
x
मेघालय प्रशासन ने मांगी रिपोर्ट
शिलांग: मेघालय के वेस्ट खासी हिल्स जिले के दूरस्थ डोमकिरकोह गांव में तीन वर्षीय बच्चे की मौत के बाद जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया है। बच्चे की मौत तब हुई जब परिजन उसे इलाज के लिए लेकर जा रहे थे। घटना के बाद प्रशासन ने स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और सड़क विभाग से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
प्रशासन ने रांबरी ब्लॉक के बीडीओ, वेस्ट खासी हिल्स के जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी और पीडब्ल्यूडी (सड़क) के कार्यपालक अभियंता को पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट देने को कहा है। रिपोर्ट में यह स्पष्ट करना होगा कि बच्चे की हालत बिगड़ने के बाद स्वास्थ्य सहायता कितनी जल्दी उपलब्ध हो सकी और गांव तक सड़क तथा आपात परिवहन की वास्तविक स्थिति क्या है।
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक बच्चा डोमकिरकोह गांव में गंभीर रूप से बीमार हो गया था। परिवार को तुरंत चिकित्सा सहायता की जरूरत थी, लेकिन गांव तक वाहन आसानी से नहीं पहुंच पा रहे थे। स्थानीय लोगों का कहना है कि खराब सड़क और सीमित परिवहन व्यवस्था के कारण परिवार को बच्चे को लेकर पैदल निकलना पड़ा। कुछ रिपोर्टों के अनुसार परिवार ने लगभग 10 किलोमीटर तक पैदल यात्रा की, लेकिन रास्ते में ही बच्चे की मौत हो गई।
डोमकिरकोह गांव मावखियात उप-स्वास्थ्य केंद्र के अंतर्गत आता है। यह केंद्र करीब एक साल से संचालित है, लेकिन गांव से वहां तक पहुंचने में पैदल लगभग डेढ़ घंटे का समय लग सकता है। यही दूरी और कठिन भौगोलिक स्थिति आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की बड़ी चुनौती बन रही है।
प्रशासन ने बताया कि क्षेत्र में मुख्यमंत्री सुरक्षित मातृत्व योजना के तहत आपातकालीन मरीजों के लिए परिवहन व्यवस्था उपलब्ध है। हालांकि शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि बच्चे की तबीयत बिगड़ने के समय स्थानीय स्वास्थ्य कर्मियों को जानकारी नहीं दी गई थी, इसलिए आपात परिवहन व्यवस्था सक्रिय नहीं हो सकी। इस तथ्य की भी विस्तृत जांच की जा रही है।
सड़क संपर्क भी इस मामले का महत्वपूर्ण पहलू है। प्रशासन के अनुसार डोमकिरकोह तक वाहन मुख्य रूप से मैनोप मार्ग से पहुंचते हैं, लेकिन भारी बारिश और खराब मौसम में रास्ता कई बार वाहनों के लिए अनुपयोगी हो जाता है। क्षेत्र में सार्वजनिक परिवहन भी सीमित बताया गया है।
घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग की एक बहु-विषयक टीम को 6 अक्टूबर को गांव का दौरा करने के निर्देश दिए गए हैं। यह टीम स्वास्थ्य सुविधाओं, मरीजों के परिवहन, सड़क पहुंच और आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था की जमीनी स्थिति का आकलन करेगी। इसके बाद आने वाले दिनों में अन्य विभागीय टीमें भी गांव का निरीक्षण करेंगी।
क्षेत्र के लिए करीब 10 किलोमीटर लंबी सड़क परियोजना पहले ही स्वीकृत है। यह सड़क रांबरी-मावरोक पीएमजीएसवाई रोड से होकर नोंगलांग होते हुए डोमकिरकोह तक प्रस्तावित है। प्रशासन का कहना है कि इस परियोजना का उद्देश्य गांव को बेहतर ऑल-वेदर कनेक्टिविटी और स्वास्थ्य सेवाओं तक आसान पहुंच उपलब्ध कराना है।
तीन साल के बच्चे की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि दूरस्थ पहाड़ी इलाकों में सिर्फ स्वास्थ्य केंद्र खोलना पर्याप्त है या मरीजों तक समय पर एंबुलेंस और सड़क पहुंच सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है। अब प्रशासनिक रिपोर्ट के बाद यह स्पष्ट होगा कि इस घटना में कहां चूक हुई और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।
Next Story





