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कोहिमा: पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग (DEFCC) के प्रधान सचिव और नागालैंड राज्य कर्मचारी चयन बोर्ड (NSSB) के अध्यक्ष, वाई. किखेतो सेमा ने बताया कि नागालैंड में देश में सबसे अधिक वन क्षेत्र कम हुआ है। 2013 से 2023 के बीच यहाँ 795 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र नष्ट हो गया, जो राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का लगभग 5% है।
वे “सामुदायिक संरक्षण: सफलता का जश्न और भविष्य की रूपरेखा” विषय पर आयोजित दो दिवसीय राज्य-स्तरीय कार्यशाला के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे। यह कार्यशाला 4 नवंबर को कोहिमा के कैथेड्रल स्थित गोल्डन जुबली हॉल में संपन्न हुई।
बाइबल की ‘बुक ऑफ जेनेसिस’ (उत्पत्ति की पुस्तक) में सृष्टि की रचना के वृत्तांत का जिक्र करते हुए, किखेतो ने कहा कि ईश्वर ने इंसानों को बनाने से पहले आकाश, पृथ्वी, समुद्र और सभी प्रकार की जैव विविधता की रचना की थी। इंसानों को प्रकृति को नष्ट करने के बजाय, उसकी रक्षा करने और जिम्मेदारी से उसका उपयोग करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि मानवता को जैव विविधता की देखरेख का जिम्मा सौंपा गया है और उसे इस जिम्मेदारी को निभाना चाहिए।
नागालैंड की विशिष्ट भूमि स्वामित्व प्रणाली पर बात करते हुए, किखेतो ने कहा कि यह देश का एकमात्र ऐसा राज्य है जिसका गठन एक राजनीतिक समझौते के तहत हुआ था। उन्होंने बताया कि राज्य के कुल क्षेत्रफल में सरकारी वनों और भूमि का हिस्सा मात्र 5% है। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 371(A) एक महत्वपूर्ण संवैधानिक सुरक्षा कवच तो है, लेकिन अक्सर इसे गलत समझा जाता है, जिससे सरकार द्वारा अधिग्रहित भूमि से जुड़े मामलों में भी जटिलताएँ पैदा हो जाती हैं।
उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 371(A) को विकास के रास्ते में बाधा नहीं बनना चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि केवल संवैधानिक प्रावधानों के सहारे न तो जैव विविधता की रक्षा की जा सकती है और न ही जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सकता है। 'इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट' (ISFR) का हवाला देते हुए, उन्होंने बताया कि 2013 से 2023 के बीच नागालैंड में 795 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र कम हो गया है, जिसमें 2018 से 2021 के बीच 235 वर्ग किलोमीटर की कमी भी शामिल है।
'कम्पन्सेटरी एफ़ॉरेस्टेशन फंड (CAF) एक्ट, 2016' के बारे में किखेतो ने बताया कि 'कम्पन्सेटरी एफ़ॉरेस्टेशन फंड मैनेजमेंट एंड प्लानिंग अथॉरिटी' (CAMPA) के तहत मिलने वाली धनराशि को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच बांटा जाता है, जिसमें से 90% हिस्सा राज्यों को दिया जाता है और बाकी 10% केंद्र अपने पास रखता है।
'हिमालय (नागालैंड) में वन और जैव विविधता प्रबंधन परियोजना' (FBMP) का जिक्र करते हुए, उन्होंने बताया कि इस पहल को जर्मनी और भारत के बीच वित्तीय सहयोग के तहत राज्य सरकार द्वारा लागू किया जा रहा है। इस परियोजना का उद्देश्य नागालैंड की जैव विविधता को संरक्षित करना और साथ ही वनों पर निर्भर समुदायों की आजीविका और जीवन स्तर में सुधार लाना है।
यह परियोजना वन विभाग द्वारा NEPED के सहयोग से कोहिमा, मोकोकचुंग, पेरेन, शमाटोर, तुएनसांग और वोखा जिलों के 64 गांवों में चलाई जा रही है। 2020-2027 की अवधि के लिए 65.70 करोड़ रुपये के बजट के साथ, 41,000 हेक्टेयर क्षेत्र में संरक्षण कार्य किए जा रहे हैं। इसमें परियोजना के सभी 64 गांव और 13 'सामुदायिक संरक्षित क्षेत्र' (CCAs) शामिल हैं, जिनमें स्थानीय समुदाय सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं।
किखेतो ने कार्यक्रम में शामिल लोगों से जैव विविधता संरक्षण का 'दूत' (ambassador) बनने का आग्रह किया और नागरिकों से अपील की कि वे आने वाली पीढ़ियों के लिए राज्य की समृद्ध प्राकृतिक विरासत की रक्षा और संरक्षण करें।
उन्होंने सरकार द्वारा शुरू की गई विभिन्न व्यावसायिक वृक्षारोपण पहलों पर भी प्रकाश डाला, जिनका उद्देश्य कॉफी, रबर, चाय, अगरवुड और सुपारी की खेती के जरिए किसानों और बेरोजगार युवाओं के लिए आजीविका के अवसर बढ़ाना है। इसके अलावा, उन्होंने बताया कि सरकार स्थानीय खपत और निर्यात बाजारों, दोनों के लिए जैविक फलों और सब्जियों की खेती को बढ़ावा दे रही है।
इससे पहले, कार्यक्रम में FBMP के अनुभवों और आगे की राह पर तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिसके बाद सामुदायिक प्रतिनिधियों के साथ बातचीत हुई। समापन सत्र का संचालन CTA, PMC, FBMP के नंद किशोर अग्रवाल ने किया, जबकि कार्यशाला की कार्यवाही का सारांश और भविष्य की रूपरेखा CCF (D&P) तथा FBMP के परियोजना निदेशक सिद्रमप्पा चलकापुरे ने प्रस्तुत की।
समुदाय के प्रतिनिधियों में मोकोकचुंग के उंगर गांव से पूर्णुक्षी; तुएनसांग के केशाई गांव CCA के अध्यक्ष एस. हाकू; पेरेन के डुंगकी गांव CCA के अध्यक्ष केदितई; हुके-युंगन्यू 3C के अध्यक्ष मुखे सोटोकुर; रॉनरेन गांव CCA के अध्यक्ष एक्यिमो लोथा; और तुएनसांग के हक गांव के CCA सदस्य टी. अमंग शामिल थे।
धन्यवाद प्रस्ताव FBMP के उप परियोजना निदेशक डॉ. रोखु सावियो क्रोचा ने दिया।
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