राजस्थान

संत खदेश्वर बाबा की 1000 किलोमीटर दंडवत तीर्थयात्रा, वैष्णो देवी धाम तक का लिया संकल्प

Gulabi Jagat
25 Jun 2026 9:59 PM IST
संत खदेश्वर बाबा की 1000 किलोमीटर दंडवत तीर्थयात्रा, वैष्णो देवी धाम तक का लिया संकल्प
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Sikar: राजस्थान के सीकर जिले में एक अनोखी और बेहद कठिन धार्मिक साधना चर्चा का विषय बनी हुई है। जिले की दंतरामगढ़ तहसील के बाई गांव से संत शंकर दास महाराज, जिन्हें भक्तजन खदेश्वर बाबा के नाम से जानते हैं, ने लगभग 1000 किलोमीटर लंबी दंडवत तीर्थयात्रा की शुरुआत की है। यह यात्रा उन्होंने बाई गांव से जम्मू स्थित माता वैष्णो देवी धाम तक के लिए शुरू की है। उनकी इस तपस्या और आस्था को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मार्ग में एकत्र हो रहे हैं।

खदेश्वर बाबा ने यह यात्रा निर्जला एकादशी के पावन अवसर पर अपने आश्रम में विधिपूर्वक मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करने के बाद प्रारंभ की। धार्मिक अनुष्ठान पूरा करने के बाद उन्होंने संकल्प लिया कि वे अपने शरीर को केवल दंडवत (साष्टांग प्रणाम की स्थिति में लेटकर आगे बढ़ने वाली यात्रा) के माध्यम से वैष्णो देवी तक ले जाएंगे। यह यात्रा सामान्य पैदल यात्रा नहीं है, बल्कि दंडवत यात्रा है, जिसे हिंदू धर्म में अत्यंत कठिन और तपस्वी साधना माना जाता है। इस यात्रा के दौरान संत हर कुछ दूरी पर जमीन पर लेटकर प्रणाम करते हैं और फिर आगे बढ़ते हैं। यह प्रक्रिया लगातार चलती रहती है, जिससे यात्रा बेहद लंबी और शारीरिक रूप से कठिन हो जाती है।

बाबा की यह यात्रा धार्मिक नगर खाटूश्यामजी से भी होकर गुजरेगी, जहां श्रद्धालु उनके दर्शन और स्वागत की तैयारी कर रहे हैं। रास्ते में कई स्थानों पर भक्तजन उनका फूल-मालाओं से स्वागत करेंगे। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस प्रकार की साधना बहुत कम देखने को मिलती है और यह आस्था का एक अद्भुत उदाहरण है। खदेश्वर बाबा ने बताया कि उनकी इस यात्रा का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत साधना नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा सामाजिक और आध्यात्मिक संदेश भी है। उन्होंने कहा कि वे यह यात्रा मानव कल्याण, विश्व शांति और सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए कर रहे हैं। उनका मानना है कि समाज में सकारात्मकता, शांति और धार्मिक मूल्यों को मजबूत करना आवश्यक है।

उन्होंने यह भी कहा कि वे गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर भी यह कठिन साधना कर रहे हैं। बाबा का कहना है कि सनातन धर्म की परंपराओं को मजबूत करना आज के समय की आवश्यकता है।इस यात्रा में बाबा एक लाल कपड़े में बंधा हुआ नारियल अपने साथ ले जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि यह नारियल वे वैष्णो देवी धाम पहुंचकर मुख्य मंदिर में माता को अर्पित करेंगे। यह उनके संकल्प और आस्था का प्रतीक है।खदेश्वर बाबा की यह यात्रा हरियाणा और पंजाब के रास्तों से होकर जम्मू की ओर जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे किसी तय समयसीमा में यात्रा पूरी करने का दबाव नहीं रखते। उनका कहना है कि यह यात्रा एक साधना है, जिसे वे पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ पूर्ण करेंगे।

यात्रा के दौरान वे विभिन्न धार्मिक स्थलों पर रुककर दर्शन करेंगे और भजन-कीर्तन के माध्यम से लोगों को धार्मिक संदेश भी देंगे। उनका उद्देश्य केवल गंतव्य तक पहुंचना नहीं, बल्कि पूरे मार्ग में भक्ति और सनातन परंपराओं का प्रचार करना है। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में इस यात्रा को लेकर काफी उत्साह देखा जा रहा है। कई भक्त इसे आस्था और तपस्या का जीवंत उदाहरण मान रहे हैं। कुछ लोग इसे प्रेरणादायक बता रहे हैं, क्योंकि इतनी अधिक आयु में इतनी कठिन साधना करना सामान्य नहीं माना जाता।जानकारी के अनुसार, खदेश्वर बाबा की आयु 75 वर्ष से अधिक बताई जाती है, लेकिन उनकी ऊर्जा और सक्रियता लोगों को आश्चर्य में डाल देती है। वे पिछले कई वर्षों से निरंतर धार्मिक तपस्या में लीन हैं और अपने अनुयायियों के बीच विशेष सम्मान रखते हैं।

पिछले 22 वर्षों से वे गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर एक अनोखी साधना कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने लगातार खड़े रहकर ध्यान और साधना की है और कभी भी सामान्य रूप से बैठने का प्रयास नहीं किया।

उनकी यह जीवनशैली और कठोर तपस्या उन्हें एक विशेष आध्यात्मिक पहचान देती है। भक्तों का मानना है कि उनका जीवन पूरी तरह से धर्म और सेवा को समर्पित है।इस समय उनकी यह 1000 किलोमीटर लंबी दंडवत यात्रा क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है और बड़ी संख्या में लोग इस यात्रा को देखने और समर्थन देने पहुंच रहे हैं।

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