
जयपुर : राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले में रणथंभौर टाइगर रिजर्व के समीप स्थित फलोदी तोदरा क्षेत्र से वन विभाग ने दो तेंदुओं का सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया है। अधिकारियों ने शुक्रवार को इसकी जानकारी देते हुए बताया कि पिछले कुछ दिनों से दोनों तेंदुओं की लगातार आवाजाही के कारण इलाके के लोगों में भय का माहौल था। ग्रामीणों की सुरक्षा को देखते हुए वन विभाग ने विशेष निगरानी अभियान चलाया और आखिरकार गुरुवार रात दोनों तेंदुओं को सुरक्षित पकड़ लिया।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, तेंदुओं के बार-बार आबादी वाले क्षेत्र के आसपास देखे जाने की सूचनाएं लगातार मिल रही थीं। इससे ग्रामीणों में दहशत फैल गई थी और लोग खेतों में जाने तथा रात के समय घरों से बाहर निकलने से भी बच रहे थे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने तत्काल रेस्क्यू अभियान शुरू किया।
अभियान के दौरान वन विभाग की टीम ने आधुनिक और वैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग किया। तेंदुओं की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए कैमरा ट्रैप लगाए गए, जबकि फील्ड ट्रैकिंग के माध्यम से उनके आने-जाने के रास्तों की पहचान की गई। इसके अलावा स्थानीय ग्रामीणों से मिली सूचनाओं को भी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया।
वन अधिकारियों ने बताया कि दोनों तेंदुओं की गतिविधियों पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी गई। विभाग की टीमें दिन-रात क्षेत्र में मौजूद रहीं और लगातार स्थिति का आकलन करती रहीं। कई दिनों की सतर्क निगरानी और सटीक योजना के बाद गुरुवार रात दोनों तेंदुओं को सुरक्षित तरीके से पकड़ लिया गया।
रेस्क्यू अभियान के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखा गया कि किसी भी ग्रामीण या वन्यजीव को कोई नुकसान न पहुंचे। वन विभाग ने पूरे अभियान को वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप संचालित किया। अधिकारियों ने कहा कि जंगली जानवरों के रेस्क्यू में जल्दबाजी के बजाय धैर्य और सटीक रणनीति अपनाना आवश्यक होता है।
अभियान के दौरान वन विभाग की विशेष टीम, पशु चिकित्सक और अन्य विशेषज्ञ भी मौजूद रहे। तेंदुओं को पकड़ने के बाद उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। आवश्यक चिकित्सकीय जांच पूरी होने के बाद वन्यजीव संरक्षण के नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
रणथंभौर टाइगर रिजर्व देश के प्रमुख वन्यजीव अभयारण्यों में शामिल है। यहां बाघों के साथ-साथ तेंदुए, भालू, लकड़बग्घा और अन्य कई वन्यजीव बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। कई बार भोजन या अन्य कारणों से जंगली जानवर जंगल से निकलकर आसपास के गांवों की ओर पहुंच जाते हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
वन विभाग ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि यदि किसी क्षेत्र में तेंदुआ या अन्य वन्यजीव दिखाई दे तो घबराने या उसे भगाने की कोशिश न करें। ऐसी स्थिति में तुरंत वन विभाग को सूचना दें, ताकि विशेषज्ञ टीम समय पर पहुंचकर सुरक्षित कार्रवाई कर सके।
अधिकारियों ने बताया कि ग्रामीणों के सहयोग से ही यह अभियान सफल हो सका। स्थानीय लोगों ने तेंदुओं की गतिविधियों की समय-समय पर जानकारी विभाग को दी, जिससे उनकी लोकेशन का पता लगाने में काफी मदद मिली।
वन विभाग अब यह भी अध्ययन करेगा कि तेंदुए आबादी वाले क्षेत्र तक किन कारणों से पहुंचे। इसके आधार पर भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। विभाग का उद्देश्य वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ-साथ स्थानीय लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जंगलों के आसपास रहने वाले लोगों को वन्यजीवों के व्यवहार के प्रति जागरूक करना जरूरी है। इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को कम किया जा सकता है। साथ ही, वन क्षेत्रों के संरक्षण और प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने से भी जंगली जानवरों के आबादी वाले क्षेत्रों में आने की घटनाएं घट सकती हैं।
फिलहाल दोनों तेंदुओं को सुरक्षित रेस्क्यू किए जाने के बाद फलोदी तोदरा और आसपास के गांवों के लोगों ने राहत की सांस ली है। वन विभाग ने क्षेत्र में निगरानी जारी रखने की बात कही है, ताकि भविष्य में किसी भी संभावित खतरे से समय रहते निपटा जा सके।





