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ओडिशा के नए DGP की नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला

Kavita2
11 Aug 2026 1:01 PM IST
ओडिशा के नए DGP की नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला
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भुवनेश्वर। ओडिशा के अगले डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (DGP) की नियुक्ति का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। राज्य के नए पुलिस प्रमुख के चयन के लिए ओडिशा सरकार की ओर से यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) को भेजे गए वरिष्ठ IPS अधिकारियों के पैनल को एक जनहित याचिका (PIL) के जरिए चुनौती दी गई है। DGP की नियुक्ति से जुड़ी प्रक्रिया ऐसे समय में न्यायिक जांच के दायरे में आई है, जब मौजूदा DGP वाईबी खुरानिया का कार्यकाल समाप्त होने वाला है और राज्य में नए पुलिस प्रमुख की नियुक्ति की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच रही है।

राज्य सरकार ने अगले DGP के चयन के लिए वरिष्ठ IPS अधिकारियों के नाम UPSC को भेजे हैं। प्रारंभिक स्तर पर तीन अधिकारियों का पैनल तैयार किया गया था। इसके बाद UPSC की ओर से पात्र अधिकारियों का व्यापक पैनल भेजने की सलाह दिए जाने के बाद राज्य सरकार ने 11 वरिष्ठ IPS अधिकारियों के नाम भेजे। रिपोर्टों के अनुसार, इस सूची में अलग-अलग बैच के अधिकारी शामिल हैं।

खुरानिया का कार्यकाल खत्म होने के करीब

ओडिशा के मौजूदा DGP वाईबी खुरानिया 1990 बैच के IPS अधिकारी हैं। उन्हें अगस्त 2024 में राज्य का पुलिस महानिदेशक नियुक्त किया गया था। उस समय UPSC की ओर से सुझाए गए तीन नामों में से राज्य सरकार ने खुरानिया का चयन किया था।

अब उनके कार्यकाल के समाप्त होने के साथ ही नए DGP के चयन की प्रक्रिया शुरू की गई है। पुलिस मुख्यालय की ओर से पहले तीन DGP-rank अधिकारियों के नाम राज्य सरकार को भेजे गए थे। इनमें 1990 बैच के सुधांशु सारंगी तथा 1993 बैच के सुसांत कुमार नाथ और आरपी कोचे के नाम शामिल थे।

इसके बाद राज्य सरकार ने UPSC को 11 अधिकारियों का विस्तृत पैनल भेजा। इस सूची में वरिष्ठता और पात्रता के आधार पर कई अधिकारी शामिल किए गए हैं। UPSC को इन नामों में से निर्धारित प्रक्रिया के तहत उपयुक्त अधिकारियों को शॉर्टलिस्ट करना है।

UPSC की प्रक्रिया पर टिकी नजर

DGP की नियुक्ति की प्रक्रिया में UPSC की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। राज्य सरकार की ओर से भेजे गए नामों पर आयोग विचार करता है और निर्धारित मानकों के आधार पर अधिकारियों का पैनल तैयार किया जाता है। इसके बाद राज्य सरकार UPSC की ओर से सुझाए गए अधिकारियों में से नए पुलिस प्रमुख की नियुक्ति करती है।

उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, UPSC की बैठक में ओडिशा के अगले DGP पद के लिए तीन अधिकारियों को शॉर्टलिस्ट किए जाने की प्रक्रिया निर्धारित थी।

ऐसे में PIL के जरिए पैनल को चुनौती दिए जाने से चयन प्रक्रिया पर सबकी नजरें टिक गई हैं। याचिका में किन विशेष आधारों पर पैनल को चुनौती दी गई है और याचिकाकर्ता की ओर से कौन-कौन से तर्क रखे गए हैं, इस पर सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का महत्व

DGP की नियुक्ति का मामला सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2006 के प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ मामले में दिए गए निर्देशों से भी जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस सुधारों से संबंधित अपने निर्देशों में राज्यों को DGP की नियुक्ति के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने को कहा था। DGP पद पर नियुक्ति के लिए UPSC की भूमिका इसी व्यापक प्रक्रिया का हिस्सा है।

हाल के एक मामले में भी सुप्रीम कोर्ट ने DGP नियुक्ति की प्रक्रिया में राज्यों द्वारा समय पर प्रस्ताव भेजने की आवश्यकता पर जोर दिया था। अदालत ने कहा था कि राज्यों की ओर से प्रस्ताव भेजने में देरी से योग्य और वरिष्ठ अधिकारियों के विचार किए जाने के अवसर प्रभावित हो सकते हैं।

इस पृष्ठभूमि में ओडिशा में DGP नियुक्ति को लेकर दायर PIL को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत में यह मामला आने से चयन प्रक्रिया की वैधता, पात्रता और पैनल तैयार करने के तरीके जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की संभावना है।

11 अधिकारियों के नाम भेजे गए

राज्य सरकार द्वारा भेजे गए विस्तृत पैनल में कई वरिष्ठ IPS अधिकारी शामिल हैं। रिपोर्टों के मुताबिक इसमें 1990 बैच के सुधांशु सारंगी, 1993 बैच के सुसांत कुमार नाथ और आरपी कोचे, 1994 बैच के संजीब पांडा और यशवंत कुमार जेठवा तथा 1995 और 1996 बैच के कई अधिकारी शामिल हैं।

पैनल का विस्तार इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि DGP पद के लिए अधिकारियों के चयन में वरिष्ठता के साथ-साथ सेवा रिकॉर्ड, अनुभव और निर्धारित पात्रता मानकों को ध्यान में रखा जाता है।

पुलिस नेतृत्व में बदलाव की तैयारी

ओडिशा में DGP के पद पर बदलाव ऐसे समय हो रहा है जब राज्य पुलिस के सामने कानून-व्यवस्था से लेकर साइबर अपराध, संगठित अपराध, नशीले पदार्थों की तस्करी और माओवादी गतिविधियों जैसी कई चुनौतियां हैं। मौजूदा DGP खुरानिया के कार्यकाल के दौरान पुलिस ने अपराध नियंत्रण और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर भी जोर दिया है।

राज्य पुलिस नेतृत्व में बदलाव के साथ नई प्राथमिकताओं और रणनीतियों को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। ऐसे में नए DGP की नियुक्ति को केवल प्रशासनिक बदलाव के तौर पर नहीं, बल्कि राज्य की कानून-व्यवस्था और पुलिसिंग की दिशा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

फिलहाल इस पूरी प्रक्रिया का अगला अहम पड़ाव सुप्रीम कोर्ट में PIL पर होने वाली सुनवाई और UPSC की ओर से पैनल पर लिया जाने वाला निर्णय है। यदि अदालत की ओर से चयन प्रक्रिया को लेकर कोई निर्देश जारी किया जाता है तो उसका असर नए DGP की नियुक्ति की समयसीमा पर भी पड़ सकता है।

अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सुप्रीम कोर्ट याचिका पर क्या रुख अपनाता है और UPSC राज्य सरकार की ओर से भेजे गए अधिकारियों के पैनल में से किन नामों को अंतिम शॉर्टलिस्ट में जगह देता है। ओडिशा पुलिस को जल्द ही नया प्रमुख मिलने की उम्मीद है, लेकिन PIL के बाद नियुक्ति प्रक्रिया में कानूनी पहलू भी अहम हो गया है।

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