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महाराष्ट्र FDA का एक्शन: पारसी डेयरी फार्म का लाइसेंस सस्पेंड

मुंबई: महाराष्ट्र में खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन और खाने-पीने की चीजों में मिलावट के खिलाफ राज्य के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी तुकाराम मुंडे के 25 मई को FDA कमिश्नर का पद संभालने के बाद विभाग ने पूरे राज्य में निरीक्षण अभियान तेज कर दिया है।
FDA की ओर से चलाए जा रहे इस अभियान का उद्देश्य खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना और उपभोक्ताओं को असुरक्षित या मिलावटी खाद्य उत्पादों से बचाना है। विभाग की टीमें लगातार थोक विक्रेताओं, खाद्य उत्पाद बनाने वाली कंपनियों, खुदरा दुकानों, रेस्टोरेंट और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों की जांच कर रही हैं।
राज्यभर में तेज हुआ निरीक्षण अभियान
FDA अधिकारियों के अनुसार, निरीक्षण के दौरान जहां भी खाद्य सुरक्षा नियमों का गंभीर उल्लंघन पाया जा रहा है, वहां तत्काल कार्रवाई की जा रही है। इसमें खाद्य लाइसेंस निलंबित करना, खाद्य पदार्थों के नमूने जब्त करना और नियमों का पालन नहीं करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करना शामिल है।
विभाग ने साफ संकेत दिया है कि खाद्य कारोबार से जुड़े किसी भी संस्थान को सुरक्षा मानकों से समझौता करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। अधिकारियों का ध्यान विशेष रूप से साफ-सफाई, खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, भंडारण व्यवस्था और लाइसेंस संबंधी नियमों के पालन पर है।
पारसी डेयरी फार्म का लाइसेंस निलंबित
FDA ने मुंबई स्थित पारसी डेयरी फार्म प्राइवेट लिमिटेड का फूड बिजनेस लाइसेंस निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई निरीक्षण के दौरान खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता से जुड़े गंभीर उल्लंघन पाए जाने के बाद की गई।
अधिकारियों ने बताया कि कंपनी की इकाई में खाद्य सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर कमियां सामने आई थीं। इसके बाद विभाग ने नियमों के तहत कार्रवाई करते हुए लाइसेंस को निलंबित कर दिया।
FDA की यह कार्रवाई इस बात का संकेत है कि विभाग अब खाद्य कारोबार से जुड़े बड़े और छोटे सभी प्रतिष्ठानों की निगरानी को गंभीरता से ले रहा है।
14 और 15 जुलाई को चलाया गया विशेष अभियान
FDA का यह अभियान 14 और 15 जुलाई को पूरे महाराष्ट्र में चलाया गया था। इस दौरान विभाग की अलग-अलग टीमों ने डेयरी यूनिट्स, खाद्य निर्माण इकाइयों, रेस्टोरेंट, दुकानों और अन्य खाद्य विक्रेताओं की जांच की।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने खाद्य उत्पादों के नमूने लिए और नियमों के उल्लंघन वाले मामलों में कार्रवाई शुरू की। रिपोर्ट के मुताबिक, इस अभियान में ₹1.90 करोड़ से अधिक मूल्य के खाद्य उत्पाद जब्त किए गए।
जब्त किए गए उत्पादों की गुणवत्ता की जांच की जा रही है। यदि जांच में खाद्य पदार्थों में मिलावट या सुरक्षा मानकों का उल्लंघन साबित होता है, तो संबंधित कारोबारियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी।
उपभोक्ता सुरक्षा पर FDA का फोकस
खाद्य सुरक्षा विभाग का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बाजार में उपलब्ध खाद्य सामग्री उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित हो। मिलावटी या खराब गुणवत्ता वाले खाद्य पदार्थ लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकते हैं।
FDA समय-समय पर खाद्य कारोबारियों को नियमों का पालन करने के निर्देश देता रहा है। इसके बावजूद उल्लंघन के मामले सामने आने पर विभाग कार्रवाई करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के नियमित निरीक्षण और सख्त कार्रवाई से खाद्य कारोबारियों में नियमों के पालन को लेकर जागरूकता बढ़ती है और उपभोक्ताओं को बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पाद मिल सकते हैं।
तुकाराम मुंडे के नेतृत्व में सख्त रुख
तुकाराम मुंडे प्रशासनिक सख्ती और नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जाने जाते हैं। FDA कमिश्नर के रूप में कार्यभार संभालने के बाद विभाग की गतिविधियों में तेजी देखने को मिली है।
उनके नेतृत्व में FDA ने खाद्य सुरक्षा से जुड़े मामलों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है। विभाग की कार्रवाई से यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
आगे भी जारी रह सकता है अभियान
FDA अधिकारियों के अनुसार, राज्य में खाद्य सुरक्षा को लेकर निरीक्षण अभियान आगे भी जारी रहने की संभावना है। विभाग का लक्ष्य अधिक से अधिक खाद्य प्रतिष्ठानों की जांच करना और नियमों का पालन सुनिश्चित करना है।
महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्य में खाद्य आपूर्ति श्रृंखला काफी व्यापक है। ऐसे में थोक विक्रेताओं से लेकर छोटे दुकानदारों तक सभी स्तरों पर निगरानी जरूरी है।
कुल मिलाकर, महाराष्ट्र FDA की हालिया कार्रवाई खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। पारसी डेयरी फार्म का लाइसेंस निलंबित करना और करोड़ों रुपये के खाद्य उत्पादों की जब्ती यह दर्शाती है कि विभाग अब नियमों के उल्लंघन पर पहले से अधिक सख्त रुख अपना रहा है।





