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मुंबई लोकल में यात्रियों की सुरक्षा पर सवाल, 90% जनरल कोच में CCTV नहीं

मुंबई: मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेनों में यात्रियों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। हाल के दिनों में लोकल ट्रेनों में हिंसा की कई घटनाएं सामने आने के बाद यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था पर चिंता बढ़ गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वेस्टर्न रेलवे और सेंट्रल रेलवे के लगभग 89.74 प्रतिशत जनरल कोच में अभी तक CCTV कैमरे उपलब्ध नहीं हैं।
यात्रियों की सुरक्षा को लेकर यह चिंता ऐसे समय में सामने आई है, जब पिछले कुछ दिनों में लोकल ट्रेनों में चार अलग-अलग घटनाएं सामने आईं। इनमें यात्रियों के साथ मारपीट, महिलाओं के कोच में पेपर स्प्रे से हमला और अन्य हिंसक घटनाएं शामिल हैं। इन घटनाओं में कई यात्रियों को चोटें भी आईं, जिसके बाद रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
आंकड़ों के मुताबिक, मुंबई लोकल के अधिकांश जनरल कोच में निगरानी व्यवस्था की कमी है। CCTV कैमरों की अनुपलब्धता के कारण कई बार ट्रेन के अंदर होने वाली घटनाओं की जांच करना और आरोपियों की पहचान करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
इसके अलावा, करीब 93.34 प्रतिशत जनरल कोच में इमरजेंसी टॉक-बैक सिस्टम भी नहीं लगाए गए हैं। यह सिस्टम यात्रियों को आपात स्थिति में सीधे रेलवे अधिकारियों से संपर्क करने की सुविधा देता है। इसकी कमी के कारण किसी घटना के समय यात्रियों को तुरंत मदद पहुंचाने में परेशानी हो सकती है।
मुंबई का लोकल रेलवे नेटवर्क दुनिया के सबसे व्यस्त उपनगरीय रेल नेटवर्क में से एक है। रोजाना लगभग 70 लाख यात्री लोकल ट्रेनों से सफर करते हैं। इतनी बड़ी संख्या में यात्रियों की आवाजाही को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना बेहद जरूरी माना जा रहा है।
हाल के मामलों ने यात्रियों में असुरक्षा की भावना बढ़ाई है। कई यात्रियों का कहना है कि भीड़भाड़ वाली लोकल ट्रेनों में छोटी बातों पर विवाद बढ़ जाते हैं और कई बार स्थिति हिंसा तक पहुंच जाती है। ऐसे में CCTV और त्वरित सहायता प्रणाली की मौजूदगी यात्रियों के लिए सुरक्षा कवच का काम कर सकती है।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा उनकी प्राथमिकता है और सुरक्षा उपायों को लगातार बेहतर किया जा रहा है। रेलवे की ओर से ट्रेनों और स्टेशनों पर निगरानी बढ़ाने, सुरक्षा कर्मियों की तैनाती और तकनीकी सुविधाओं के विस्तार पर काम किया जा रहा है।
हालांकि, यात्रियों और विशेषज्ञों का मानना है कि केवल स्टेशनों पर सुरक्षा बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। ट्रेन के अंदर होने वाली घटनाओं को रोकने के लिए कोचों में भी आधुनिक निगरानी व्यवस्था जरूरी है।
CCTV कैमरों की मदद से न केवल अपराध रोकने में सहायता मिल सकती है, बल्कि घटना के बाद जांच प्रक्रिया भी आसान हो सकती है। रिकॉर्डिंग के आधार पर आरोपी की पहचान और कार्रवाई करना अधिक प्रभावी हो जाता है।
इमरजेंसी टॉक-बैक सिस्टम को लेकर भी यात्रियों का कहना है कि यह सुविधा हर कोच में होनी चाहिए। किसी आपात स्थिति में यात्री तुरंत रेलवे कंट्रोल रूम या सुरक्षा अधिकारियों तक अपनी सूचना पहुंचा सकें, तो समय रहते कार्रवाई की जा सकती है।
मुंबई लोकल में महिलाओं की सुरक्षा भी एक अहम मुद्दा बना हुआ है। महिलाओं के डिब्बों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। पेपर स्प्रे हमले जैसी घटनाओं ने महिला यात्रियों की चिंता और बढ़ा दी है।
रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और सरकारी रेलवे पुलिस (GRP) की ओर से समय-समय पर अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन यात्रियों का कहना है कि बढ़ती भीड़ और ट्रेनों की संख्या को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है।
विशेषज्ञों के अनुसार, मुंबई लोकल जैसे बड़े नेटवर्क में सुरक्षा के लिए तकनीक और मानव संसाधन दोनों का बेहतर इस्तेमाल जरूरी है। CCTV कैमरे, इमरजेंसी कम्युनिकेशन सिस्टम और नियमित सुरक्षा जांच जैसे उपाय यात्रियों के विश्वास को बढ़ा सकते हैं।
मुंबई की लोकल ट्रेनें शहर की आर्थिक गतिविधियों की रीढ़ हैं। लाखों लोग रोजाना इन्हीं ट्रेनों के जरिए अपने काम, शिक्षा और अन्य जरूरी कार्यों के लिए यात्रा करते हैं। ऐसे में सुरक्षित यात्रा का माहौल बनाना रेलवे के लिए बड़ी जिम्मेदारी है।
हालिया घटनाओं और सामने आए आंकड़ों के बाद अब यात्रियों की मांग है कि रेलवे जल्द से जल्द जनरल कोच में CCTV कैमरे और इमरजेंसी सिस्टम लगाने की प्रक्रिया तेज करे, ताकि मुंबई लोकल यात्रा को और सुरक्षित बनाया जा सके।





