पंजाब

आर्यन गुप्ता क्यों बनना चाहते हैं ऑन्कोलॉजिस्ट?

Saba Naaz
17 July 2026 3:09 PM IST
आर्यन गुप्ता क्यों बनना चाहते हैं ऑन्कोलॉजिस्ट?
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पंजाब: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए आयोजित होने वाली प्रतिष्ठित परीक्षा NEET-UG 2026 के परिणाम जारी कर दिए हैं। इस बार परीक्षा में पंजाब के लुधियाना निवासी आर्यन गुप्ता ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देशभर में टॉप किया है। आर्यन ने 720 में से 715 अंक हासिल कर ऑल इंडिया रैंक-1 प्राप्त की है। उनकी सफलता की कहानी सिर्फ मेहनत और लगन की नहीं है, बल्कि इसमें एक भावुक वजह भी छिपी है, जिसने उन्हें डॉक्टर बनने के लिए प्रेरित किया।

17 वर्षीय आर्यन गुप्ता लुधियाना के सराभा नगर स्थित सेक्रेड हार्ट कॉन्वेंट स्कूल के छात्र रहे हैं। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा CBSE बोर्ड से पूरी की। पढ़ाई में शुरू से ही बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले आर्यन ने 12वीं कक्षा की मेडिकल स्ट्रीम में 98.4 प्रतिशत अंक हासिल किए थे। इसके अलावा वह पढ़ाई के साथ-साथ खेलों में भी सक्रिय रहे हैं और स्टेट लेवल टेबल टेनिस खिलाड़ी भी रह चुके हैं।

आर्यन का डॉक्टर बनने का सपना बचपन में ही तय हो गया था। जब वह केवल तीन साल के थे, तब उनकी दादी का कैंसर के कारण निधन हो गया था। इस घटना का उनके मन पर गहरा असर पड़ा। आर्यन ने बताया कि उनके परिवार में कई लोग डॉक्टर हैं, लेकिन इसके बावजूद उनकी दादी को बचाया नहीं जा सका। इसी घटना के बाद उन्होंने छठी कक्षा में ही फैसला कर लिया था कि वह भविष्य में डॉक्टर बनेंगे और कैंसर मरीजों के इलाज के लिए काम करेंगे।

आर्यन का सपना अब एक ऑन्कोलॉजिस्ट (कैंसर विशेषज्ञ डॉक्टर) बनने का है। उनका मानना है कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों को बेहतर इलाज और नई उम्मीद देने के लिए वह इस क्षेत्र में जाना चाहते हैं। दादी को खोने का दर्द ही उनके लिए आगे बढ़ने की सबसे बड़ी प्रेरणा बन गया।

आर्यन का पूरा परिवार भी चिकित्सा क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। उनके पिता डॉ. सचिन गुप्ता एनेस्थिसियोलॉजिस्ट हैं, जबकि उनकी मां डॉ. रीनू गुप्ता गायनेकोलॉजिस्ट हैं। इसके अलावा उनके बड़े भाई आदित्य गुप्ता ने भी NEET-UG 2025 में शानदार प्रदर्शन करते हुए ऑल इंडिया रैंक-54 हासिल की थी। परिवार में डॉक्टरों का माहौल होने के कारण आर्यन को बचपन से ही मेडिकल क्षेत्र को करीब से समझने का अवसर मिला।

आर्यन ने NEET की तैयारी 11वीं कक्षा से शुरू कर दी थी। हालांकि उन्होंने पढ़ाई के साथ अपनी सामान्य जिंदगी को भी संतुलित रखा। उनका मानना है कि सफलता के लिए केवल लंबे समय तक पढ़ना ही जरूरी नहीं है, बल्कि मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

उन्होंने बताया कि परीक्षा के करीब आने पर उन्होंने रोजाना 16 से 17 घंटे तक पढ़ाई की, लेकिन इस दौरान छोटे-छोटे ब्रेक लेना नहीं छोड़ा। वह पर्याप्त नींद लेते थे और तनाव कम करने के लिए मनोरंजन का सहारा भी लेते थे। खाली समय में वह नेटफ्लिक्स देखते थे और सोशल मीडिया का भी सीमित इस्तेमाल करते थे।

आर्यन ने 9वीं कक्षा से ही ओलंपियाड प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना शुरू कर दिया था। इससे उनकी पढ़ाई के प्रति रुचि और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयारी का नजरिया मजबूत हुआ। 11वीं में पहुंचने के बाद उन्होंने NEET को अपना लक्ष्य बनाकर पूरी मेहनत और अनुशासन के साथ तैयारी शुरू की।

NEET-UG 2026 में आर्यन की सफलता उन लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा है, जो मेडिकल क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं। उन्होंने साबित किया है कि सही लक्ष्य, लगातार मेहनत और मजबूत इरादों के साथ कोई भी सपना पूरा किया जा सकता है। दादी को खोने का दर्द उनके लिए कमजोरी नहीं बल्कि ताकत बना और उसी प्रेरणा ने उन्हें देश का टॉपर बना दिया। आने वाले समय में आर्यन कैंसर मरीजों के लिए उम्मीद की नई किरण बनना चाहते हैं।

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