
चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के चंडीगढ़ स्थित कैंप ऑफिस पर केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI की तलाशी के बाद राज्य की राजनीति में बड़ा घमासान छिड़ गया है। आम आदमी पार्टी ने कार्रवाई को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश बताया है, जबकि भाजपा, कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल ने इसे अदालत के आदेश पर शुरू हुई जांच बताते हुए सरकार से जवाब मांगा है।
CBI ने मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामले में मुख्यमंत्री के OSD राजबीर सिंह घुमन और अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। इसके बाद एजेंसी ने मंगलवार को आठ स्थानों पर तलाशी ली, जिनमें चंडीगढ़ स्थित मुख्यमंत्री का कैंप ऑफिस भी शामिल था। इसके अलावा संगरूर, मोहाली, पटियाला, जालंधर, लुधियाना और गुरदासपुर से जुड़े परिसरों में भी कार्रवाई की गई। जांच एजेंसी ने लैपटॉप, मोबाइल फोन और कई दस्तावेज अपने कब्जे में लेने की जानकारी दी है।
इस मामले की पृष्ठभूमि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश से जुड़ी है। हाईकोर्ट ने 5 अक्टूबर को मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े अधिकारियों और कुछ निजी व्यक्तियों पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की CBI जांच का निर्देश दिया था। अदालत ने एजेंसी से दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट पेश करने को भी कहा है। आरोप प्रवर्तन निदेशालय की ओर से पंजाब पुलिस को भेजी गई जानकारी पर आधारित हैं, जिसमें ट्रांसफर-पोस्टिंग, सरकारी फैसलों, टेंडर और अन्य प्रशासनिक कामों को प्रभावित करने के बदले कथित रिश्वत के आरोप लगाए गए हैं।
CBI की कार्रवाई के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भाजपा और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने पंजाब विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है और इसके लिए केंद्रीय जांच एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। मान ने कहा कि उनकी सरकार और आम आदमी पार्टी को बदनाम करने के लिए CBI और ED जैसी एजेंसियों का सहारा लिया जा रहा है। यह मुख्यमंत्री का राजनीतिक आरोप है, जबकि CBI की जांच हाईकोर्ट के आदेश पर शुरू हुई है।
मान ने संकेत दिया कि आने वाले समय में जांच एजेंसियों की और कार्रवाइयां हो सकती हैं। AAP नेताओं का कहना है कि पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ पार्टी के नेतृत्व को निशाना बनाया जा रहा है। पार्टी ने कहा कि वह जांच से डरने वाली नहीं है और राजनीतिक रूप से इसका मुकाबला करेगी।
दूसरी ओर भाजपा ने AAP के आरोपों को खारिज किया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि जांच सीधे किसी राजनीतिक पार्टी के निर्देश पर नहीं, बल्कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के बाद शुरू हुई है। पार्टी ने मुख्यमंत्री से आरोपों पर जवाब देने और जांच में सहयोग करने की मांग की है।
कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल ने भी भगवंत मान सरकार को घेरा है। विपक्षी दलों का कहना है कि अगर मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े अधिकारियों पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं तो इस मामले की स्वतंत्र जांच जरूरी है। कुछ विपक्षी नेताओं ने मुख्यमंत्री से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ने तक की मांग की है। पंजाब में इस मामले के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बयानबाजी और तेज हो गई है।
इस बीच पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट के CBI जांच के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। राज्य सरकार ने विशेष अनुमति याचिका दाखिल कर दलील दी है कि राज्य प्रशासन से जुड़े मामलों में सीधे CBI जांच का आदेश संघीय ढांचे से जुड़े सवाल खड़े करता है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की याचिका पर शीघ्र सुनवाई के अनुरोध पर विचार करने की सहमति जताई है।
मामले में सबसे प्रमुख नाम मुख्यमंत्री के OSD राजबीर सिंह घुमन का है। ED की ओर से पहले दी गई जानकारी में घुमन और उनके कथित सहयोगियों पर सरकारी अधिकारियों के तबादले और पोस्टिंग, भूमि उपयोग से जुड़े फैसलों, टेंडर और अन्य सरकारी प्रक्रियाओं को प्रभावित करने के आरोप लगाए गए थे। इन आरोपों की अभी न्यायिक रूप से पुष्टि नहीं हुई है और CBI जांच इन्हीं दावों की सच्चाई का पता लगाने के लिए चल रही है।
AAP के लिए यह घटनाक्रम राजनीतिक रूप से अहम समय पर आया है। पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 में होने हैं और पार्टी ने भगवंत मान को अपने प्रमुख चेहरे के रूप में आगे रखा है। ऐसे में मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े अधिकारियों पर जांच ने राज्य की सियासत को और गर्म कर दिया है।
विपक्ष इस पूरे घटनाक्रम को सरकार की जवाबदेही से जोड़ रहा है, जबकि AAP इसे केंद्र और भाजपा की राजनीतिक रणनीति बता रही है। यही कारण है कि CBI की कार्रवाई अब केवल कानूनी जांच तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि अगले विधानसभा चुनाव से पहले बड़े राजनीतिक मुद्दे में बदलती दिख रही है।
फिलहाल CBI ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक एजेंसी को अपनी रिपोर्ट दो महीने में देनी है। वहीं पंजाब सरकार सुप्रीम कोर्ट में इस जांच के आदेश को चुनौती दे चुकी है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सुप्रीम कोर्ट क्या रुख अपनाता है और CBI की जांच में आगे क्या तथ्य सामने आते हैं।
भगवंत मान के कैंप ऑफिस पर हुई कार्रवाई ने पंजाब में चुनाव से पहले राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। एक तरफ AAP केंद्रीय एजेंसियों के कथित दुरुपयोग का मुद्दा उठा रही है, तो दूसरी तरफ भाजपा, कांग्रेस और अकाली दल भ्रष्टाचार के आरोपों पर सरकार से जवाब मांग रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मामला पंजाब की राजनीति के प्रमुख मुद्दों में बने रहने की संभावना है।





