
भुवनेश्वर। बंगाल की खाड़ी में विकसित हो रहे संभावित चक्रवाती तूफान 'अर्नब' को लेकर ओडिशा सरकार सतर्क हो गई है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने शनिवार को राज्य की तैयारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा की और अधिकारियों को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि संभावित चक्रवात के दौरान लोगों की जान बचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। उन्होंने संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, राहत शिविरों की व्यवस्था करने और आपातकालीन सेवाओं को सक्रिय रखने पर विशेष जोर दिया। बंगाल की खाड़ी में बन रहे मौसम तंत्र के कारण दक्षिणी ओडिशा और तटीय जिलों में भारी बारिश तथा तेज हवाएं चलने की आशंका जताई गई है।
बंगाल की खाड़ी में तेजी से बदल रहा मौसम
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के पूर्वानुमान के अनुसार, पूर्वी-मध्य बंगाल की खाड़ी और उससे सटे दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना स्पष्ट निम्न दबाव का क्षेत्र धीरे-धीरे मजबूत हो रहा है।
शनिवार को इस मौसम प्रणाली के अवदाब में बदलने की संभावना जताई गई है। इसके बाद 25 अक्टूबर तक यह गहरे अवदाब में बदल सकता है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, अनुकूल परिस्थितियां बनी रहने पर 26 अक्टूबर की सुबह तक यह प्रणाली चक्रवाती तूफान का रूप ले सकती है।
हालांकि, किसी भी चक्रवात की वास्तविक तीव्रता और दिशा मौसम की परिस्थितियों के अनुसार बदल सकती है। इसलिए मौसम विभाग के आगामी बुलेटिन महत्वपूर्ण होंगे।
28 अक्टूबर तक आंध्र प्रदेश तट के करीब पहुंचने की संभावना
मौसम विभाग के अनुसार, यह मौसम प्रणाली पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ सकती है।
पूर्वानुमान है कि 28 अक्टूबर की सुबह के आसपास यह आंध्र प्रदेश तट के नजदीक पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में पहुंच सकती है।
इस दौरान समुद्र में तेज हवाएं और ऊंची लहरें उठने की आशंका रहेगी। चक्रवाती गतिविधियों के कारण तटीय क्षेत्रों में मौसम तेजी से बदल सकता है।
ओडिशा सरकार ने इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए समय रहते तैयारियां शुरू कर दी हैं।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दिए विशेष निर्देश
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिया कि संभावित चक्रवात से प्रभावित होने वाले क्षेत्रों में लोगों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
उन्होंने विशेष रूप से संवेदनशील और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारियों पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने को कहा, ताकि आपात स्थिति में राहत और बचाव कार्य तत्काल शुरू किए जा सकें।
सभी 30 जिलों को अलर्ट रहने के निर्देश
ओडिशा के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी के अनुसार, राज्य के सभी 30 जिलों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
विशेष रूप से 16 तटीय और दक्षिणी जिलों के जिलाधिकारियों को आवश्यक एहतियाती कदम उठाने के लिए कहा गया है।
गंजाम, गजपति, पुरी और खुर्दा जिलों में सरकारी कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं। इन जिलों में संभावित भारी बारिश और तेज हवाओं को देखते हुए प्रशासनिक तैयारियों को प्राथमिकता दी जा रही है।
27 से 29 अक्टूबर तक भारी बारिश का खतरा
मौसम विभाग के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र के अनुसार, संभावित चक्रवात के प्रभाव से 27 अक्टूबर को तटीय ओडिशा में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है।
28 अक्टूबर को उत्तरी आंध्र प्रदेश और ओडिशा के कुछ हिस्सों में अत्यधिक भारी बारिश की आशंका है। कुछ स्थानों पर 24 घंटे के भीतर 20 सेंटीमीटर से अधिक वर्षा हो सकती है।
इसके अलावा पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार के कुछ हिस्सों में भी 28 और 29 अक्टूबर के दौरान भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है।
एनडीआरएफ और बचाव दल अलर्ट
संभावित चक्रवात से निपटने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), ओडिशा आपदा त्वरित कार्रवाई बल और अग्निशमन विभाग की टीमों को तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।
राज्य सरकार का उद्देश्य जरूरत पड़ने पर प्रभावित क्षेत्रों में तुरंत राहत और बचाव अभियान शुरू करना है।
जिला प्रशासन को परिस्थितियों के अनुसार स्कूलों और कॉलेजों को बंद करने का निर्णय लेने का अधिकार भी दिया गया है।
इसके साथ ही संभावित प्रभावित क्षेत्रों में राहत केंद्रों और आवश्यक सुविधाओं की तैयारियों पर ध्यान दिया जा रहा है।
मछुआरों को समुद्र से लौटने की सलाह
समुद्र में संभावित खराब मौसम को देखते हुए मछुआरों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
जो मछुआरे पहले से गहरे समुद्र में हैं, उन्हें तट पर लौटने के लिए कहा गया है। बड़े ट्रॉलरों और समुद्री जहाजों के संचालकों को भी सतर्क किया गया है।
मौसम विभाग ने बंदरगाह प्राधिकरणों, समुद्री परिवहन सेवाओं और तटीय उद्योगों को आवश्यक सुरक्षा उपाय अपनाने की सलाह दी है।
तटीय इलाकों में बढ़ाई गई निगरानी
संभावित चक्रवात के कारण पुरी, गंजाम और गजपति जिलों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
इसके अलावा भद्रक, केंद्रपाड़ा, जगतसिंहपुर, बालासोर, मयूरभंज, रायगढ़ा, कोरापुट, मलकानगिरी और कालाहांडी सहित कई जिलों में बारिश को लेकर सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार ने जिला प्रशासन से स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार आवश्यक कदम उठाने को कहा है।
चक्रवात बनने के बाद मिलेगा 'अर्नब' नाम
मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में विकसित हो रही इस प्रणाली के चक्रवाती तूफान में बदलने पर इसका नाम 'अर्नब' रखा जाएगा।
यह नाम बांग्लादेश की ओर से प्रस्तावित किया गया है। फिलहाल मौसम प्रणाली चक्रवात की श्रेणी में नहीं पहुंची है।
आगामी दिनों में इसकी तीव्रता और दिशा के बारे में अधिक स्पष्ट जानकारी मिलने की उम्मीद है।
सरकार का लक्ष्य जनहानि रोकना
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने अधिकारियों को संभावित चक्रवात के प्रभाव को कम करने के लिए हर जरूरी कदम उठाने को कहा है।
सरकार ने लोगों की सुरक्षा, समय पर चेतावनी, सुरक्षित निकासी और आपातकालीन सेवाओं को प्राथमिकता दी है।
फिलहाल ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में मौसम विभाग के आगामी पूर्वानुमानों पर नजर रखी जा रही है। 26 अक्टूबर तक चक्रवात बनने की संभावना और 28 अक्टूबर के आसपास तट के करीब पहुंचने के अनुमान को देखते हुए प्रशासन अलर्ट है।





