
x
निजी अस्पताल में इलाज की मांग
चंडीगढ़: पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में दोषी बलवंत सिंह राजोआना को निजी अस्पताल में इलाज कराने की अनुमति नहीं मिली है। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने निजी अस्पताल में इलाज कराने संबंधी उनकी मांग को खारिज करते हुए उन्हें चिकित्सा जांच और उपचार के लिए पीजीआई चंडीगढ़ रेफर करने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि राजोआना को आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं सरकारी चिकित्सा संस्थान में उपलब्ध कराई जाएं।
राजोआना की ओर से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का हवाला देते हुए निजी अस्पताल में उपचार कराने की अनुमति मांगी गई थी। याचिका में बेहतर और विशेष चिकित्सा सुविधा की जरूरत बताते हुए निजी अस्पताल में इलाज की मांग की गई। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के सामने उनकी स्वास्थ्य स्थिति और उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं से जुड़े पहलुओं को रखा गया। हाई कोर्ट ने मामले पर विचार करने के बाद निजी अस्पताल में उपचार की मांग स्वीकार नहीं की। इसके बजाय राजोआना को पीजीआई चंडीगढ़ भेजने का निर्देश दिया गया। पीजीआई देश के प्रमुख सरकारी चिकित्सा संस्थानों में शामिल है और यहां विभिन्न गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर और आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं।
PGI में होगी स्वास्थ्य की जांच
अदालत के आदेश के बाद राजोआना को पीजीआई में विशेषज्ञ चिकित्सकों के सामने पेश किया जाएगा। डॉक्टर उनकी स्वास्थ्य स्थिति का परीक्षण करेंगे और जरूरत के अनुसार आगे के इलाज का फैसला करेंगे। यदि किसी विशेष जांच या उपचार की आवश्यकता होगी तो मेडिकल टीम उसके अनुसार प्रक्रिया आगे बढ़ाएगी। जेल में बंद कैदियों के इलाज के मामले में जेल प्रशासन और संबंधित सरकार की जिम्मेदारी होती है कि जरूरत पड़ने पर उन्हें उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। गंभीर बीमारी या विशेषज्ञ चिकित्सा की आवश्यकता होने पर कैदी को बड़े सरकारी अस्पताल या चिकित्सा संस्थान में रेफर किया जा सकता है।
निजी अस्पताल जाने की मांगी थी अनुमति
राजोआना की ओर से अदालत में निजी अस्पताल में इलाज की अनुमति मांगी गई थी। हालांकि हाई कोर्ट ने सरकारी चिकित्सा संस्थान में इलाज को पर्याप्त मानते हुए उन्हें पीजीआई भेजने का रास्ता चुना। अदालत के फैसले के बाद अब उनकी चिकित्सा जांच पीजीआई के विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में होगी। राजोआना लंबे समय से जेल में बंद हैं। समय-समय पर उनकी सजा और अन्य कानूनी मुद्दों को लेकर विभिन्न अदालतों में सुनवाई होती रही है। स्वास्थ्य से जुड़ी मौजूदा याचिका भी इसी क्रम में अदालत के सामने पहुंची थी।
बेअंत सिंह हत्याकांड में दोषी हैं राजोआना
बलवंत सिंह राजोआना पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की 1995 में हुई हत्या के मामले में दोषी हैं। बेअंत सिंह की चंडीगढ़ स्थित पंजाब सिविल सचिवालय के बाहर हुए बम धमाके में मौत हो गई थी। इस हमले में कई अन्य लोगों की भी जान गई थी। मामले की जांच और लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद राजोआना को दोषी ठहराया गया और मौत की सजा सुनाई गई थी। उनकी दया याचिका और सजा से संबंधित मुद्दा भी लंबे समय से कानूनी और राजनीतिक चर्चा का विषय रहा है।
स्वास्थ्य सुविधा देना प्रशासन की जिम्मेदारी
जेल में बंद व्यक्ति को भी आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रावधान है। यदि जेल अस्पताल में जरूरी इलाज उपलब्ध नहीं हो तो मरीज को उच्च चिकित्सा संस्थान में भेजा जा सकता है। इसी व्यवस्था के तहत अदालतें कई मामलों में कैदियों की स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए मेडिकल जांच या उपचार के आदेश देती हैं।
राजोआना के मामले में हाई कोर्ट ने निजी अस्पताल की मांग स्वीकार करने के बजाय पीजीआई जैसे सरकारी संस्थान में इलाज कराने का निर्देश दिया है। इससे उन्हें विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो सकेगी और इलाज की प्रक्रिया संस्थागत निगरानी में होगी। फिलहाल अदालत के आदेश के अनुसार राजोआना को पीजीआई रेफर किया जाएगा। वहां डॉक्टरों की टीम उनकी जांच कर स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर आगे के उपचार का निर्णय करेगी। हाई कोर्ट के इस आदेश से निजी अस्पताल में इलाज कराने की उनकी मांग पर फिलहाल विराम लग गया है।
Next Story





