
Kerala केरल: अरूर पंचायत के चीथुपरम्बा के रहने वाले लेनिन और राजी के तीन बच्चों में सबसे छोटी निया (13) की कुछ दिन पहले सांप के काटने के बाद इलाज के दौरान मौत हो गई। इस दुखद घटना ने परिवार को मानसिक और वित्तीय दोनों ही रूप से झकझोर दिया है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, निया को प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया था। गंभीर हालत में रहने के कारण उसका इलाज लंबा चला। इलाज के 24 दिनों के दौरान परिवार ने करीब आठ लाख रुपये खर्च किए। निया की मौत के बाद अस्पताल प्रशासन ने अतिरिक्त 2.57 लाख रुपये की राशि देने की मांग की, जिससे परिवार पर आर्थिक दबाव और बढ़ गया।
हालांकि निया की मौत रविवार सुबह 7.28 बजे कन्फर्म की गई थी, लेकिन अस्पताल के अधिकारियों ने उसके शव को आठ घंटे तक परिवार को सौंपने में देरी की। इस दौरान लेनिन और राजी परिवार के सदस्यों के साथ मानसिक तनाव में थे और अस्पताल प्रशासन के रवैये से नाराज़ भी थे।
परिवार और गांव के लोग अस्पताल की इस कार्रवाई को असंवेदनशील बता रहे हैं। उनका कहना है कि अस्पताल प्रशासन की लापरवाही और इलाज के भारी खर्च ने पहले ही दुखी परिवार पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले में पारदर्शिता और संवेदनशीलता दिखाई जाए।
चिकित्सकों ने बताया कि सांप के काटने के मामलों में समय पर उचित एंटीवेनम और निगरानी बहुत महत्वपूर्ण होती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर इलाज के लिए देर होने और अस्पताल खर्च के कारण परिवारों पर आर्थिक और मानसिक दबाव बढ़ जाता है।
इस घटना ने अरूर पंचायत और आसपास के इलाके में भी लोगों में चिंता और सहानुभूति पैदा की है। ग्रामीण और स्थानीय समाजिक संगठन परिवार की मदद करने की कोशिश कर रहे हैं।
परिवार ने भी स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से अपील की है कि ऐसी घटनाओं में खर्च और इलाज को लेकर सहूलियतें उपलब्ध कराई जाएं और अस्पतालों में संवेदनशीलता बनाए रखी जाए।
यह मामला सांप के काटने से होने वाली मौतों और उनके इलाज की महंगाई पर एक गंभीर चेतावनी बन गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में एंटीवेनम की उपलब्धता और समय पर इलाज के साथ-साथ अस्पतालों में पारदर्शी बिलिंग प्रणाली की आवश्यकता है, ताकि गरीब परिवारों को वित्तीय बोझ का सामना न करना पड़े।





