
भुवनेश्वर: वरिष्ठ भाजपा नेता जयनारायण मिश्रा के इस बयान पर कि कोशल क्षेत्र का ओडिशा में विलय एक ऐतिहासिक भूल थी, राजनीतिक रूप से तीखी प्रतिक्रिया हुई है। विपक्षी बीजद और कांग्रेस ने मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की है। पूर्व मंत्री और बीजद विधायक रणेंद्र प्रताप स्वैन ने रविवार को कहा कि मिश्रा ने एक मंत्री की मौजूदगी में यह विवादास्पद बयान दिया। उन्होंने मांग की, 'मंत्री का चुप रहना यह दर्शाता है कि वह मिश्रा के विचार का समर्थन करते हैं। मुख्यमंत्री को इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।' उनके पार्टी सहयोगी और विधानसभा में विपक्ष के उप मुख्य सचेतक प्रताप देब ने बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि इस तरह की टिप्पणियां ओडिशा की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को कमजोर करती हैं। देब ने कहा, 'एक तरफ भाजपा ओडिया अस्मिता की बात करती है और दूसरी तरफ वह इस तरह के विभाजनकारी विचारों को बढ़ावा दे रही है।' मिश्रा के बयान की निंदा करते हुए कांग्रेस विधायक दल के नेता रामचंद्र कदम ने कहा कि ओडिया अस्मिता की बात करके ओडिशा में सत्ता में आई भाजपा अब राज्य के अस्तित्व पर ही सवाल उठा रही है। कदम ने कहा, "अब ऐसा प्रतीत होता है कि डबल इंजन वाली सरकार राज्य को बांटना चाहती है।" ओपीसीसी के पूर्व अध्यक्ष निरंजन पटनायक ने मांग की कि मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी इस मुद्दे पर स्पष्ट हों क्योंकि यह बयान उनकी पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने दिया है।





