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CJP के 'जेल भरो आंदोलन' में पहुंचे विशाल ददलानी, मंच से बोले- आंदोलन जारी रहेगा

Kavita2
2 Oct 2026 5:55 PM IST
CJP के जेल भरो आंदोलन में पहुंचे विशाल ददलानी, मंच से बोले- आंदोलन जारी रहेगा
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मुंबई। गायक और संगीतकार विशाल ददलानी शुक्रवार, 2 अक्टूबर को मुंबई के शिवाजी पार्क में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के 'जेल भरो आंदोलन' में शामिल हुए। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके के नेतृत्व में आयोजित प्रदर्शन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई गई। विशाल ददलानी ने मंच से प्रदर्शनकारियों को संबोधित किया और आंदोलन के प्रति अपना समर्थन जाहिर किया।

विशाल ददलानी ने प्रदर्शन में शामिल होने पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें इससे पहले दिल्ली में अभिजीत दीपके के साथ शामिल होने का मौका नहीं मिल पाया था, लेकिन अब मुंबई में वह इस आंदोलन का हिस्सा बन सके हैं। मंच से उन्होंने वहां जुटे लोगों को संबोधित करते हुए कहा, "ये इतना सुंदर दृश्य है। मुझे इनके साथ दिल्ली में होने का मौका नहीं मिला, लेकिन यहां होने का मौका मिल रहा है।" इसके बाद उन्होंने कहा कि आंदोलन जारी रहेगा और प्रदर्शनकारियों के साथ नारा लगाया।


विशाल ददलानी इससे पहले भी CJP के इस प्रदर्शन को अपना समर्थन दे चुके थे। आंदोलन से पहले सामने आए एक वीडियो में उन्होंने लोगों से प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की थी। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर CJP की मांग का समर्थन करते हुए नारे भी लगाए थे। शुक्रवार को वह खुद शिवाजी पार्क पहुंचे और मंच से प्रदर्शनकारियों के बीच अपनी बात रखी।

CJP ने 2 अक्टूबर को शिवाजी पार्क में शाम 4 बजे से प्रदर्शन आयोजित करने की घोषणा की थी। संगठन का कहना है कि उसकी प्रमुख मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा है। CJP ने मतदाता सूची और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर सवाल उठाए हैं। ये CJP और उसके समर्थकों के आरोप हैं; निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची संशोधन से जुड़े गड़बड़ी के आरोपों से इनकार किया है और प्रक्रिया का उद्देश्य डुप्लिकेट तथा अयोग्य प्रविष्टियों को हटाना बताया है।

प्रदर्शन को लेकर पिछले कई दिनों से मुंबई में राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल बनी हुई थी। मुंबई पुलिस ने CJP को शिवाजी पार्क में प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी। इसके बाद अभिजीत दीपके ने 'जेल भरो आंदोलन' करने की घोषणा की। पुलिस ने अनुमति नहीं देने के पीछे आयोजन स्थल से संबंधित अनुमति, यातायात, ध्वनि और आसपास के अस्पतालों में मरीजों की आवाजाही से जुड़े मुद्दों का उल्लेख किया था।

इसके बावजूद CJP अपने आंदोलन के कार्यक्रम पर कायम रही। शुक्रवार को शिवाजी पार्क के आसपास सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रखी गई। पुलिस ने बैरिकेडिंग के साथ अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए। एंटी-रायट टीम, क्विक रिस्पॉन्स टीम और डॉग स्क्वॉड को भी अलर्ट पर रखा गया था।

CJP संस्थापक अभिजीत दीपके पिछले कुछ समय से मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ आंदोलन चला रहे हैं। संगठन ने चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी आपत्तियां सामने रखी हैं। CJP ने पहले शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी, लेकिन अनुमति नहीं मिलने के बाद इसे 'जेल भरो आंदोलन' के रूप में आगे बढ़ाने का फैसला किया गया।

विशाल ददलानी के आंदोलन में पहुंचने से प्रदर्शन को मनोरंजन जगत से भी समर्थन मिला। मंच पर पहुंचने के बाद उन्होंने अभिजीत दीपके और वहां मौजूद लोगों के साथ संवाद किया। उन्होंने कहा कि आंदोलन तब तक चलता रहेगा, जब तक प्रदर्शनकारियों की मांग को लेकर उनकी मुहिम जारी है। विशाल ने मंच से CJP के समर्थकों के साथ "गो ज्ञानू गो" का नारा भी लगाया।

विशाल के अलावा अभिनेत्री शबाना आजमी भी प्रदर्शन में शामिल हुईं। इससे पहले CJP की ओर से विभिन्न सार्वजनिक हस्तियों और राजनीतिक नेताओं से आंदोलन के लिए समर्थन मिलने की बात कही गई थी।

2 अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर आयोजित आंदोलन को CJP ने लोकतांत्रिक और चुनावी मुद्दों से जोड़ते हुए आगे बढ़ाया। संगठन ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे के साथ मतदाता सूची के पुनरीक्षण से संबंधित अपनी मांगें भी सामने रखी हैं। वहीं इन मुद्दों को लेकर चुनाव आयोग का पक्ष CJP के आरोपों से अलग रहा है।

अभिजीत दीपके ने इससे पहले कहा था कि आंदोलन केवल मुंबई तक सीमित नहीं रहेगा और आगे इसे दिल्ली के जंतर-मंतर तक ले जाने की योजना है। CJP ने देश के अन्य हिस्सों में भी अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करने की बात कही है।

शिवाजी पार्क में विशाल ददलानी की मौजूदगी प्रदर्शन के दौरान चर्चा का विषय बनी रही। उन्होंने मंच से आंदोलन के समर्थन में अपनी बात रखी और प्रदर्शनकारियों के साथ नारे लगाए। CJP की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग जारी है, जबकि चुनावी प्रक्रिया को लेकर संगठन द्वारा लगाए जा रहे आरोपों पर निर्वाचन आयोग का रुख अलग है। ऐसे में आंदोलन के आगे के कार्यक्रम और इससे जुड़े घटनाक्रम पर निगाह बनी हुई है।

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