
बेंगलुरु। कर्नाटक में कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) से जुड़े कथित घोटालों को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने बीजेपी और जेडीएस पर तीखा हमला करते हुए दोनों दलों को KPSC में हुए कथित घोटालों का "जनक" बताया है। उन्होंने विपक्ष की ओर से राज्य सरकार के खिलाफ निकाले जा रहे मार्च पर भी पलटवार किया और कहा कि उनकी सरकार विपक्ष के आरोपों में समय बर्बाद करने के बजाय विकास कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
पत्रकारों से बातचीत के दौरान डी.के. शिवकुमार ने बीजेपी के विरोध प्रदर्शन और मार्च से जुड़े सवालों का जवाब देते हुए पिछली सरकारों के कार्यकाल पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के शासनकाल में हुए कथित घोटालों की कोई गिनती नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य पुराने विवादों में उलझकर समय गंवाना नहीं बल्कि राज्य के विकास के लिए काम करना है।
शिवकुमार ने KPSC से जुड़े विवादों का जिक्र करते हुए पूर्व अध्यक्ष शिवशंकरप्पा साहूकार की नियुक्ति को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि शिवशंकरप्पा साहूकार को KPSC का अध्यक्ष किसने नियुक्त किया था और उस समय उनके संपर्क में कौन था। इस सवाल के जरिए उन्होंने बीजेपी को घेरने की कोशिश की।
उन्होंने दावा किया कि शिवशंकरप्पा साहूकार को उस समय कर्नाटक लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष बनाया गया था जब बी.एस. येदियुरप्पा के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार राज्य की सत्ता में थी। शिवकुमार ने इसी आधार पर KPSC से जुड़े विवादों को लेकर बीजेपी की आलोचना की और विपक्ष के आरोपों पर पलटवार किया।
KPSC राज्य में विभिन्न सरकारी पदों पर भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ा महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्थान है। ऐसे में आयोग की भर्ती प्रक्रियाओं या कामकाज पर सवाल उठने पर मामला सीधे लाखों अभ्यर्थियों से जुड़ जाता है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले उम्मीदवारों के लिए भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और समयबद्धता बेहद महत्वपूर्ण होती है।
राज्य में KPSC से जुड़े मुद्दों को लेकर समय-समय पर राजनीतिक विवाद सामने आते रहे हैं। भर्ती परीक्षाओं, चयन प्रक्रिया और आयोग के कामकाज को लेकर विपक्ष तथा सत्तारूढ़ दल एक-दूसरे पर आरोप लगाते रहे हैं। अब मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के ताजा बयान ने इस मुद्दे को एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।
बीजेपी की ओर से सरकार के खिलाफ निकाले जा रहे मार्च पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवकुमार ने कहा कि विपक्ष को प्रदर्शन करने का अधिकार है, लेकिन सरकार अपने विकास के एजेंडे से नहीं भटकेगी। उनका कहना था कि विपक्ष के शासनकाल में हुए कथित घोटालों की चर्चा करते रहने के बजाय मौजूदा सरकार लोगों से जुड़े विकास कार्यों को आगे बढ़ाना चाहती है।
शिवकुमार का यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब राज्य में सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों को लेकर राजनीतिक टकराव चल रहा है। बीजेपी लगातार सरकार को विभिन्न मामलों में घेरने की कोशिश कर रही है, जबकि सत्तारूढ़ पक्ष पिछली बीजेपी सरकार के कार्यकाल से जुड़े मामलों को सामने रखकर जवाब दे रहा है।
KPSC का मुद्दा राजनीतिक रूप से इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि इसका सीधा संबंध सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं से है। भर्ती परीक्षा में किसी भी तरह की अनियमितता का आरोप सामने आने पर उम्मीदवारों में चिंता बढ़ जाती है। अभ्यर्थियों की मांग रहती है कि परीक्षाएं निष्पक्ष तरीके से हों और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए संकेत दिया कि सरकार बीजेपी और जेडीएस के आरोपों से दबाव में आने वाली नहीं है। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष के पास अपनी सरकारों के कार्यकाल में सामने आए कथित मामलों का जवाब देने के लिए बहुत कुछ है। इसी क्रम में उन्होंने KPSC के पूर्व अध्यक्ष की नियुक्ति का मुद्दा उठाया।
शिवकुमार की टिप्पणी से यह साफ है कि सत्तारूढ़ पक्ष विपक्ष के मार्च का जवाब राजनीतिक रूप से देने की रणनीति अपना रहा है। बीजेपी जहां मौजूदा सरकार के खिलाफ मुद्दे उठाकर सड़कों पर उतर रही है, वहीं सरकार पिछली बीजेपी सरकार के फैसलों और नियुक्तियों को लेकर सवाल खड़े कर रही है।
बी.एस. येदियुरप्पा का नाम लेते हुए शिवकुमार ने यह बताने की कोशिश की कि KPSC से जुड़े विवादों की जिम्मेदारी केवल वर्तमान सरकार पर नहीं डाली जा सकती। उनके मुताबिक आयोग में महत्वपूर्ण नियुक्तियां बीजेपी सरकार के कार्यकाल में भी की गई थीं और इसलिए विपक्ष को अपने पुराने फैसलों पर भी जवाब देना चाहिए।
हालांकि शिवकुमार द्वारा लगाए गए आरोप राजनीतिक दावे हैं। इन आरोपों और KPSC के अलग-अलग मामलों में जिम्मेदारी का निर्धारण संबंधित जांच, दस्तावेजों और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर ही किया जा सकता है। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता और अभ्यर्थियों का भरोसा बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण पहलू है।
कर्नाटक की राजनीति में कांग्रेस, बीजेपी और जेडीएस के बीच लंबे समय से तीखा मुकाबला रहा है। सरकार की नीतियों से लेकर प्रशासनिक फैसलों तक विपक्ष लगातार सवाल उठाता रहा है। वहीं कांग्रेस सरकार भी पिछली सरकारों के कार्यकाल के मुद्दों को उठाकर बीजेपी और जेडीएस को जवाब देती रही है।
अब KPSC को लेकर शुरू हुआ नया विवाद भी इसी राजनीतिक टकराव का हिस्सा बनता दिखाई दे रहा है। शिवकुमार के बयान के बाद बीजेपी और जेडीएस की प्रतिक्रिया पर भी नजर रहेगी। खासकर पूर्व अध्यक्ष की नियुक्ति और आयोग से जुड़े कथित घोटालों पर मुख्यमंत्री द्वारा उठाए गए सवालों का विपक्ष किस तरह जवाब देता है, यह महत्वपूर्ण होगा।
इस पूरे राजनीतिक विवाद के बीच सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों की नजर KPSC की भर्ती प्रक्रियाओं पर बनी हुई है। उनके लिए राजनीतिक आरोपों से अधिक महत्वपूर्ण यह है कि भर्ती परीक्षाएं समय पर और पारदर्शी तरीके से पूरी हों तथा योग्य उम्मीदवारों को निष्पक्ष अवसर मिले।
फिलहाल मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने बीजेपी और जेडीएस पर सीधा हमला बोलकर KPSC विवाद को नया राजनीतिक मोड़ दे दिया है। उन्होंने विपक्ष के मार्च पर पलटवार करते हुए पिछली सरकारों के कथित घोटालों का मुद्दा उठाया और साफ किया कि उनकी सरकार विपक्ष के आरोपों में उलझने के बजाय विकास पर अपना ध्यान केंद्रित रखेगी।





