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मिजो खिलाड़ियों का बड़ा योगदान
आइजोल: मिजोरम की लालरेमसियामी और लालथांतलुआंगी भारतीय महिला हॉकी टीम की उस ऐतिहासिक जीत का हिस्सा रहीं, जिसने एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक के लिए भारत का 44 साल लंबा इंतजार खत्म कर दिया। भारत ने फाइनल में चीन को 1-0 से हराकर 1982 के बाद पहली बार महिला हॉकी का एशियन गेम्स गोल्ड जीता।
फाइनल मुकाबले में लालरेमसियामी ने निर्णायक भूमिका निभाई। उन्होंने पहले क्वार्टर के 10वें मिनट में भारत के लिए मैच का एकमात्र गोल किया। खास बात यह रही कि यह मुकाबला उनके सीनियर अंतरराष्ट्रीय करियर का 200वां मैच भी था। उनका यह गोल अंततः भारत को स्वर्ण पदक दिलाने वाला साबित हुआ।
दूसरी मिजो खिलाड़ी लालथांतलुआंगी टीम की डिफेंस लाइन का अहम हिस्सा रहीं। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में भारत के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया और अभियान के दौरान दो गोल भी किए, हालांकि फाइनल में वह प्लेइंग इलेवन का हिस्सा नहीं थीं। दोनों खिलाड़ी मिजोरम की थेंज़ावल हॉकी अकादमी से निकली हैं।
इस जीत का महत्व सिर्फ स्वर्ण पदक तक सीमित नहीं रहा। भारत ने इसके साथ ही लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028 के लिए सीधा क्वालिफिकेशन भी हासिल कर लिया। इस उपलब्धि ने भारतीय महिला हॉकी के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत कर दी है।
लालरेमसियामी और लालथांतलुआंगी की सफलता मिजोरम के लिए भी ऐतिहासिक रही। दोनों खिलाड़ी राज्य की पहली एशियन गेम्स गोल्ड मेडलिस्ट बनीं। राज्य सरकार ने उनकी उपलब्धि का सम्मान करते हुए पहले 25-25 लाख रुपये के पुरस्कार की घोषणा की थी, जिसे बाद में बढ़ाकर कुल 40-40 लाख रुपये कर दिया गया। इसमें 25 लाख रुपये राज्य स्पोर्ट्स इंसेंटिव कैश अवॉर्ड स्कीम और 15 लाख रुपये Bana Kaih Scheme के तहत शामिल हैं।
5 अक्टूबर को दोनों खिलाड़ियों के मिजोरम लौटने पर लेंगपुई एयरपोर्ट पर उनका भव्य स्वागत किया गया। इसके बाद आर. देंगथुआमा इंडोर स्टेडियम में मुख्यमंत्री लालदुहोमा की मौजूदगी में सम्मान समारोह आयोजित किया गया। राज्य सरकार ने इस उपलब्धि को मिजोरम के खेल इतिहास का महत्वपूर्ण क्षण बताया।
लालरेमसियामी इससे पहले भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। वह 2018 विश्व कप में भारत की सबसे युवा खिलाड़ियों में शामिल थीं और बाद में ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली मिजोरम की पहली महिला खिलाड़ी बनीं। वहीं 20 वर्षीय लालथांतलुआंगी ने इस एशियाई खेल अभियान में मजबूत डिफेंस और महत्वपूर्ण गोलों के जरिए अपनी पहचान बनाई।
दोनों खिलाड़ियों की उपलब्धि ने मिजोरम में जमीनी स्तर की हॉकी व्यवस्था की ताकत भी सामने रखी है। राज्य के खेल मंत्री लालनघिंगलोवा हमार ने कहा कि दोनों खिलाड़ियों का एक छोटे से हॉकी अकादमी से निकलकर एशियाई खेलों का स्वर्ण जीतना राज्य के युवा खिलाड़ियों के लिए बड़ी प्रेरणा है।
भारत के लिए यह जीत 1982 के बाद पहली महिला हॉकी एशियन गेम्स गोल्ड जीत थी। वहीं मिजोरम के लिए यह इससे भी खास रही, क्योंकि राज्य के दो खिलाड़ियों ने न सिर्फ गोल्ड जीता बल्कि भारतीय हॉकी के 44 साल पुराने इंतजार को खत्म करने में सीधा योगदान दिया।
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