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Bhubaneswar. भुवनेश्वर। ओडिशा विजिलेंस के अधिकारियों ने शुक्रवार को जाजपुर में एक जूनियर रेवेन्यू असिस्टेंट (जेआरए) को जमीन खरीद की मंजूरी वाली फाइल प्रोसेस करने के लिए एक आवेदक से रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। आरोपी सरकारी कर्मचारी की पहचान प्रसन्ना कुमार साहनी के तौर पर हुई है, जो अभी जाजपुर सब-कलेक्टर के ऑफिस में तैनात हैं। विजिलेंस अधिकारियों के मुताबिक, शिकायतकर्ता ने 29 नवंबर, 2025 को अपनी मां के नाम पर अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग के मालिक से 16 डेसिमल जमीन खरीदने के लिए कानूनी मंजूरी की अर्जी दी थी। राज्य सरकार के नियमों के अनुसार, एससी या एसटी समुदायों के लोगों की जमीन खरीदने से पहले संबंधित राजस्व अधिकारी से मंजूरी लेना जरूरी है।
आरोप है कि साहनी ने बिना किसी ठोस वजह के फाइल प्रोसेस करने में देरी की। बार-बार कहने और फॉलो-अप करने के बाद, उन्होंने जमीन के हर डेसिमल के लिए 3,000 रुपए के हिसाब से कुल 48,000 रुपए की रिश्वत मांगी। जब आवेदक ने इतनी रकम का इंतजाम करने में असमर्थता जताई, तो साहनी ने अपनी मांग घटाकर 40,000 रुपए कर दी। लगातार की जा रही इस मांग से परेशान होकर, आवेदक ने भ्रष्टाचार-रोधी एजेंसी में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। शिकायत पर कार्रवाई करते हुए, विजिलेंस ने 25 सितंबर को एक जाल बिछाया। साहनी को उनके ऑफिस में 40,000 रुपए नकद मांगते और लेते हुए पकड़ा गया।
अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी में रिश्वत की पूरी रकम बरामद कर जब्त कर ली। उनके केमिकल हैंड-वॉश टेस्ट का नतीजा भी पॉजिटिव आया। ट्रैप के बाद, विजिलेंस टीमों ने साहनी के ऑफिस चैंबर और जाजपुर सदर पुलिस इलाके में गोबिंदापुर स्थित उनके घर पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। कटक विजिलेंस पुलिस स्टेशन में भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2018 की धारा 7 के तहत एक मामला (37/26) दर्ज किया गया है।
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