
सुंदरगढ़। ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले में सर्पदंश की घटनाओं ने लोगों को झकझोर कर रख दिया है। गुरुंडिया ब्लॉक के हाथीओड़ा गांव में सांप के काटने से दो मासूम भाई-बहन की दर्दनाक मौत हो गई। मृतकों की पहचान 10 वर्षीय समीर हरो और उसकी 7 वर्षीय छोटी बहन सायरन हरो के रूप में हुई है। एक ही परिवार के दो बच्चों की मौत से गांव में शोक की लहर दौड़ गई है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
इसी बीच जिले में सर्पदंश की एक अन्य घटना में दादा और पोती की भी मौत होने की जानकारी सामने आई है। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने ग्रामीण इलाकों में सांपों के खतरे और समय पर इलाज की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
हाथीओड़ा गांव में मातम
गुरुंडिया ब्लॉक के हाथीओड़ा गांव में समीर और सायरन की मौत की खबर सामने आने के बाद पूरे गांव में मातम छा गया। दोनों भाई-बहन की उम्र बेहद कम थी। परिवार के लिए यह घटना किसी बड़े सदमे से कम नहीं है।
ग्रामीणों के मुताबिक, सर्पदंश जैसी घटनाएं बरसात के मौसम में ग्रामीण इलाकों में अधिक चिंता का कारण बन जाती हैं। बारिश के दौरान सांप अपने ठिकानों से निकलकर घरों, खेतों और आसपास के इलाकों में पहुंच सकते हैं। ऐसे में ग्रामीणों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है।
समीर और सायरन की मौत ने परिवार के साथ-साथ पूरे गांव को गहरे दुख में डाल दिया है। परिजन इस घटना से सदमे में हैं और बच्चों को खोने का दर्द उनके लिए बेहद असहनीय है।
एक और घटना में दादा-पोती की मौत
सुंदरगढ़ जिले में ही सर्पदंश से दादा और पोती की मौत की दूसरी घटना ने चिंता को और बढ़ा दिया है। इस घटना के बाद भी इलाके में शोक का माहौल है।
एक के बाद एक सर्पदंश से मौत की घटनाओं ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था की अहमियत को सामने ला दिया है। सांप के काटने के बाद मरीज को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि कई जहरीले सांपों के विष का असर तेजी से शरीर में फैल सकता है।
ग्रामीण इलाकों में अस्पताल तक पहुंचने में देरी, परिवहन की समस्या और जागरूकता की कमी कई बार स्थिति को गंभीर बना सकती है।
बारिश के मौसम में बढ़ता खतरा
बरसात के दौरान सांपों के घरों और आबादी वाले इलाकों में आने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। खेतों, झाड़ियों, लकड़ी के ढेर और घर के आसपास के अंधेरे स्थानों में सांप छिप सकते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में मिट्टी या कच्चे मकानों में रहने वाले परिवारों के लिए यह खतरा और बढ़ जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, रात के समय घर से बाहर निकलते वक्त रोशनी का इस्तेमाल करना, जमीन पर सोने से बचना और घर के आसपास साफ-सफाई रखना जरूरी है। जूते या कपड़े पहनने से पहले उन्हें अच्छी तरह जांच लेना भी सावधानी का हिस्सा है।
सर्पदंश के बाद झाड़-फूंक से बचने की जरूरत
सर्पदंश के मामलों में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पीड़ित को जल्द से जल्द चिकित्सा केंद्र पहुंचाया जाए। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी कई लोग सांप के काटने के बाद झाड़-फूंक या पारंपरिक उपचार का सहारा लेते हैं। इससे अस्पताल पहुंचने में देरी हो सकती है और मरीज की हालत गंभीर होने का खतरा बढ़ जाता है।
सांप के काटने की स्थिति में घाव को काटना, उसका जहर चूसने की कोशिश करना या किसी तरह का घरेलू रसायन लगाने जैसे उपाय नुकसानदायक हो सकते हैं। मरीज को शांत रखते हुए जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाना अधिक सुरक्षित कदम है।
जागरूकता और स्वास्थ्य व्यवस्था पर जोर जरूरी
सुंदरगढ़ जैसे बड़े ग्रामीण क्षेत्र में सर्पदंश से जुड़ी घटनाओं को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की ओर से जागरूकता अभियान महत्वपूर्ण हो सकते हैं। ग्रामीणों को यह जानकारी दी जानी चाहिए कि जहरीले सांप के काटने के बाद कौन से कदम उठाने हैं और किस तरह तुरंत चिकित्सा सहायता हासिल करनी है।
इसके साथ ही ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों में आवश्यक उपचार सुविधाओं की उपलब्धता भी सुनिश्चित करना जरूरी है। समय पर इलाज मिलने से कई सर्पदंश पीड़ितों की जान बचाई जा सकती है।
दो परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़
हाथीओड़ा गांव में समीर और सायरन की मौत ने एक परिवार से उसके दो मासूम बच्चों को छीन लिया। दूसरी घटना में दादा और पोती की मौत ने भी परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है।
लगातार हुई इन घटनाओं ने इलाके में सर्पदंश को लेकर भय और चिंता पैदा कर दी है। ग्रामीण अब सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं और प्रशासन से ऐसे मामलों में तत्काल चिकित्सा सहायता तथा जागरूकता बढ़ाने की उम्मीद कर रहे हैं।
फिलहाल इन दर्दनाक घटनाओं के बाद सुंदरगढ़ में लोगों के बीच सावधानी और जागरूकता बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है। खासकर बारिश के मौसम में ग्रामीणों को घर और आसपास के इलाकों में सतर्क रहने तथा सर्पदंश की स्थिति में बिना समय गंवाए अस्पताल पहुंचने की सलाह दी जा रही है।





