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दुर्लभ बीमारी से पीड़ित अनिका के मामले में कोर्ट सख्त, AIIMS से मांगी रिपोर्ट

Indore इंदौर : मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने एक गंभीर चिकित्सा मामले में सख्त रुख अपनाते हुए दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) से जवाब तलब किया है। मामला तीन साल की बच्ची अनिका शर्मा से जुड़ा है, जो स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) टाइप-2 जैसी दुर्लभ और गंभीर बीमारी से पीड़ित है। बच्ची के इलाज में कथित देरी को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले में किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
हाई कोर्ट के जस्टिस संदीप एन. भट्ट की पीठ ने सुनवाई के दौरान AIIMS दिल्ली को निर्देश दिया कि वह इस मामले में अपना जवाब एक सप्ताह के भीतर अदालत के सामने पेश करे। कोर्ट ने AIIMS को 23 जुलाई 2026 तक जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को निर्धारित की गई है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने बच्ची की गंभीर स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए चिंता व्यक्त की। कोर्ट ने कहा कि दुर्लभ बीमारी से जूझ रहे बच्चे के इलाज में समय बेहद महत्वपूर्ण होता है और ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की देरी मरीज के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है। अदालत ने कहा कि बच्ची के उपचार से जुड़े सभी पहलुओं पर जल्द निर्णय लिया जाना आवश्यक है।
स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी यानी SMA एक दुर्लभ आनुवांशिक बीमारी है, जिसमें शरीर की मांसपेशियों को नियंत्रित करने वाली नसें प्रभावित होती हैं। इस बीमारी के कारण मांसपेशियों में कमजोरी बढ़ती जाती है और मरीज को सामान्य गतिविधियों में भी कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है। SMA टाइप-2 से प्रभावित बच्चों को विशेष चिकित्सा देखभाल और समय पर उपचार की जरूरत होती है।
मामले में बच्ची के इलाज को लेकर कथित देरी का आरोप लगाया गया है। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत के सामने इलाज की प्रक्रिया और सामने आ रही परेशानियों को रखा गया। इसके बाद हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए AIIMS दिल्ली से स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।
अदालत ने निर्देश दिया है कि AIIMS प्रशासन पूरे मामले की जानकारी देते हुए जवाब दाखिल करे। इसमें इलाज की वर्तमान स्थिति, चिकित्सा प्रक्रिया में हुई देरी के कारण और बच्ची के उपचार को लेकर उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी गई है। कोर्ट यह जानना चाहता है कि बच्ची को समय पर आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए क्या कार्रवाई की गई।
हाई कोर्ट के इस रुख के बाद स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सा संस्थानों में भी इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अदालत ने संकेत दिया है कि गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों के इलाज में संवेदनशीलता और तत्परता जरूरी है। खासतौर पर बच्चों से जुड़े मामलों में चिकित्सा संस्थानों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।
अदालत ने कहा कि मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना स्वास्थ्य संस्थानों की प्राथमिक जिम्मेदारी है। किसी भी प्रकार की प्रशासनिक या प्रक्रियात्मक देरी के कारण इलाज प्रभावित नहीं होना चाहिए।
अब सभी की नजर 27 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर है, जब AIIMS दिल्ली की ओर से दाखिल जवाब के आधार पर अदालत आगे की कार्रवाई पर विचार करेगी। उम्मीद की जा रही है कि AIIMS अपने जवाब में बच्ची के इलाज की स्थिति और भविष्य की चिकित्सा योजना के बारे में विस्तृत जानकारी देगा।
इस मामले ने एक बार फिर दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित मरीजों के लिए समय पर इलाज और स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता के मुद्दे को सामने ला दिया है। हाई कोर्ट की सख्ती से यह संदेश गया है कि गंभीर चिकित्सा मामलों में लापरवाही को किसी भी स्तर पर नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।





