प्रसव के बाद मौतों पर बढ़ी चिंता, NHRC ने लिया स्वत: संज्ञान

Jaipur जयपुर : राजस्थान के भीलवाड़ा और बांसवाड़ा जिलों में प्रसव के बाद महिलाओं की मौत के मामलों को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने गंभीरता दिखाई है। आयोग ने मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए राजस्थान के मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया है और दो सप्ताह के भीतर पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
NHRC ने यह कार्रवाई मीडिया में प्रकाशित खबरों के आधार पर की है। रिपोर्टों में बताया गया था कि दोनों जिलों के सरकारी अस्पतालों में प्रसव या प्रसव से जुड़ी चिकित्सा प्रक्रिया के बाद कई महिलाओं की मौत हुई है। इन खबरों के सामने आने के बाद मानवाधिकार आयोग ने इसे गंभीर मामला मानते हुए राज्य सरकार से जवाब तलब किया है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, एक सप्ताह के भीतर भीलवाड़ा और बांसवाड़ा जिलों में आठ महिलाओं की मौत हुई। इनमें एक नाबालिग महिला भी शामिल बताई जा रही है। इन घटनाओं ने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं और प्रसूति देखभाल व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने अपने नोटिस में राज्य सरकार से इस मामले में उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी है। आयोग यह जानना चाहता है कि महिलाओं की मौत किन परिस्थितियों में हुई, इलाज के दौरान क्या लापरवाही सामने आई और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सरकार की ओर से क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
NHRC ने मुख्य सचिव से मामले की जांच, जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका और स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है। आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि रिपोर्ट में पीड़ित परिवारों को दी गई सहायता और प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई का विवरण शामिल किया जाए।
प्रसव के दौरान या उसके बाद महिलाओं की मौत को स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर चुनौती माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर इलाज, पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी और आपातकालीन सेवाओं की उपलब्धता मातृ मृत्यु दर को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
इन घटनाओं के बाद राज्य के स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी चर्चा शुरू हो गई है। सरकारी अस्पतालों में प्रसूता महिलाओं को मिलने वाली सुविधाओं, डॉक्टरों की उपलब्धता और आपातकालीन व्यवस्थाओं की समीक्षा की मांग उठ रही है।
NHRC समय-समय पर स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े मामलों में हस्तक्षेप करता रहा है। आयोग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलें और किसी भी प्रकार की लापरवाही के कारण लोगों की जान न जाए।
राजस्थान सरकार को अब आयोग के नोटिस का जवाब देना होगा। रिपोर्ट मिलने के बाद NHRC मामले की आगे समीक्षा करेगा और यदि किसी प्रकार की लापरवाही या मानवाधिकार उल्लंघन सामने आता है तो आयोग आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर सकता है।
फिलहाल भीलवाड़ा और बांसवाड़ा के इन मामलों को लेकर प्रशासनिक स्तर पर जांच और समीक्षा की प्रक्रिया जारी है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी घटनाओं के कारणों का पता लगाने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के प्रयास किए जा रहे हैं।





