मध्य प्रदेश

बांग्लादेश के रास्ते भारत लाई गईं म्यांमार की 4 युवतियां, अलीगढ़ से बरामद

nidhi
7 Oct 2026 6:49 AM IST
बांग्लादेश के रास्ते भारत लाई गईं म्यांमार की 4 युवतियां, अलीगढ़ से बरामद
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म्यांमार की युवतियों की ‘डंकी रूट’ से एंट्री
अलीगढ़: म्यांमार की चार युवतियों को कथित तौर पर बांग्लादेश के रास्ते अवैध तरीके से भारत लाने का मामला सामने आया है। मध्य प्रदेश की गवर्नमेंट रेलवे पुलिस (GRP) की जांच के दौरान उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में चारों युवतियां मिलीं। इनमें दो नाबालिग बताई गई हैं। पुलिस को आशंका है कि यह मामला मानव तस्करी के एक बड़े नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है।
जांच की शुरुआत तब हुई जब भोपाल GRP कंट्रोल रूम को सूचना मिली कि स्वर्ण जयंती एक्सप्रेस में यात्रा कर रहा एक व्यक्ति म्यांमार और बांग्लादेश के शरणार्थी समुदाय से महिलाओं को भारत लाने के नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है। इस सूचना के आधार पर ग्वालियर GRP ने संदिग्ध युवक को ट्रेन से उतारकर पूछताछ की। उसकी पहचान 25 वर्षीय मुबीन के रूप में हुई, जो म्यांमार का नागरिक बताया गया और पिछले कुछ वर्षों से हैदराबाद में रह रहा था।
पूछताछ के दौरान मुबीन ने कथित तौर पर एक अन्य व्यक्ति मोहम्मद हसन के बारे में जानकारी दी। इसके बाद पुलिस ने अलीगढ़ में एक किराए के मकान पर दबिश दी। यहां से हसन के साथ चार म्यांमार की युवतियां मिलीं। पुलिस के अनुसार, चारों के पास UNHCR कार्ड थे। दो युवतियों की पहचान सारा और शुकुतारा के रूप में की गई है, जबकि दो अन्य नाबालिग बताई गई हैं। प्रारंभिक पूछताछ में युवतियों ने बताया कि वे बांग्लादेश के शरणार्थी कैंप में रह रही थीं। कथित तौर पर उन्हें कठिन रास्तों, नदी और पहाड़ी इलाकों से होते हुए भारत में प्रवेश कराया गया। पुलिस को शक है कि इसके लिए ‘डंकी रूट’ का इस्तेमाल किया गया। जांच में यह भी सामने आया कि इन्हें आगे जम्मू-कश्मीर ले जाने की योजना थी, जहां उनकी शादी कराए जाने की बात कही गई थी।
पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि युवतियों को भारत लाने और आगे पहुंचाने के लिए कथित रूप से प्रति युवती 15 हजार रुपये दिए गए थे। अधिकारियों का मानना है कि यदि यह दावा सही पाया जाता है तो इसके पीछे संगठित मानव तस्करी नेटवर्क हो सकता है। मामले के अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय पहलुओं को देखते हुए GRP ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA से जांच की मांग की है।
पूछताछ में भाषा की समस्या भी सामने आई क्योंकि युवतियां हिंदी या अंग्रेजी नहीं समझ पा रही थीं। पुलिस ने शुरुआत में अनुवाद के लिए डिजिटल माध्यम का सहारा लिया और बाद में द्विभाषी अनुवादक की मदद से उनसे बातचीत की। युवतियों ने कथित तौर पर कहा कि वे अपने परिवार की सहमति से भारत आई थीं। हालांकि पुलिस अब यह जांच कर रही है कि उन्हें किसी दबाव, लालच या धोखे से भारत लाया गया था या नहीं। यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब अवैध सीमा पार आवाजाही और मानव तस्करी नेटवर्क को लेकर सुरक्षा एजेंसियां लगातार कार्रवाई कर रही हैं। सितंबर 2026 में लखनऊ की एक विशेष NIA अदालत ने म्यांमार के चार नागरिकों को अवैध प्रवेश, फर्जी भारतीय दस्तावेज और मानव तस्करी से जुड़े पुराने मामले में सात साल की सजा सुनाई थी। उस केस में भी जांच एजेंसियों ने बांग्लादेश के रास्ते लोगों को भारत लाने वाले संगठित नेटवर्क का आरोप लगाया था।
फिलहाल अलीगढ़ से मिली चारों युवतियों और पकड़े गए दो व्यक्तियों से जुड़ी पूरी कड़ी की जांच जारी है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं और भारत में इनके संपर्क किन-किन राज्यों तक फैले हुए हैं।
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