मध्य प्रदेश

शिवपुरी में गरबा प्रवेश नियमों को लेकर VHP-बजरंग दल की मांग

Kavita2
7 Oct 2026 3:57 PM IST
शिवपुरी में गरबा प्रवेश नियमों को लेकर VHP-बजरंग दल की मांग
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शिवपुरी। आगामी नवरात्रि उत्सव से पहले गरबा आयोजनों में प्रवेश और कार्यक्रमों की व्यवस्था को लेकर विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल ने जिला प्रशासन के सामने कई मांगें रखी हैं। दोनों संगठनों ने संयुक्त आवेदन सौंपते हुए गरबा पंडालों में प्रवेश के लिए आधार कार्ड या अन्य वैध पहचान पत्र अनिवार्य करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने आयोजन स्थलों पर केवल धार्मिक और गरबा से जुड़े गीत बजाने तथा अश्लील गानों पर पूरी तरह रोक लगाने की बात कही है।

संगठनों का कहना है कि गरबा नवरात्रि से जुड़ा धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन है, इसलिए इसकी धार्मिक पहचान और मर्यादा बनाए रखी जानी चाहिए। इसी आधार पर उन्होंने प्रशासन से प्रवेश व्यवस्था को नियंत्रित और सत्यापन आधारित बनाने की मांग की है।

विहिप और बजरंग दल के स्थानीय पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से कहा कि गरबा पंडालों में प्रवेश से पहले पहचान पत्र की जांच की जानी चाहिए। उनका तर्क है कि इससे आयोजन स्थल पर आने वाले लोगों की पहचान दर्ज रहेगी और सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत किया जा सकेगा।

हालांकि संगठनों की ओर से “केवल सनातनी भक्तों” को प्रवेश देने की मांग ने चर्चा भी शुरू कर दी है। इस तरह की मांगों पर अंतिम निर्णय जिला प्रशासन और आयोजन समितियों को कानून तथा लागू नियमों के अनुरूप करना होगा। प्रशासन की ओर से इस मांग को लेकर विस्तृत निर्णय सामने आना बाकी है।

संयुक्त आवेदन में यह भी कहा गया है कि गरबा कार्यक्रमों में शराब या किसी अन्य नशे के प्रभाव में पहुंचने वाले लोगों को प्रवेश नहीं दिया जाना चाहिए। संगठनों का कहना है कि नवरात्रि के धार्मिक माहौल में नशे की स्थिति में आने वाले लोगों से अव्यवस्था की आशंका बढ़ सकती है।

इसके अलावा गरबा आयोजनों में बजने वाले संगीत को लेकर भी विशेष मांग रखी गई है। विहिप और बजरंग दल ने कहा है कि पंडालों में धार्मिक भजन, माता के गीत और पारंपरिक गरबा संगीत को ही प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

उन्होंने अश्लील या आपत्तिजनक माने जाने वाले गीतों पर रोक लगाने की मांग की है। संगठनों का कहना है कि ऐसे गीत नवरात्रि और गरबा की धार्मिक भावना के अनुरूप नहीं होते।

नवरात्रि के दौरान शिवपुरी सहित विभिन्न क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर गरबा कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। कई आयोजनों में युवाओं की बड़ी भागीदारी रहती है और देर रात तक सांस्कृतिक कार्यक्रम चलते हैं। इसी कारण सुरक्षा, प्रवेश व्यवस्था और संगीत चयन से जुड़े मुद्दे हर वर्ष चर्चा में रहते हैं।

विहिप और बजरंग दल ने प्रशासन से कहा है कि आयोजकों को पहले से स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि कार्यक्रम शुरू होने के बाद किसी प्रकार का विवाद या अव्यवस्था न हो।

संगठनों ने यह भी सुझाव दिया है कि प्रवेश द्वारों पर पर्याप्त स्वयंसेवक और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की जाए। यदि पहचान पत्र की जांच की व्यवस्था लागू होती है तो इसके लिए अलग से व्यवस्था करनी होगी।

स्थानीय स्तर पर गरबा आयोजनों में भीड़ नियंत्रण भी बड़ी चुनौती रहती है। कई जगह बड़ी संख्या में लोग एक साथ कार्यक्रम में पहुंचते हैं। ऐसे में आयोजकों को प्रवेश और निकास मार्ग अलग रखने, सुरक्षा जांच तथा आपात स्थिति से निपटने की तैयारी रखने की जरूरत होती है।

संयुक्त आवेदन में सुरक्षा के साथ धार्मिक वातावरण बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया है। संगठनों का कहना है कि नवरात्रि देवी आराधना का पर्व है और गरबा उसी परंपरा का हिस्सा है।

उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि गरबा आयोजन समितियों को कार्यक्रम की अनुमति देते समय स्पष्ट शर्तें तय की जाएं।

इसके अलावा नशे में आने वाले लोगों की पहचान और उन्हें रोकने की व्यवस्था को लेकर भी निर्देश देने की मांग की गई है। आयोजकों को ऐसे मामलों में स्थानीय पुलिस की सहायता लेने की सलाह दी जा सकती है।

गरबा आयोजनों में पहचान पत्र अनिवार्य करने का प्रस्ताव नया नहीं है। अलग-अलग शहरों में समय-समय पर विभिन्न संगठन ऐसी मांग उठाते रहे हैं। हालांकि इसकी वैधानिकता और लागू करने की प्रक्रिया स्थानीय प्रशासन की अनुमति और लागू कानूनों पर निर्भर करती है।

प्रशासन को इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि किसी सार्वजनिक या अनुमति प्राप्त आयोजन में प्रवेश के नियम कानून और समानता के सिद्धांतों के अनुरूप हों। किसी भी नियम को लागू करने से पहले स्पष्ट प्रशासनिक दिशा-निर्देश जरूरी होंगे।

संगठनों ने कहा है कि उनका उद्देश्य गरबा आयोजनों को अनुशासित और धार्मिक स्वरूप में बनाए रखना है। इसी कारण उन्होंने पहचान पत्र, नशामुक्त प्रवेश और धार्मिक गीतों से संबंधित मांगें रखी हैं।

आवेदन सौंपे जाने के बाद अब जिला प्रशासन के निर्णय पर नजर रहेगी। प्रशासन आयोजन समितियों, पुलिस और संबंधित विभागों के साथ बैठक कर सुरक्षा और अनुमति से जुड़े दिशा-निर्देश तय कर सकता है।

नवरात्रि के दौरान महिलाओं और युवतियों की बड़ी भागीदारी को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को विशेष रूप से मजबूत रखने की जरूरत होती है। पुलिस की गश्त, सीसीटीवी कैमरे और पर्याप्त रोशनी जैसी व्यवस्थाएं भी महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।

इसके अलावा आग सुरक्षा, पार्किंग और आपात चिकित्सा व्यवस्था भी बड़े आयोजनों में जरूरी होती है। प्रशासन आमतौर पर आयोजन की अनुमति देते समय इन पहलुओं की भी जांच करता है।

विहिप और बजरंग दल की मांग के बाद गरबा आयोजकों के सामने भी यह सवाल रहेगा कि वे प्रवेश व्यवस्था को किस तरह संचालित करेंगे। यदि पहचान पत्र की जांच लागू होती है तो भीड़ बढ़ने की स्थिति में प्रवेश प्रक्रिया धीमी हो सकती है।

ऐसे में डिजिटल रजिस्ट्रेशन या पूर्व पास जैसी व्यवस्थाओं पर भी विचार किया जा सकता है, लेकिन इस संबंध में फिलहाल कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है।

संगठनों ने साफ कहा है कि उनका जोर धार्मिक परंपराओं के अनुरूप गरबा आयोजन कराने पर है। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया है कि आयोजकों को अश्लील गीतों से बचने और केवल गरबा तथा धार्मिक संगीत को बढ़ावा देने का निर्देश दिया जाए।

फिलहाल जिला प्रशासन को संयुक्त आवेदन सौंप दिया गया है। अब यह देखना होगा कि प्रशासन इन मांगों पर क्या निर्णय लेता है और नवरात्रि से पहले गरबा आयोजनों के लिए कौन से नियम निर्धारित किए जाते हैं।

शिवपुरी में सामने आई यह मांग अब धार्मिक आयोजन, सुरक्षा और प्रवेश व्यवस्था को लेकर चर्चा का विषय बन गई है। अंतिम व्यवस्था प्रशासनिक निर्णय और लागू कानूनी प्रावधानों के आधार पर तय होगी।

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