मध्य प्रदेश

RGPV को तीन जोनल विश्वविद्यालयों में बांटने के प्रस्ताव का विरोध, काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन

Kavita2
7 Oct 2026 10:25 AM IST
RGPV को तीन जोनल विश्वविद्यालयों में बांटने के प्रस्ताव का विरोध, काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन
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भोपाल। राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय यानी RGPV को तीन जोनल विश्वविद्यालयों में बांटने के प्रस्ताव के खिलाफ मंगलवार को विश्वविद्यालय के शिक्षकों, अधिकारियों और कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने काली पट्टी बांधकर सरकार के प्रस्ताव का विरोध जताया और विश्वविद्यालय के मौजूदा ढांचे, अधिकार क्षेत्र और जमा फंड को सुरक्षित रखने की मांग की। उनका कहना है कि प्रदेश की एकमात्र तकनीकी यूनिवर्सिटी को विभाजित करने के बजाय उसे और मजबूत किया जाना चाहिए।

प्रदर्शन के दौरान विश्वविद्यालय परिसर में कर्मचारियों और शिक्षकों ने नारेबाजी की और अपनी आपत्तियां सामने रखीं। उनका कहना था कि RGPV ने करीब 28 वर्षों में प्रदेश की तकनीकी शिक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इंजीनियरिंग, फार्मेसी, आर्किटेक्चर और अन्य तकनीकी पाठ्यक्रमों से जुड़े बड़ी संख्या में कॉलेज इस विश्वविद्यालय से संबद्ध हैं। ऐसे में इसे अलग-अलग जोनल विश्वविद्यालयों में बांटना एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव होगा, जिसका असर छात्रों, शिक्षकों और संस्थानों पर पड़ेगा।

विरोध करने वाले कर्मचारियों ने कहा कि विश्वविद्यालय के पास वर्षों में विकसित हुई शैक्षणिक, प्रशासनिक और वित्तीय व्यवस्था है। इस ढांचे को अचानक बांटने से कई व्यावहारिक दिक्कतें पैदा हो सकती हैं। खासतौर पर कर्मचारियों के पद, वरिष्ठता, सेवा शर्तें, विभागीय जिम्मेदारियां और संसाधनों के बंटवारे जैसे सवाल अभी स्पष्ट नहीं हैं।

प्रदर्शनकारियों की सबसे बड़ी मांग विश्वविद्यालय के जमा फंड को सुरक्षित रखने की रही। उनका कहना है कि RGPV ने वर्षों में विभिन्न मदों से जो वित्तीय संसाधन तैयार किए हैं, उनका उपयोग विश्वविद्यालय की शैक्षणिक और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने में होना चाहिए। यदि विश्वविद्यालय को विभाजित किया जाता है तो इन फंड का बंटवारा किस तरह होगा, इस पर स्पष्टता जरूरी है।

शिक्षकों और कर्मचारियों ने यह भी कहा कि प्रदेश में तकनीकी शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए एक मजबूत केंद्रीय तकनीकी विश्वविद्यालय की जरूरत है। उनका तर्क है कि अलग-अलग जोनल विश्वविद्यालय बनने से प्रशासनिक नियंत्रण बंट सकता है और एकरूप शैक्षणिक मानकों को बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

RGPV लंबे समय से मध्य प्रदेश की तकनीकी शिक्षा व्यवस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। राज्य के विभिन्न जिलों में स्थित अनेक तकनीकी संस्थान इसी विश्वविद्यालय से संबद्ध हैं। परीक्षाओं, पाठ्यक्रम, परिणाम, संबद्धता और शैक्षणिक मानकों से जुड़े कई अहम निर्णय विश्वविद्यालय स्तर पर लिए जाते हैं। इसीलिए विश्वविद्यालय के विभाजन का प्रस्ताव सामने आने के बाद कर्मचारियों और शिक्षकों के बीच चिंता बढ़ी है।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि विश्वविद्यालय की मौजूदा व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता हो सकती है, लेकिन समाधान विभाजन नहीं होना चाहिए। उन्होंने सरकार से मांग की कि पहले विश्वविद्यालय की कमजोरियों का विस्तृत अध्ययन किया जाए और इसके बाद विशेषज्ञों, शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्रों से बातचीत कर कोई निर्णय लिया जाए।

कर्मचारियों ने यह भी कहा कि 28 वर्षों में विश्वविद्यालय ने अपनी एक अलग पहचान बनाई है। ऐसे में उसके नाम, प्रतिष्ठा और संस्थागत ढांचे को कमजोर नहीं किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि यदि किसी क्षेत्र में प्रशासनिक बोझ अधिक है तो नई शाखाएं या क्षेत्रीय केंद्र बनाए जा सकते हैं, लेकिन मूल विश्वविद्यालय को बांटना जरूरी नहीं है।

विरोध प्रदर्शन में शामिल लोगों ने सरकार से प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने की मांग की। उनका कहना था कि तकनीकी शिक्षा में गुणवत्ता बढ़ाने के लिए विश्वविद्यालय को अधिक संसाधन, बेहतर फैकल्टी, आधुनिक लैब, शोध सुविधाएं और डिजिटल ढांचा दिया जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश के छात्रों के लिए RGPV एक परिचित और स्थापित संस्था है। इसके अंतर्गत पढ़ने वाले छात्रों को डिग्री, परीक्षा और अकादमिक प्रक्रियाओं में एकरूपता मिलती है। यदि अलग-अलग जोनल विश्वविद्यालय बनाए जाते हैं तो संक्रमण काल में छात्रों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

प्रदर्शनकारियों ने आशंका जताई कि विश्वविद्यालय के विभाजन से संबद्ध कॉलेजों की पुनर्व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली, रिकॉर्ड प्रबंधन और डिग्री जारी करने जैसी प्रक्रियाएं भी प्रभावित हो सकती हैं। इसलिए किसी भी बड़े बदलाव से पहले विस्तृत रोडमैप तैयार करना आवश्यक है।

शिक्षकों ने कहा कि तकनीकी शिक्षा तेजी से बदल रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस, साइबर सुरक्षा, रोबोटिक्स और नई इंजीनियरिंग तकनीकों के दौर में विश्वविद्यालयों को शोध और नवाचार पर अधिक निवेश करने की जरूरत है। ऐसे समय में RGPV को विभाजित करने के बजाय इसे राष्ट्रीय स्तर की मजबूत तकनीकी संस्था के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।

कर्मचारियों ने सरकार से संवाद की मांग भी की। उनका कहना है कि प्रस्ताव से प्रभावित होने वाले सभी पक्षों को सुना जाना चाहिए। यदि सरकार के पास विश्वविद्यालय को तीन जोन में बांटने के पीछे कोई प्रशासनिक या शैक्षणिक तर्क है तो उसे सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाए।

विरोध के दौरान कर्मचारियों ने संकेत दिया कि यदि प्रस्ताव वापस नहीं लिया गया या उनकी चिंताओं का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन आगे भी जारी रह सकता है। हालांकि उन्होंने फिलहाल शांतिपूर्ण तरीके से काली पट्टी बांधकर अपना विरोध दर्ज कराया।

RGPV के विभाजन का मुद्दा अब तकनीकी शिक्षा से जुड़े व्यापक विमर्श का हिस्सा बनता जा रहा है। एक ओर सरकार प्रशासनिक विकेंद्रीकरण और बेहतर प्रबंधन की दिशा में बदलाव पर विचार कर सकती है, वहीं विश्वविद्यालय समुदाय का कहना है कि इससे संस्था की एकीकृत पहचान और संसाधन प्रभावित हो सकते हैं।

फिलहाल शिक्षकों, अधिकारियों और कर्मचारियों ने साफ कर दिया है कि वे विश्वविद्यालय के मौजूदा ढांचे और जमा फंड को सुरक्षित रखने की मांग पर कायम हैं। उनका कहना है कि 28 साल पुरानी इस तकनीकी यूनिवर्सिटी को बांटने के बजाय आधुनिक संसाधनों और बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था से मजबूत किया जाना चाहिए।

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