मध्य प्रदेश

MP का 1500 साल पुराना एरण बनेगा अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल, केंद्र सरकार की बड़ी योजना

Kavita2
23 Oct 2026 2:13 PM IST
MP का 1500 साल पुराना एरण बनेगा अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल, केंद्र सरकार की बड़ी योजना
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सागर। मध्य प्रदेश के सागर जिले में स्थित प्राचीन ऐतिहासिक और पुरातात्विक स्थल एरण को अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी शुरू हो गई है। केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय भारत की ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने और पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एरण के व्यापक विकास की योजना पर काम कर रहा है। केंद्र सरकार की 'डेवलपमेंट ऑफ एक्सकैवेशन साइट्स एंड हेरिटेज कॉम्प्लेक्स' (DESH) योजना के तहत देश के 15 महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थलों में एरण को भी शामिल किया गया है। इस योजना का उद्देश्य प्राचीन स्मारकों और उत्खनन स्थलों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़कर जीवंत सांस्कृतिक केंद्रों के रूप में विकसित करना है। एरण अपने गुप्तकालीन इतिहास, प्राचीन मूर्तियों, शिलालेखों और पुरातात्विक अवशेषों के कारण विशेष पहचान रखता है।

सागर से 75 किलोमीटर दूर स्थित है ऐतिहासिक एरण

एरण मध्य प्रदेश के सागर जिले में बीना तहसील के अंतर्गत आने वाला प्राचीन कस्बा है। यह जिला मुख्यालय से लगभग 75 से 80 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

एरण की भौगोलिक स्थिति इसे दूसरे ऐतिहासिक स्थलों से अलग बनाती है। बीना नदी इसे तीन ओर से घेरे हुए है, जिससे इसका स्वरूप एक प्रायद्वीप जैसा दिखाई देता है।

बीना नदी बेतवा नदी की सहायक नदी है। प्राचीन काल में नदी के आसपास की भौगोलिक स्थिति इस क्षेत्र को प्राकृतिक सुरक्षा प्रदान करती थी।

एरण बुंदेलखंड और मालवा के बीच स्थित होने के कारण ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा है। यहां विभिन्न राजवंशों के शासन और सांस्कृतिक गतिविधियों के प्रमाण मिले हैं।

गुप्त साम्राज्य से जुड़ा है एरण का इतिहास

एरण का इतिहास विशेष रूप से गुप्तकाल से जुड़ा हुआ है। चौथी और पांचवीं शताब्दी के दौरान यह क्षेत्र राजनीतिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र था।

गुप्त साम्राज्य के समय यहां मंदिरों, मूर्तियों और स्मारकों का निर्माण हुआ था।

एरण से सम्राट समुद्रगुप्त के शासनकाल का महत्वपूर्ण शिलालेख भी प्राप्त हुआ है।

यह अभिलेख गुप्तकालीन राजनीतिक व्यवस्था और सम्राट की उपलब्धियों से संबंधित जानकारी प्रदान करता है।

ऐतिहासिक अध्ययन के अनुसार, समुद्रगुप्त के जीवन के उत्तरार्ध से इस अभिलेख का संबंध माना जाता है। हालांकि, सम्राट ने अपने अंतिम वर्ष एरण में ही बिताए थे, यह बात निश्चित ऐतिहासिक तथ्य के रूप में स्थापित नहीं है।

विशाल वराह प्रतिमा है सबसे बड़ा आकर्षण

एरण में स्थित भगवान विष्णु के वराह अवतार की विशाल प्रतिमा इस पुरातात्विक स्थल की प्रमुख पहचान है।

लगभग दस फीट ऊंची यह प्रतिमा भारतीय मूर्तिकला का महत्वपूर्ण उदाहरण मानी जाती है।

वराह प्रतिमा के अलावा यहां भगवान विष्णु से संबंधित प्राचीन मंदिरों के अवशेष, स्तंभ और शिलालेख भी मौजूद हैं।

इन अवशेषों से तत्कालीन धार्मिक परंपराओं और स्थापत्य कला के बारे में जानकारी मिलती है।

सागर जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट भी एरण को महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल के रूप में दर्ज करती है।

प्राचीन सभ्यताओं के भी मिले हैं प्रमाण

एरण का महत्व केवल गुप्तकाल तक सीमित नहीं है। यहां हुए पुरातात्विक उत्खनन से ताम्रपाषाण कालीन संस्कृति के अवशेष भी प्राप्त हुए हैं।

सागर विश्वविद्यालय के पुरातत्व विभाग द्वारा किए गए उत्खनन में ऐसे प्रमाण मिले हैं, जिनका संबंध मध्य प्रदेश की प्राचीन ताम्रपाषाण संस्कृति से है।

यहां से मिले अवशेषों की तुलना महेश्वर और त्रिपुरी जैसे ऐतिहासिक स्थलों की सामग्री से भी की गई है।

इन खोजों से पता चलता है कि एरण में गुप्तकाल से बहुत पहले भी मानव बस्तियां और सांस्कृतिक गतिविधियां मौजूद थीं।

इस प्रकार एरण भारतीय इतिहास के विभिन्न कालखंडों को समझने के लिए महत्वपूर्ण स्थल है।

DESH योजना के तहत होगा विकास

केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित DESH योजना का उद्देश्य देश के महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थलों का संरक्षण और पर्यटन विकास करना है।

केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के अनुसार, इस योजना में देशभर के 15 चुनिंदा ऐतिहासिक स्थलों को शामिल किया गया है।

इन स्थलों को केवल प्राचीन स्मारकों के रूप में सुरक्षित रखने के बजाय पर्यटकों के लिए बेहतर अनुभव प्रदान करने वाले सांस्कृतिक केंद्रों में विकसित करने की योजना है।

इसके अंतर्गत ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण, पर्यटक सुविधाओं और स्थानीय सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर जोर रहेगा।

संग्रहालय और आधुनिक सुविधाएं विकसित करने की तैयारी

योजना के तहत एरण जैसे स्थलों पर आधुनिक संग्रहालय, व्याख्या केंद्र और पर्यटकों के लिए पैदल भ्रमण मार्ग विकसित किए जा सकते हैं।

इन सुविधाओं का उद्देश्य आगंतुकों को प्राचीन इतिहास और पुरातात्विक खोजों के बारे में अधिक जानकारी उपलब्ध कराना है।

इसके अलावा डिजिटल तकनीक और दृश्य प्रस्तुतियों के माध्यम से ऐतिहासिक घटनाओं को रोचक तरीके से समझाने की योजना भी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक संग्रहालय और मार्गदर्शक सुविधाएं विकसित होने से विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और पर्यटकों के लिए एरण अधिक आकर्षक बन सकता है।

हालांकि, एरण में निर्माण कार्य शुरू होने की तारीख और सभी प्रस्तावित सुविधाओं की अंतिम सूची अभी स्पष्ट नहीं है।

स्थानीय लोगों को मिल सकते हैं रोजगार के अवसर

एरण के पर्यटन विकास से आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिलने की संभावना है।

पर्यटकों की संख्या बढ़ने पर होटल, भोजनालय, परिवहन और स्थानीय हस्तशिल्प से जुड़े व्यवसायों के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

DESH योजना के तहत प्रत्येक चयनित स्थल पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 100 से 200 रोजगार अवसर विकसित करने का लक्ष्य बताया गया है।

इनमें पर्यटन मार्गदर्शक, संरक्षण विशेषज्ञ, शिल्पकार और अन्य सेवाओं से जुड़े रोजगार शामिल हो सकते हैं।

योजना का उद्देश्य स्थानीय लोगों को विरासत संरक्षण और पर्यटन गतिविधियों से जोड़ना भी है।

देश के 15 ऐतिहासिक स्थल योजना में शामिल

एरण के अलावा गुजरात के लोथल और धोलावीरा, हरियाणा के राखीगढ़ी और अग्रोहा, उत्तर प्रदेश के सारनाथ, हस्तिनापुर तथा झांसी किले को भी इस योजना में शामिल किया गया है।

इसके अतिरिक्त तमिलनाडु के आदिचनल्लूर, ओडिशा के उदयगिरि, कर्नाटक के सन्नति, राजस्थान के चित्तौड़गढ़ किले, लद्दाख के लेह पैलेस, दिल्ली के पुराने किले और असम के शिवसागर को चयनित किया गया है।

इन सभी स्थलों का अपना अलग ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व है।

केंद्र सरकार का उद्देश्य इनके संरक्षण के साथ पर्यटन की संभावनाओं को मजबूत करना है।

पुरातात्विक धरोहरों का संरक्षण रहेगा प्राथमिकता

इतिहासकारों और पुरातत्व विशेषज्ञों के अनुसार, एरण जैसे प्राचीन स्थलों के विकास में मूल स्मारकों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण होनी चाहिए।

प्राचीन मूर्तियों, शिलालेखों और मंदिरों के अवशेषों को किसी भी प्रकार की क्षति से बचाने के लिए वैज्ञानिक संरक्षण आवश्यक है।

इसके अलावा पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही को ध्यान में रखते हुए स्मारकों के आसपास उपयुक्त सुरक्षा और प्रबंधन व्यवस्था विकसित करना जरूरी होगा।

एरण के पुरातात्विक महत्व को देखते हुए विकास योजनाओं में संरक्षण और आधुनिक सुविधाओं के बीच संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा।

अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर पहचान बनाने की उम्मीद

एरण को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की योजना मध्य प्रदेश के विरासत पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण अवसर साबित हो सकती है।

अभी यह स्थल अपनी ऐतिहासिक विशेषताओं के बावजूद अपेक्षाकृत कम प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में शामिल है।

आधुनिक सुविधाओं, बेहतर पहुंच मार्गों और प्रभावी प्रचार के माध्यम से यहां देश-विदेश से अधिक पर्यटकों को आकर्षित करने की संभावना है।

इससे सागर जिले के पर्यटन क्षेत्र के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी प्रोत्साहन मिल सकता है।

फिलहाल केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय की DESH योजना के तहत एरण के विकास की रूपरेखा तैयार की जा रही है। आने वाले समय में परियोजना की स्वीकृत लागत, कार्यों की समयसीमा और निर्माण संबंधी विस्तृत जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

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