
भुवनेश्वर। 8 अक्टूबर को कांग्रेस की ओर से बुलाए गए ओडिशा बंद को लेकर बीजू जनता दल (BJD) के रुख में बुधवार को अचानक बदलाव देखने को मिला। पार्टी की वरिष्ठ नेता प्रमिला मलिक ने पहले कहा कि BJD बंद में हिस्सा लेगी, लेकिन कुछ ही मिनटों बाद उन्होंने अपना बयान बदलते हुए स्पष्ट कर दिया कि पार्टी कांग्रेस के ओडिशा बंद का समर्थन नहीं करेगी।
यह घटनाक्रम नवीन निवास में हुई बैठक के बाद सामने आया। बैठक के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए प्रमिला मलिक ने शुरुआती तौर पर कहा कि BJD बंद में शामिल होगी। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी एक दिन पहले दिल्ली में विपक्षी दलों के विरोध कार्यक्रम में शामिल हुई थी, इसलिए ओडिशा बंद में भी भागीदारी होगी।
हालांकि उनके इस बयान के कुछ ही समय बाद पार्टी की ओर से स्थिति बदल गई। प्रमिला मलिक ने दोबारा स्पष्ट किया कि BJD बंद का समर्थन नहीं करेगी और पार्टी BJP तथा कांग्रेस दोनों से समान दूरी बनाए रखने की अपनी नीति पर कायम है।
BJD के इस अचानक बदले रुख ने राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी। पहले समर्थन की बात और फिर कुछ ही मिनटों में उससे पीछे हटने के कारण पार्टी की रणनीति को लेकर सवाल उठने लगे।
BJP ने इसी मुद्दे को लेकर BJD पर निशाना साधा। भाजपा नेताओं ने कहा कि BJD का रुख स्पष्ट नहीं है और पार्टी कभी कांग्रेस के साथ दिखाई देती है तो कभी उससे दूरी बनाने की बात करती है।
BJP का आरोप है कि BJD अपनी घोषित राजनीतिक नीति और जमीन पर लिए जा रहे फैसलों के बीच संतुलन नहीं बना पा रही है। पार्टी ने सवाल उठाया कि यदि BJD कांग्रेस से बराबर दूरी बनाए रखना चाहती है तो दिल्ली में विपक्ष के कार्यक्रम में उसकी भागीदारी क्यों हुई।
दूसरी ओर BJD की ओर से कहा गया कि अलग-अलग मुद्दों पर पार्टी का रुख अलग हो सकता है और किसी मंच पर भागीदारी को स्थायी राजनीतिक गठजोड़ के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
प्रमिला मलिक ने साफ किया कि BJD कांग्रेस और BJP दोनों से समान दूरी की अपनी नीति को जारी रखेगी। इसी आधार पर पार्टी ने 8 अक्टूबर के ओडिशा बंद से खुद को अलग रखने का फैसला किया।
यह फैसला ऐसे समय आया है जब राज्य की राजनीति में BJD, BJP और कांग्रेस के बीच कई मुद्दों पर तीखी बयानबाजी चल रही है। अलग-अलग मुद्दों पर विपक्षी दल सरकार के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं, लेकिन उनके बीच राजनीतिक दूरी भी बनी हुई है।
कांग्रेस की ओर से बुलाए गए ओडिशा बंद को लेकर पहले से राजनीतिक गतिविधियां तेज थीं। बंद के समर्थन में कांग्रेस और उसके सहयोगी दल तैयारी कर रहे हैं।
ऐसे में BJD के समर्थन की शुरुआती घोषणा ने बंद को लेकर राजनीतिक समीकरण बदलने की संभावना पैदा कर दी थी। लेकिन पार्टी के तुरंत पीछे हटने से स्थिति फिर बदल गई।
नवीन निवास में हुई बैठक को भी इस रुख परिवर्तन से जोड़कर देखा जा रहा है। बैठक के बाद ही प्रमिला मलिक के दोनों बयान सामने आए, जिससे यह संकेत मिला कि पार्टी ने अंदरूनी चर्चा के बाद अपने रुख को अंतिम रूप दिया।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि BJD फिलहाल ऐसी स्थिति बनाए रखना चाहती है, जिसमें वह BJP सरकार के खिलाफ मुद्दों पर विरोध भी करे और कांग्रेस के साथ औपचारिक रूप से एक मंच पर खड़ी भी न दिखाई दे।
ओडिशा में BJD लंबे समय तक सत्ता में रही है और अब मुख्य विपक्षी दल की भूमिका निभा रही है। ऐसे में पार्टी के हर राजनीतिक फैसले पर विशेष नजर रहती है।
BJP के लिए भी BJD का यह यू-टर्न राजनीतिक हमला करने का अवसर बन गया है। भाजपा नेताओं ने इसे पार्टी की असमंजस की स्थिति बताया है।
हालांकि BJD ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उसकी नीति स्पष्ट है और वह किसी राष्ट्रीय दल के पीछे चलने के बजाय स्वतंत्र राजनीतिक भूमिका निभाएगी।
पार्टी नेताओं का कहना है कि जनहित के मुद्दों पर जहां जरूरत होगी वहां आवाज उठाई जाएगी, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि BJD कांग्रेस के नेतृत्व वाले किसी राजनीतिक मोर्चे का हिस्सा है।
8 अक्टूबर के बंद को लेकर BJD के कार्यकर्ताओं के बीच भी अब स्पष्ट संदेश भेजा जाएगा कि पार्टी इसमें औपचारिक रूप से शामिल नहीं होगी।
इससे पहले प्रमिला मलिक के पहले बयान के कारण पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों में भ्रम की स्थिति बन गई थी। बाद में बदले हुए बयान से पार्टी ने स्थिति साफ करने की कोशिश की।
BJP की आलोचना के बाद यह मामला अब केवल बंद के समर्थन तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि BJD की राजनीतिक रणनीति पर भी सवाल उठने लगे हैं।
राज्य की राजनीति में BJP और BJD के बीच हाल के समय में टकराव बढ़ा है। वहीं कांग्रेस भी सरकार के खिलाफ अलग-अलग मुद्दों पर आंदोलन कर रही है।
ऐसी स्थिति में BJD के लिए दोनों दलों से दूरी बनाए रखते हुए स्वतंत्र विपक्षी पहचान बनाना एक बड़ी राजनीतिक चुनौती है।
प्रमिला मलिक के बयान ने यही संकेत देने की कोशिश की कि BJD फिलहाल न BJP के साथ है और न कांग्रेस के साथ, बल्कि अपने मुद्दों और राजनीतिक एजेंडे के आधार पर फैसले लेगी।
हालांकि BJP ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और पार्टी पर दोहरा रुख अपनाने का आरोप लगाया।
8 अक्टूबर के ओडिशा बंद से एक दिन पहले सामने आए इस विवाद ने राज्य की राजनीति का माहौल और गर्म कर दिया है।
कांग्रेस अपने बंद को सफल बनाने की कोशिश में जुटी है, जबकि BJD ने उससे दूरी बना ली है। BJP इस पूरे घटनाक्रम को BJD की राजनीतिक कमजोरी के रूप में पेश करने की कोशिश कर रही है।
फिलहाल BJD का अंतिम रुख यही है कि वह 8 अक्टूबर के ओडिशा बंद का समर्थन नहीं करेगी।
पार्टी ने स्पष्ट किया है कि वह BJP और कांग्रेस दोनों से समान दूरी बनाए रखने की नीति पर कायम है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि बंद के दिन BJD के स्थानीय नेता और कार्यकर्ता किस तरह की भूमिका निभाते हैं और पार्टी आने वाले दिनों में विपक्षी राजनीति में अपनी स्वतंत्र पहचान को किस तरह आगे बढ़ाती है।
ओडिशा बंद पर BJD के इस अचानक बदले फैसले ने एक बार फिर राज्य की राजनीति में उसके रणनीतिक रुख को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।





