पंजाब

डेटिंग और मैट्रिमोनियल ऐप्स पर फर्जी प्रोफाइल से ठगी का खतरा

Kavita2
7 Aug 2026 11:42 AM IST
डेटिंग और मैट्रिमोनियल ऐप्स पर फर्जी प्रोफाइल से ठगी का खतरा
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पंजाब : डिजिटल दौर में रिश्ते तलाशने के लिए डेटिंग और मैट्रिमोनियल ऐप्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है, लेकिन इसी का फायदा साइबर ठग भी उठा रहे हैं। फर्जी प्रोफाइल बनाकर लोगों से दोस्ती और भरोसा कायम करने के बाद ठगी करने वाले गिरोह सक्रिय हैं। पुलिस के अनुसार, ऐसे मामलों में बदमाश भावनात्मक जुड़ाव का सहारा लेकर पीड़ितों से पैसे ऐंठते हैं और जब तक सच्चाई सामने आती है, तब तक काफी नुकसान हो चुका होता है।

जांच में सामने आया है कि साइबर ठग खासतौर पर डेटिंग और शादी से जुड़े प्लेटफॉर्म पर नकली पहचान बनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। वे आकर्षक प्रोफाइल तैयार करते हैं, जिसमें झूठी तस्वीरें, गलत जानकारी और फर्जी पहचान का इस्तेमाल किया जाता है। बातचीत शुरू होने के बाद धीरे-धीरे पीड़ित का भरोसा जीता जाता है और फिर किसी मजबूरी या जरूरत का हवाला देकर आर्थिक मदद मांगी जाती है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, कई मामलों में ठग खुद को विदेश में रहने वाला भारतीय यानी NRI बताकर लोगों को प्रभावित करते हैं। वे दावा करते हैं कि वे अच्छी नौकरी या कारोबार करते हैं और जल्द ही भारत आकर शादी करने वाले हैं। इसी बहाने वे पीड़ितों के साथ भावनात्मक संबंध बनाते हैं और बाद में पैसों की मांग शुरू कर देते हैं।

अधिकारियों ने बताया कि ऐसे मामलों में ठग कभी मेडिकल इमरजेंसी, कभी यात्रा संबंधी समस्या तो कभी किसी जरूरी भुगतान का बहाना बनाकर पैसे मांगते हैं। कुछ मामलों में वे महंगे गिफ्ट या विदेश से भेजे गए सामान की डिलीवरी के नाम पर भी लोगों से रकम वसूलते हैं।

पुलिस को इस तरह की ठगी से जुड़ी करीब 12 शिकायतें मिली हैं। इन शिकायतों के आधार पर जांच शुरू कर दी गई है और ऐसे गिरोहों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इन फर्जी प्रोफाइल को कौन संचालित कर रहा है और ठगी के लिए किन तरीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि ऑनलाइन रिश्तों में जल्द भरोसा करना लोगों के लिए जोखिम भरा हो सकता है। ठग अक्सर मनोवैज्ञानिक तरीके अपनाते हैं और पीड़ितों को भावनात्मक रूप से जोड़ने के बाद धोखाधड़ी करते हैं। वे बातचीत के दौरान पीड़ित की निजी जानकारी जुटाते हैं और उसी के आधार पर अपनी रणनीति बनाते हैं।

विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि डेटिंग या मैट्रिमोनियल ऐप्स पर किसी भी व्यक्ति से बातचीत करते समय सावधानी बरतनी चाहिए। बिना पूरी जांच के किसी भी व्यक्ति को निजी जानकारी, बैंक डिटेल, ओटीपी या आर्थिक सहायता नहीं देनी चाहिए।

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर मिलने वाले अनजान लोगों पर तुरंत भरोसा न करें। यदि कोई व्यक्ति बार-बार पैसे की मांग करता है या अपनी पहचान को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं देता है तो सतर्क हो जाना चाहिए।

जांच एजेंसियां ऐसे मामलों में डिजिटल सबूतों की मदद ले रही हैं। फर्जी मोबाइल नंबर, सोशल मीडिया अकाउंट, बैंक ट्रांजेक्शन और अन्य ऑनलाइन गतिविधियों की जांच की जा रही है ताकि आरोपियों तक पहुंचा जा सके।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराधी लगातार नए तरीके अपना रहे हैं। पहले जहां ठगी के लिए कॉल और मैसेज का इस्तेमाल होता था, वहीं अब सोशल और रिलेशनशिप प्लेटफॉर्म भी अपराधियों के निशाने पर हैं।

महिलाओं को निशाना बनाने वाले ऐसे मामलों में ठग अक्सर खुद को सफल पेशेवर या विदेश में रहने वाला व्यक्ति बताते हैं। शादी का भरोसा दिलाकर वे पीड़ितों को लंबे समय तक बातचीत में उलझाए रखते हैं और सही समय देखकर आर्थिक नुकसान पहुंचाते हैं।

साइबर अपराध से बचने के लिए जागरूकता और सतर्कता को सबसे बड़ा हथियार माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी ऑनलाइन रिश्ते को वास्तविक जीवन में स्वीकार करने से पहले व्यक्ति की पहचान और जानकारी की पुष्टि करना जरूरी है।

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि यदि वे इस तरह की ठगी का शिकार होते हैं तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन या संबंधित थाने में शिकायत दर्ज कराएं। समय पर शिकायत मिलने से जांच एजेंसियों को कार्रवाई करने और रकम की रिकवरी की संभावना बढ़ जाती है।

डेटिंग और मैट्रिमोनियल ऐप्स पर बढ़ रहे फर्जी प्रोफाइल के मामलों ने एक बार फिर डिजिटल सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में ऑनलाइन रिश्तों में सावधानी बरतना और किसी भी आर्थिक लेनदेन से पहले पूरी जांच करना बेहद जरूरी हो गया है।

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