मध्य प्रदेश

सरकारी स्कूलों में अब स्मार्ट होगी पढ़ाई, शिक्षकों को मिलेगी ट्रेनिंग

Kavita2
31 Oct 2026 4:14 PM IST
सरकारी स्कूलों में अब स्मार्ट होगी पढ़ाई, शिक्षकों को मिलेगी ट्रेनिंग
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लखनऊ। सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल शुरू होने जा रही है। स्कूलों में स्मार्ट क्लास और आईसीटी लैब स्थापित करने के बाद अब शिक्षकों को डिजिटल तकनीक के माध्यम से पढ़ाने का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी विद्यालयों में उपलब्ध आधुनिक संसाधनों का बेहतर उपयोग हो और विद्यार्थियों को रोचक, सरल तथा प्रभावी तरीके से पढ़ाया जा सके। प्रदेश में दो नवंबर से ब्लॉक स्तर पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया जाएगा। इस प्रशिक्षण के माध्यम से शिक्षकों को डिजिटल शिक्षण सामग्री और आधुनिक तकनीकी उपकरणों का उपयोग करने के लिए तैयार किया जाएगा।

समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत आयोजित होने वाले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में चयनित सरकारी विद्यालयों के एक-एक नोडल शिक्षक और एकेडमिक रिसोर्स पर्सन यानी एआरपी शामिल होंगे। प्रशिक्षण को व्यवस्थित और प्रभावी बनाने के लिए प्रत्येक बैच में अधिकतम 50 प्रतिभागियों को शामिल करने की व्यवस्था की गई है। इससे प्रशिक्षकों को प्रत्येक प्रतिभागी पर पर्याप्त ध्यान देने और व्यावहारिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने में सुविधा होगी।

सरकारी स्कूलों में लंबे समय से ब्लैकबोर्ड और पाठ्यपुस्तकों के माध्यम से पढ़ाई कराई जाती रही है। हालांकि, बदलते समय के साथ शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल तकनीक का महत्व तेजी से बढ़ा है। इसी को ध्यान में रखते हुए विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, डिजिटल बोर्ड, कंप्यूटर और आईसीटी लैब जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। अब इन संसाधनों का प्रभावी इस्तेमाल सुनिश्चित करने के लिए शिक्षकों को प्रशिक्षित करने की योजना बनाई गई है।

इस पहल का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को केवल तकनीकी उपकरण चलाना सिखाना नहीं, बल्कि उन्हें डिजिटल माध्यम से पढ़ाने की नई विधियों से परिचित कराना भी है। प्रशिक्षण के माध्यम से शिक्षक यह समझ सकेंगे कि विभिन्न विषयों को वीडियो, चित्र, डिजिटल प्रस्तुतियों और अन्य शैक्षणिक संसाधनों की सहायता से विद्यार्थियों के सामने किस प्रकार रोचक बनाया जा सकता है।

स्मार्ट क्लास के माध्यम से बच्चों को कठिन विषयों को समझाने में मदद मिल सकती है। उदाहरण के लिए विज्ञान के विभिन्न सिद्धांतों को चित्रों और एनिमेशन के जरिए समझाया जा सकता है। इसी प्रकार गणित के सवालों, ज्यामिति की आकृतियों और सामाजिक विज्ञान से जुड़े विषयों को डिजिटल सामग्री की सहायता से अधिक स्पष्ट रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है। इससे विद्यार्थियों की विषयों में रुचि बढ़ने और सीखने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी होने की संभावना है।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में चयनित विद्यालयों के नोडल शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। नोडल शिक्षक अपने विद्यालय में डिजिटल शिक्षण व्यवस्था को बेहतर तरीके से संचालित करने में सहयोग कर सकेंगे। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद वे अन्य शिक्षकों को भी स्मार्ट क्लास और आईसीटी लैब के उपयोग के बारे में मार्गदर्शन दे सकते हैं। हालांकि, प्रशिक्षण के बाद विद्यालय स्तर पर उनकी विस्तृत जिम्मेदारियां संबंधित विभागीय निर्देशों के अनुसार तय होंगी।

इसके अलावा एकेडमिक रिसोर्स पर्सन यानी एआरपी को भी प्रशिक्षण में शामिल किया जाएगा। एआरपी का कार्य शिक्षकों को शैक्षणिक सहयोग प्रदान करना और शिक्षण प्रक्रिया को बेहतर बनाने में मदद करना होता है। डिजिटल शिक्षण के क्षेत्र में प्रशिक्षित होने के बाद वे विद्यालयों में तकनीक आधारित पढ़ाई को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

प्रत्येक बैच में अधिकतम 50 प्रतिभागियों की सीमा निर्धारित किए जाने से प्रशिक्षण की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है। छोटे समूहों में प्रशिक्षण आयोजित होने से प्रतिभागियों को डिजिटल उपकरणों के उपयोग का अभ्यास करने और अपनी समस्याओं का समाधान प्राप्त करने के बेहतर अवसर मिल सकते हैं।

दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों को स्मार्ट क्लास और आईसीटी लैब से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दिए जाने की संभावना है। इसमें डिजिटल उपकरणों के संचालन, शैक्षणिक सामग्री के चयन, कक्षा में तकनीक के उपयोग और विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ाने जैसे विषय महत्वपूर्ण हो सकते हैं। हालांकि, प्रशिक्षण के विस्तृत पाठ्यक्रम और गतिविधियों का अंतिम विवरण विभागीय कार्यक्रम के अनुसार ही स्पष्ट होगा।

सरकारी विद्यालयों में डिजिटल संसाधन उपलब्ध कराना शिक्षा व्यवस्था के आधुनिकीकरण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। लेकिन केवल उपकरण स्थापित कर देने से शिक्षा की गुणवत्ता में अपेक्षित सुधार नहीं हो सकता। इसके लिए आवश्यक है कि शिक्षक उन उपकरणों का नियमित और प्रभावी उपयोग कर सकें। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए यह प्रशिक्षण कार्यक्रम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कई विद्यालयों में डिजिटल उपकरण उपलब्ध होने के बावजूद उनके उपयोग में तकनीकी जानकारी की कमी एक चुनौती बन सकती है। ऐसे में शिक्षकों को व्यवस्थित प्रशिक्षण मिलने से वे उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल कर पाएंगे। इससे स्कूलों में डिजिटल शिक्षण व्यवस्था को नियमित कक्षा संचालन का हिस्सा बनाने में सहायता मिल सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, डिजिटल शिक्षा का सबसे बड़ा लाभ यह है कि विद्यार्थी केवल सुनकर नहीं, बल्कि देखकर और गतिविधियों के माध्यम से भी सीख सकते हैं। इससे कठिन अवधारणाओं को समझना आसान हो सकता है। हालांकि, डिजिटल संसाधन पारंपरिक शिक्षण का पूरी तरह विकल्प नहीं हैं। उनका उद्देश्य शिक्षक की भूमिका को अधिक प्रभावी बनाना और विद्यार्थियों को सीखने के अतिरिक्त अवसर उपलब्ध कराना है।

ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के सरकारी विद्यालयों के लिए भी यह पहल उपयोगी हो सकती है। यदि स्कूलों में उपलब्ध स्मार्ट क्लास और आईसीटी लैब का नियमित उपयोग किया जाए, तो वहां पढ़ने वाले बच्चों को भी तकनीक आधारित शिक्षा का लाभ मिल सकता है। इससे डिजिटल शिक्षा के अवसरों में मौजूद अंतर को कम करने में सहायता मिल सकती है।

शिक्षकों के लिए भी यह प्रशिक्षण उनके पेशेवर कौशल को विकसित करने का अवसर होगा। आधुनिक तकनीक के माध्यम से पढ़ाने की क्षमता विकसित होने से वे विद्यार्थियों की जरूरतों के अनुसार शिक्षण सामग्री तैयार कर सकेंगे। साथ ही, अलग-अलग विषयों के लिए उपलब्ध डिजिटल संसाधनों का चयन करना भी उनके लिए आसान हो सकता है।

समग्र शिक्षा के अंतर्गत शुरू होने वाले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम से सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में सकारात्मक परिणाम मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इसका वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि प्रशिक्षण के बाद विद्यालयों में डिजिटल संसाधनों का कितना नियमित उपयोग किया जाता है और शिक्षकों को आवश्यक तकनीकी सहयोग किस स्तर तक उपलब्ध कराया जाता है।

फिलहाल दो नवंबर से ब्लॉक स्तर पर शुरू होने वाले दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की तैयारियां महत्वपूर्ण हैं। चयनित विद्यालयों के नोडल शिक्षकों और एआरपी को प्रशिक्षण देकर स्मार्ट क्लास और आईसीटी लैब के प्रभावी संचालन की दिशा में कदम बढ़ाया जाएगा। इस पहल का लक्ष्य सरकारी स्कूलों की पढ़ाई को अधिक आधुनिक, रोचक और विद्यार्थियों के लिए उपयोगी बनाना है।

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