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इंदौर में चार महीने में पांचवीं बार धंसी सड़क, परदेशीपुरा में बना गहरा गड्ढा

इंदौर। शहर में सड़क धंसने की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। मंगलवार को परदेशीपुरा क्षेत्र की लेन नंबर 3 में सड़क का एक हिस्सा अचानक धंस गया, जिससे वहां गहरा गड्ढा बन गया और सड़क का कंक्रीट स्लैब हवा में लटक गया। घटना एक ड्रेनेज चैंबर के पास हुई। पिछले चार महीनों में शहर में सड़क धंसने की यह पांचवीं घटना बताई जा रही है, जिसके बाद नगर निगम की कार्यप्रणाली और भूमिगत ड्रेनेज सिस्टम की स्थिति को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
घटना की सूचना मिलने के बाद इंदौर नगर निगम के लोक निर्माण विभाग ने एक इंजीनियर को मौके पर भेजा। इंजीनियर ने सड़क के धंसे हिस्से और आसपास के ड्रेनेज नेटवर्क का निरीक्षण किया। नगर निगम के अधिकारियों को शुरुआती तौर पर शक है कि सड़क धंसने के पीछे पुराना ड्रेनेज चैंबर या भूमिगत ड्रेनेज लाइन की खराब स्थिति वजह हो सकती है।
अधिकारियों का कहना है कि इस क्षेत्र में भूमिगत ड्रेनेज नेटवर्क काफी पुराना है। हालांकि जिस चैंबर के पास सड़क धंसी है, उसका ढक्कन अपेक्षाकृत नया दिखाई दे रहा है। यही वजह है कि निगम अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि समस्या पुराने ड्रेनेज ढांचे में है या हाल के किसी मरम्मत कार्य में कमी रह गई थी।
नगर निगम की टीम इस बात की भी जांच कर रही है कि ड्रेनेज लाइन से पानी का रिसाव तो नहीं हो रहा था। यदि भूमिगत पाइपलाइन से लंबे समय तक लीकेज होता रहा हो, तो आसपास की मिट्टी धीरे-धीरे बह सकती है। इससे सड़क के नीचे खाली जगह बन जाती है और ऊपर से मजबूत दिखाई देने वाली सड़क अचानक धंस सकती है।
इसके अलावा खराब बैकफिलिंग की संभावना भी जांच के दायरे में है। पहले किसी मरम्मत या ड्रेनेज कार्य के बाद यदि गड्ढे को पर्याप्त मजबूती से नहीं भरा गया हो, तो समय के साथ मिट्टी बैठ सकती है और सड़क के नीचे खोखला हिस्सा बन सकता है।
मंगलवार को हुई घटना में सड़क का एक बड़ा हिस्सा धंसने के बाद कंक्रीट का स्लैब किनारों के सहारे लटका दिखाई दिया। इससे राहगीरों और वाहन चालकों के लिए खतरा पैदा हो गया। स्थानीय लोगों ने क्षेत्र में जल्द बैरिकेडिंग और मरम्मत की मांग की।
नगर निगम के अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण करने के बाद प्रभावित हिस्से की तकनीकी जांच शुरू कर दी है। ड्रेनेज चैंबर को खोलकर अंदर की स्थिति देखने और भूमिगत लाइन की हालत का आकलन करने की तैयारी की जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि पूरी स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही यह तय होगा कि केवल सड़क की मरम्मत पर्याप्त होगी या ड्रेनेज लाइन को भी बदलना पड़ेगा। यदि पाइपलाइन में लीकेज मिलता है तो पहले उसे ठीक करना जरूरी होगा, अन्यथा सड़क की मरम्मत के बाद भी समस्या दोबारा हो सकती है।
शहर में लगातार सड़क धंसने की घटनाओं ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले चार महीनों में पांचवीं ऐसी घटना सामने आने के कारण लोग भूमिगत सीवर और ड्रेनेज नेटवर्क की मजबूती पर सवाल उठा रहे हैं।
इंदौर जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में सड़क और ड्रेनेज नेटवर्क पर दबाव भी लगातार बढ़ रहा है। पुराने क्षेत्रों में दशकों पहले बिछाई गई पाइपलाइन और चैंबर अब कमजोर हो सकते हैं। ऐसे में समय-समय पर उनकी तकनीकी जांच जरूरी मानी जाती है।
परदेशीपुरा में हुई घटना के बाद नगर निगम के सामने सबसे बड़ी चुनौती सड़क के नीचे बनी खाली जगह की वास्तविक सीमा का पता लगाना है। कई बार ऊपर से छोटा गड्ढा दिखाई देता है, लेकिन अंदर मिट्टी काफी बड़े हिस्से में बह चुकी होती है।
इसलिए निगम की टीम आसपास के क्षेत्र की भी जांच कर सकती है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सड़क का अन्य हिस्सा भी कमजोर तो नहीं है। जरूरत पड़ने पर खुदाई कर नीचे की मिट्टी और ड्रेनेज लाइन की स्थिति देखी जाएगी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क धंसने जैसी घटनाएं दुर्घटना का कारण बन सकती हैं, खासकर रात के समय या तेज रफ्तार में आने वाले वाहन चालकों के लिए। यदि समय रहते सुरक्षा व्यवस्था नहीं की जाए तो गंभीर हादसा हो सकता है।
नगर निगम की ओर से प्रभावित हिस्से को अस्थायी रूप से सुरक्षित करने और वाहनों की आवाजाही नियंत्रित करने की कार्रवाई की जा सकती है। इसके बाद तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर स्थायी मरम्मत की जाएगी।
अधिकारियों को यह भी देखना होगा कि पहले हुई मरम्मत का रिकॉर्ड क्या था। यदि यहां हाल के वर्षों में ड्रेनेज लाइन या सड़क की खुदाई हुई थी, तो संबंधित कार्य की गुणवत्ता की भी जांच की जा सकती है।
बैकफिलिंग के दौरान मिट्टी या निर्माण सामग्री को परत-दर-परत दबाना जरूरी होता है। यदि ऐसा न किया जाए तो समय के साथ नीचे की सामग्री बैठने लगती है और सड़क की सतह कमजोर हो जाती है।
इसी तरह पाइपलाइन से लगातार रिसाव होने पर मिट्टी का कटाव भी सड़क धंसने की बड़ी वजह बन सकता है। इसलिए नगर निगम दोनों संभावनाओं को गंभीरता से जांच रहा है।
शहर में बार-बार ऐसी घटनाएं सामने आने के बाद अब व्यापक स्तर पर पुराने ड्रेनेज नेटवर्क की स्थिति की समीक्षा की जरूरत भी महसूस की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल घटना के बाद मरम्मत करने के बजाय कमजोर हिस्सों की पहले से पहचान करना ज्यादा प्रभावी हो सकता है।
नगर निगम के लोक निर्माण और ड्रेनेज विभाग के बीच समन्वय भी ऐसे मामलों में जरूरी होता है। सड़क की मरम्मत तभी टिकाऊ होगी जब नीचे की पाइपलाइन और मिट्टी की स्थिति पूरी तरह ठीक हो।
फिलहाल परदेशीपुरा की लेन नंबर 3 में सड़क धंसने के कारण बने गड्ढे की जांच जारी है। नगर निगम यह पता लगाने में जुटा है कि हादसे की असली वजह पुराना ड्रेनेज सिस्टम, पाइपलाइन लीकेज या खराब बैकफिलिंग में से क्या रही।
जांच पूरी होने के बाद ही जिम्मेदारी और मरम्मत की दिशा स्पष्ट होगी। लेकिन चार महीनों में पांचवीं बार सड़क धंसने की घटना ने शहर के भूमिगत ढांचे और उसकी नियमित निगरानी को लेकर गंभीर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।





