महाराष्ट्र

मुंबई में ₹77.80 करोड़ फ्रॉड केस, RRD हाइट्स पर FIR

Kavita2
17 July 2026 1:32 PM IST
मुंबई में ₹77.80 करोड़ फ्रॉड केस, RRD हाइट्स पर FIR
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मुंबई: मुंबई पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) ने कथित धोखाधड़ी और आर्थिक नुकसान के मामले में RRD हाइट्स एंड बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड और उसके तीन निदेशकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। आरोप है कि कंपनी और उसके निदेशकों की कार्रवाई से शिकायतकर्ता को करीब 77.80 करोड़ रुपये का गलत नुकसान हुआ।

मामला निर्मल लाइफस्टाइल प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया है। शिकायत कंपनी के सीनियर जनरल मैनेजर (लैंड एंड लीगल) और अधिकृत प्रतिनिधि मिलिंद धनावाड़े की ओर से दर्ज कराई गई है। EOW ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

FIR में RRD हाइट्स एंड बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड के अलावा कंपनी के तीन निदेशकों मेहुल गोसार, पीयूष गोसार और दीपक गोसार को आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने आरोपों के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है और संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल की जा रही है।

शिकायत के अनुसार, यह पूरा विवाद मुंबई के मुलुंड (पश्चिम) इलाके के नाहुर गांव स्थित गवनपाड़ा के स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी (SRA) प्रोजेक्ट से जुड़ा है। यह परियोजना झुग्गी पुनर्विकास योजना के तहत विकसित की जा रही थी।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि दोनों पक्षों के बीच वर्ष 2010, 2016 और 2018 में कई मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) हुए थे। इन समझौतों में परियोजना से जुड़े अधिकारों, जिम्मेदारियों और काम की शर्तों को तय किया गया था। आरोप है कि RRD हाइट्स और उसके निदेशकों ने इन समझौतों में तय नियमों और शर्तों का पालन नहीं किया।

शिकायत में दावा किया गया है कि समझौते के उल्लंघन के कारण निर्मल लाइफस्टाइल प्रॉपर्टीज को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। कंपनी का आरोप है कि आरोपी पक्ष की गतिविधियों के चलते उसे 77.80 करोड़ रुपये का गलत नुकसान हुआ।

EOW आर्थिक अपराधों से जुड़े मामलों की जांच करने वाली मुंबई पुलिस की विशेष शाखा है। यह शाखा बड़े वित्तीय विवादों, धोखाधड़ी और कॉर्पोरेट मामलों की जांच करती है। इस मामले में भी पुलिस दस्तावेजों, समझौतों और वित्तीय लेन-देन की जांच करेगी।

जांच एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि दोनों कंपनियों के बीच हुए समझौतों की शर्तें क्या थीं और उनका पालन किस स्तर तक किया गया। इसके अलावा यह भी देखा जाएगा कि कथित नुकसान के पीछे किसी तरह की आपराधिक मंशा थी या नहीं।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, FIR दर्ज होना जांच की शुरुआती प्रक्रिया है। मामले में आरोपों की पुष्टि जांच के दौरान उपलब्ध तथ्यों और सबूतों के आधार पर की जाएगी। फिलहाल सभी संबंधित पक्षों से जानकारी जुटाई जा रही है।

रियल एस्टेट क्षेत्र में SRA परियोजनाएं अक्सर कई पक्षों की भागीदारी के कारण जटिल हो जाती हैं। इनमें जमीन मालिक, डेवलपर, पुनर्विकास एजेंसियां और अन्य हितधारक शामिल होते हैं। ऐसे मामलों में समझौतों की शर्तों को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं।

मुलुंड का यह प्रोजेक्ट भी इसी तरह के विवाद के कारण जांच के दायरे में आया है। शिकायतकर्ता कंपनी का कहना है कि उसने समझौतों के तहत अपने दायित्वों को पूरा किया, लेकिन दूसरे पक्ष की ओर से नियमों का पालन नहीं किया गया।

अब EOW की जांच से यह स्पष्ट होगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और क्या वास्तव में किसी तरह की वित्तीय अनियमितता हुई है।

फिलहाल पुलिस ने मामले में FIR दर्ज कर ली है और आगे की कार्रवाई जांच के आधार पर की जाएगी। आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े अन्य लोगों से पूछताछ और दस्तावेजों की जांच की संभावना है।

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