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सरकारी काम के बदले रिश्वत का खेल, ACB के आंकड़ों ने उठाए गंभीर सवाल

नासिक। महाराष्ट्र में भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार चलाए जा रहे अभियानों के बावजूद सरकारी कामकाज में रिश्वत मांगने और लेने के मामले सामने आ रहे हैं। राज्य के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) के आंकड़ों में नासिक डिवीजन सबसे अधिक दर्ज मामलों वाला क्षेत्र बनकर उभरा है। 21 सितंबर 2026 तक के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, नासिक डिवीजन में भ्रष्टाचार से संबंधित 110 मामले दर्ज किए गए, जिनमें 177 लोगों को आरोपी बनाया गया। इस डिवीजन में नासिक, धुले, जलगांव, नंदुरबार और अहिल्यानगर जिले शामिल हैं। आंकड़े बताते हैं कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई जारी रहने के बावजूद सरकारी कार्यालयों में रिश्वतखोरी की शिकायतें एक गंभीर चुनौती बनी हुई हैं। हालांकि दर्ज मामलों की अधिक संख्या का अर्थ यह जरूरी नहीं है कि उस क्षेत्र में भ्रष्टाचार की वास्तविक दर भी सबसे अधिक हो, क्योंकि शिकायतों की संख्या और जांच एजेंसी की सक्रियता भी आंकड़ों को प्रभावित करती है।
महाराष्ट्र में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को आठ प्रशासनिक डिवीजनों में संगठित किया गया है। इनमें नासिक, पुणे, ठाणे, मुंबई, छत्रपति संभाजीनगर, अमरावती, नागपुर और नांदेड़ शामिल हैं।
इन डिवीजनों के माध्यम से सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ रिश्वत मांगने, रिश्वत स्वीकार करने तथा भ्रष्टाचार के अन्य आरोपों से संबंधित शिकायतों पर कार्रवाई की जाती है।
21 सितंबर तक के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, नासिक डिवीजन में दर्ज 110 मामलों ने इसे प्रदेश में सबसे आगे रखा।
इससे पहले 7 सितंबर 2026 तक के प्रकाशित आंकड़ों में भी नासिक डिवीजन शीर्ष पर था। उस समय यहां 108 मामले दर्ज हुए थे और 173 लोगों को आरोपी बनाया गया था।
इस अवधि में पुणे डिवीजन में 93, छत्रपति संभाजीनगर में 79, ठाणे में 72, अमरावती में 57, नागपुर में 56, नांदेड़ में 42 और मुंबई में 27 मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई थी।
इन आंकड़ों से पता चलता है कि सितंबर के पहले सप्ताह तक भी नासिक डिवीजन अन्य क्षेत्रों से आगे था। इसके बाद 21 सितंबर तक उपलब्ध विवरण में मामलों की संख्या बढ़कर 110 और नामजद व्यक्तियों की संख्या 177 बताई गई।
हालांकि ये आंकड़े 21 सितंबर तक की स्थिति को दर्शाते हैं, पूरे वर्ष 2026 के अंतिम आंकड़े नहीं हैं।
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो का काम सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और रिश्वतखोरी से जुड़ी शिकायतों की जांच करना है।
किसी सरकारी काम को पूरा करने के बदले अवैध राशि मांगने की शिकायत मिलने पर एसीबी नियमानुसार जांच करती है। आरोपों की प्राथमिक पुष्टि होने पर संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध जाल बिछाकर पकड़ने जैसी कार्रवाई भी की जा सकती है।
इसके अतिरिक्त आय से अधिक संपत्ति और पद के दुरुपयोग से जुड़े मामलों की जांच भी संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत की जाती है।
नासिक डिवीजन में दर्ज मामलों की बड़ी संख्या ने सरकारी विभागों में जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
आम नागरिकों को विभिन्न सरकारी सेवाओं के लिए राजस्व कार्यालयों, स्थानीय निकायों और अन्य विभागों से संपर्क करना पड़ता है। ऐसी परिस्थितियों में यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा वैध कार्य के बदले रिश्वत मांगी जाती है, तो नागरिकों को आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
हालांकि नासिक डिवीजन के इन 110 मामलों में किस विभाग के कितने कर्मचारी आरोपी हैं, इसका पूर्ण विभागवार विवरण उपलब्ध नहीं है। इसलिए किसी विशेष विभाग को सबसे अधिक भ्रष्ट बताना उचित नहीं होगा।
भ्रष्टाचार से संबंधित मामलों में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज होना और अदालत में अपराध सिद्ध होना अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाएं हैं।
एसीबी की कार्रवाई के दौरान किसी अधिकारी, कर्मचारी या अन्य व्यक्ति को आरोपी बनाया जा सकता है, लेकिन उसके दोषी होने का अंतिम निर्णय न्यायालय करता है।
इसलिए 177 नामजद व्यक्तियों को दोषी या सजा प्राप्त व्यक्ति नहीं माना जा सकता। इनमें से कितने मामलों की जांच पूरी हुई है, कितनों में आरोपपत्र दाखिल हुए हैं और कितने अदालत में लंबित हैं, इसकी अलग जानकारी आवश्यक होगी।
भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई के बावजूद कई चुनौतियां बनी रहती हैं। इनमें शिकायत करने वाले नागरिकों का भय, सबूत जुटाने की कठिनाई और न्यायिक प्रक्रिया में लगने वाला समय शामिल हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भ्रष्टाचार रोकने के लिए केवल गिरफ्तारी या छापेमारी पर्याप्त नहीं है। सरकारी सेवाओं की प्रक्रिया को सरल बनाना, आवेदन की स्थिति ऑनलाइन उपलब्ध कराना और अधिकारियों की जवाबदेही तय करना भी आवश्यक है।
यदि नागरिकों को सरकारी प्रमाणपत्र, अनुमति या अन्य सेवाओं के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, तो इससे अनावश्यक परेशानी बढ़ सकती है।
ऐसी परिस्थितियों को कम करने के लिए सेवाओं की समयसीमा निर्धारित करना और आवेदन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना महत्वपूर्ण है।
इसके साथ ही शिकायत मिलने पर त्वरित कार्रवाई और निष्पक्ष जांच से व्यवस्था में नागरिकों का भरोसा बढ़ाया जा सकता है।
महाराष्ट्र एसीबी ने नागरिकों के लिए रिश्वत मांगने की शिकायत दर्ज कराने की व्यवस्था उपलब्ध कराई है। कोई सरकारी कर्मचारी या अधिकारी वैध सरकारी काम करने के बदले रिश्वत मांगता है, तो नागरिक एसीबी से संपर्क कर सकते हैं।
एसीबी की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, शिकायत दर्ज कराने के लिए टोल-फ्री नंबर 1064 और व्हाट्सऐप नंबर 9930997700 उपलब्ध हैं।
इसके अतिरिक्त एसीबी की वेबसाइट पर ऑनलाइन शिकायत करने की सुविधा भी है। नागरिक रिश्वत की मांग, संबंधित सरकारी कर्मचारी, विभाग और लंबित काम की जानकारी देकर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
एसीबी ने नागरिकों से अपील की है कि सरकारी काम के बदले रिश्वत मांगे जाने पर संबंधित अधिकारियों को इसकी सूचना दें। शिकायत के साथ उपलब्ध साक्ष्य जांच में सहायक हो सकते हैं।
नासिक डिवीजन के आंकड़े प्रशासनिक पारदर्शिता और भ्रष्टाचार निरोधक व्यवस्था की प्रभावशीलता पर व्यापक चर्चा की आवश्यकता दर्शाते हैं।
इस क्षेत्र में नासिक के अलावा धुले, जलगांव, नंदुरबार और अहिल्यानगर जैसे जिले शामिल हैं। इन जिलों में सरकारी सेवाओं का दायरा व्यापक है और बड़ी संख्या में लोग प्रशासनिक कार्यालयों से जुड़े कार्य कराते हैं।
ऐसे में सरकारी सेवाओं तक बिना रिश्वत पहुंच सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।
नासिक डिवीजन में सबसे अधिक मामले दर्ज होने का एक पहलू यह भी हो सकता है कि यहां नागरिक शिकायतें अधिक दर्ज करा रहे हों या एसीबी की कार्रवाई अधिक सक्रिय हो। हालांकि उपलब्ध आंकड़ों से इस संभावना की पुष्टि या खंडन नहीं किया जा सकता।
इसलिए केवल दर्ज मामलों के आधार पर जिलों या डिवीजनों की वास्तविक भ्रष्टाचार दर तय करना उचित नहीं होगा।
फिलहाल 21 सितंबर तक के आंकड़ों ने नासिक डिवीजन को महाराष्ट्र में दर्ज भ्रष्टाचार संबंधी मामलों की संख्या के आधार पर सबसे आगे रखा है।
110 मामलों में 177 लोगों के नाम सामने आने से प्रशासनिक जवाबदेही और भ्रष्टाचार की रोकथाम का मुद्दा फिर चर्चा में है।
अब महत्वपूर्ण होगा कि इन मामलों की जांच निष्पक्ष और समयबद्ध तरीके से पूरी हो तथा आरोप सिद्ध होने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
इसके साथ ही सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ाने और नागरिकों के लिए शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया को अधिक सुलभ बनाने से भ्रष्टाचार रोकने के प्रयासों को मजबूती मिल सकती है।





