को ही आधिकारिक कार्यक्रम में इस तरह की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है, तो आम नागरिकों के सम्मान की स्थिति क्या होगी।
उन्होंने मामले की जिम्मेदारी तय करने और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की।
प्रियांक खड़गे से मांगा इस्तीफा
जेडीएस नेता अश्विन कुमार ने मंत्री प्रियांक खड़गे को भी इस विवाद में घेरा।
उन्होंने दावा किया कि कार्यक्रम के प्रोटोकॉल से जुड़ी जिम्मेदारी प्रियांक खड़गे के विभाग के अंतर्गत आती है।
इसी आधार पर उन्होंने खड़गे से घटना की जिम्मेदारी स्वीकार करने और मंत्री पद से इस्तीफा देने की मांग की।
हालांकि, प्रोटोकॉल की जिम्मेदारी किस विभाग और अधिकारी को सौंपी गई थी, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
अश्विन कुमार का यह बयान राजनीतिक मांग के रूप में सामने आया है। मामले में किसी मंत्री की प्रशासनिक जिम्मेदारी निर्धारित होने की पुष्टि नहीं हुई है।
दलित मंत्रियों के अपमान का लगाया आरोप
जेडीएस ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट के माध्यम से भी कांग्रेस सरकार की आलोचना की है।
पार्टी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस चुनावों के दौरान दलित समुदाय से समर्थन प्राप्त करती है, लेकिन सत्ता में आने के बाद दलित नेताओं को पर्याप्त सम्मान नहीं देती।
जेडीएस ने मैसूर दशहरा में मंत्रियों को रोकने की घटना को इसी आरोप से जोड़कर प्रस्तुत किया।
पार्टी ने कांग्रेस के सामाजिक न्याय और संविधान के प्रति प्रतिबद्धता संबंधी दावों पर भी सवाल उठाए।
हालांकि, यह विपक्ष का आरोप है। पुलिस अधिकारियों द्वारा मंत्रियों को रोके जाने के पीछे जातिगत भेदभाव की मंशा होने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
शिवराज तंगदागी और पुलिस अधिकारी में बहस
घटना के दौरान कन्नड़ एवं संस्कृति मंत्री शिवराज तंगदागी ने पुलिस अधिकारी के सामने नाराजगी व्यक्त की।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने अधिकारी को बताया कि वह राज्य सरकार में संस्कृति मंत्री हैं।
इसके बावजूद प्रवेश को लेकर कुछ समय तक विवाद बना रहा।
सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में मंत्रियों और पुलिस अधिकारी के बीच बातचीत तथा बहस दिखाई देती है।
इसके बाद मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने हस्तक्षेप किया और मंत्रियों को कार्यक्रम में शामिल होने दिया गया।
मुख्यमंत्री ने दिए जांच के आदेश
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए पुलिस अधिकारियों के व्यवहार को गंभीर मामला बताया है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के मंत्रियों को आधिकारिक पूजा कार्यक्रम में प्रवेश से रोकना स्वीकार्य नहीं है।
मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव शालिनी रजनीश को मामले की विस्तृत जांच करने का निर्देश दिया है।
उन्होंने कहा कि जांच के माध्यम से जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान की जाएगी।
जांच रिपोर्ट मिलने के बाद नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को अपने कर्तव्यों का पालन करते समय अनुशासन और जनप्रतिनिधियों के प्रति सम्मान बनाए रखने की आवश्यकता भी बताई।
सुरक्षा प्रोटोकॉल को लेकर उठे सवाल
इस घटना के बाद बड़े सरकारी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सुरक्षा प्रोटोकॉल को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।
मैसूर दशहरा जैसे आयोजन में बड़ी संख्या में अतिथि, वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि और श्रद्धालु शामिल होते हैं।
ऐसे कार्यक्रमों में सुरक्षा के लिए प्रवेश पास, पहचान सत्यापन और निर्धारित मार्गों की व्यवस्था की जाती है।
हालांकि, मंत्रियों जैसे आधिकारिक अतिथियों की आवाजाही को लेकर पुलिस और आयोजन समिति के बीच स्पष्ट समन्वय आवश्यक होता है।
अब जांच में यह देखा जाएगा कि संबंधित पुलिस अधिकारी को क्या निर्देश दिए गए थे और मंत्रियों को किस आधार पर रोका गया।
मैसूर दशहरा का है विशेष महत्व
मैसूर दशहरा कर्नाटक के सबसे प्रसिद्ध सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजनों में शामिल है।
विजयादशमी के दिन मैसूर पैलेस परिसर में नंदी ध्वज पूजा और जंबू सवारी का विशेष आयोजन किया जाता है।
इस दौरान देवी चामुंडेश्वरी की प्रतिमा को सुसज्जित हाथी पर रखकर भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है।
कार्यक्रम में पारंपरिक संगीत, नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र होती हैं।
आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, 21 अक्टूबर को दोपहर 1:36 बजे से नंदी ध्वज पूजा निर्धारित थी, जबकि शाम 4:10 बजे देवी चामुंडेश्वरी की पुष्पार्चना का कार्यक्रम रखा गया था।
भाजपा और जेडीएस ने सरकार को घेरा
मंत्रियों को प्रवेश से रोके जाने की घटना के बाद विपक्षी दलों ने राज्य सरकार की प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।
जेडीएस ने इसे दलित मंत्रियों के सम्मान से जुड़ा मामला बताया है।
भाजपा की ओर से भी घटना को लेकर कांग्रेस सरकार की आलोचना किए जाने की जानकारी सामने आई है।
विपक्ष का कहना है कि आधिकारिक समारोहों में मंत्रियों के प्रवेश और सुरक्षा व्यवस्था का समुचित प्रबंधन सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने जांच के आदेश देकर प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू की है।
जांच रिपोर्ट से स्पष्ट होगी जिम्मेदारी
मैसूर दशहरा के दौरान हुई यह घटना अब कर्नाटक की राजनीति में चर्चा का विषय बनी हुई है।
जेडीएस नेता अश्विन कुमार ने प्रियांक खड़गे के इस्तीफे की मांग की है, जबकि पार्टी ने कांग्रेस पर दलित मंत्रियों के अपमान का आरोप लगाया है।
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मामले को गंभीर मानते हुए जांच के निर्देश दिए हैं।
अब जांच रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि मंत्रियों को रोकने के पीछे सुरक्षा व्यवस्था, प्रोटोकॉल संबंधी भ्रम या अधिकारियों के बीच समन्वय की कमी में से कौन-सा कारण जिम्मेदार था।
फिलहाल प्रियांक खड़गे से इस्तीफे की मांग विपक्ष की राजनीतिक मांग है, जबकि किसी मंत्री या अधिकारी की जिम्मेदारी पर अंतिम आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।





