
पुरी: ओडिशा के पुरी में चल रही विश्व प्रसिद्ध सालाना रथ यात्रा के दूसरे दिन शुक्रवार को श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखने को मिला। भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के विशाल रथों को भक्तों और पुलिसकर्मियों ने ग्रैंड रोड यानी बड़ादांडा पर खींचते हुए गुंडिचा मंदिर के सामने तक पहुंचाया।
रथ यात्रा के पहले दिन सूर्यास्त के बाद रथ खींचने की प्रक्रिया रोक दी गई थी। इसके बाद शुक्रवार सुबह फिर से विधि-विधान के साथ रथों को आगे बढ़ाने का कार्य शुरू किया गया। हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में तीनों रथ अपने निर्धारित स्थान तक पहुंचे।
दूसरे दिन पूरी हुई रथ यात्रा की महत्वपूर्ण प्रक्रिया
रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा तीन अलग-अलग विशाल रथों पर सवार होकर श्रीमंदिर से गुंडिचा मंदिर की ओर प्रस्थान करते हैं। इस यात्रा को धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
शुक्रवार को रथ खींचने की प्रक्रिया दोबारा शुरू होने के बाद भक्तों ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ रथों को आगे बढ़ाया। पुलिसकर्मियों और श्रद्धालुओं ने मिलकर तीनों रथों को बड़ादांडा से होते हुए गुंडिचा मंदिर के सामने पहुंचाया।
पहले दिन सूर्यास्त के बाद रोक दी गई थी यात्रा
रथ यात्रा के पहले दिन गुरुवार को रथों को खींचने का कार्यक्रम शुरू हुआ था, लेकिन सूर्यास्त के बाद धार्मिक परंपरा के अनुसार रथ खींचने की प्रक्रिया रोक दी गई थी।
गुरुवार को भगवान बलभद्र का रथ ‘तालध्वज’ सबसे अधिक दूरी तक आगे बढ़ा था। यह रथ बड़ादांडा पर बीच रास्ते में रुक गया था। वहीं, देवी सुभद्रा का रथ ‘दर्पदलन’ म्युनिसिपल मार्केट के पास रुक गया था।
भगवान जगन्नाथ का रथ ‘नंदीघोष’ पहले दिन अपेक्षाकृत कम दूरी तक पहुंच पाया था और रथ खींचने का काम रोक दिया गया था।
शुक्रवार को रथों ने पूरा किया सफर
शुक्रवार सुबह जैसे ही रथ यात्रा दोबारा शुरू हुई, श्रद्धालुओं में उत्साह बढ़ गया। भक्तों ने जयकारों के बीच रस्सियों को खींचकर रथों को आगे बढ़ाया।
कुछ समय बाद तीनों रथ सफलतापूर्वक गुंडिचा मंदिर के सामने पहुंच गए। इस दौरान पूरे मार्ग पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे और धार्मिक माहौल बना रहा।
लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है रथ यात्रा
पुरी की रथ यात्रा भारत के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक है। हर साल देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु इस उत्सव में शामिल होने के लिए पुरी पहुंचते हैं।
मान्यता है कि इस दौरान भगवान जगन्नाथ अपने भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा के साथ गुंडिचा मंदिर जाते हैं। यह यात्रा भगवान के भक्तों के लिए आस्था और भक्ति का विशेष अवसर मानी जाती है।
सुरक्षा और व्यवस्था के रहे विशेष इंतजाम
इतने बड़े धार्मिक आयोजन को देखते हुए प्रशासन की ओर से व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई है। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने यातायात, सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष इंतजाम किए हैं।
रथ यात्रा के पूरे मार्ग पर सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो और आयोजन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके।
धार्मिक परंपराओं के साथ आगे बढ़ा उत्सव
रथ यात्रा के दौरान कई पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान भी किए जाते हैं। भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के रथों को खींचना भक्तों के लिए पुण्य कार्य माना जाता है।
भक्तों का मानना है कि रथ यात्रा में शामिल होने और भगवान के दर्शन करने से विशेष आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है।
गुंडिचा मंदिर पहुंचने का है विशेष महत्व
गुंडिचा मंदिर भगवान जगन्नाथ की मौसी का घर माना जाता है और रथ यात्रा के दौरान भगवान यहां कुछ दिनों के लिए विराजमान होते हैं। इस वजह से रथों का गुंडिचा मंदिर पहुंचना यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है।
शुक्रवार को तीनों रथों के गुंडिचा मंदिर के सामने पहुंचने के साथ ही रथ यात्रा का एक प्रमुख चरण पूरा हो गया।
कुल मिलाकर, पुरी रथ यात्रा के दूसरे दिन श्रद्धा, उत्साह और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। हजारों भक्तों की मौजूदगी में भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के रथ गुंडिचा मंदिर तक पहुंचे और धार्मिक उत्सव ने एक बार फिर अपनी भव्यता दिखाई।





