
चेन्नई : केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने कहा है कि केंद्र सरकार संसद के आगामी मॉनसून सत्र में महिला आरक्षण और निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण (परिसीमन) से संबंधित विधेयक पेश करने की तैयारी कर रही है। चेन्नई के चेपक में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि सरकार लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक समावेशी एवं प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाने के लिए आवश्यक कदम उठा रही है।
अठावले ने कहा कि महिला सशक्तिकरण केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है और इसी दिशा में महिला आरक्षण से जुड़े प्रावधानों को आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। उनके अनुसार, महिलाओं को पर्याप्त राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिलने से नीति निर्माण की प्रक्रिया अधिक संतुलित और व्यापक बनेगी, जिससे समाज के विभिन्न वर्गों की समस्याओं का बेहतर समाधान निकल सकेगा।
उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण का उद्देश्य केवल सीटों का आरक्षण देना नहीं है, बल्कि महिलाओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया में प्रभावी भूमिका प्रदान करना भी है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस कदम से देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी तथा महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
केंद्रीय मंत्री ने निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण यानी परिसीमन के मुद्दे पर भी सरकार का पक्ष स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि समय के साथ जनसंख्या, भौगोलिक विस्तार और सामाजिक परिस्थितियों में बदलाव आते हैं, इसलिए निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण आवश्यक हो जाता है। इससे विभिन्न क्षेत्रों को उनकी जनसंख्या के अनुरूप प्रतिनिधित्व मिल सकेगा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनेगी।
अठावले ने कहा कि परिसीमन का उद्देश्य किसी राज्य या क्षेत्र के हितों को प्रभावित करना नहीं, बल्कि संविधान के प्रावधानों के अनुरूप सभी नागरिकों को समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि सरकार इस विषय पर सभी पक्षों की राय का सम्मान करेगी और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेगी।
पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि संसद का आगामी मॉनसून सत्र कई महत्वपूर्ण विधेयकों और नीतिगत निर्णयों के लिए अहम साबित हो सकता है। सरकार विभिन्न मुद्दों पर व्यापक चर्चा के लिए तैयार है और विपक्ष से भी सकारात्मक सहयोग की अपेक्षा करती है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संवाद और सहमति का विशेष महत्व है तथा राष्ट्रीय हित के विषयों पर सभी दलों को मिलकर काम करना चाहिए।
महिला आरक्षण को लेकर उन्होंने कहा कि लंबे समय से इस विषय पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा होती रही है। महिलाओं को अधिक राजनीतिक अवसर उपलब्ध कराने की मांग समय-समय पर विभिन्न संगठनों और राजनीतिक दलों द्वारा उठाई जाती रही है। सरकार इस दिशा में अपनी प्रतिबद्धता को आगे बढ़ा रही है और आवश्यक विधायी प्रक्रिया पूरी करने के लिए तैयार है।
परिसीमन के मुद्दे पर दक्षिण भारत के कुछ राज्यों द्वारा व्यक्त की जा रही आशंकाओं के संबंध में पूछे गए प्रश्न पर अठावले ने कहा कि सरकार सभी राज्यों की भावनाओं और चिंताओं से अवगत है। उन्होंने कहा कि किसी भी निर्णय से पहले सभी संबंधित पक्षों से विचार-विमर्श किया जाएगा ताकि सभी क्षेत्रों के हितों का संतुलित ध्यान रखा जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार सहकारी संघवाद की भावना के साथ काम कर रही है और राज्यों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि देश के विकास और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाने के लिए समय-समय पर आवश्यक सुधार किए जाते रहे हैं। महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे विषय भी उसी प्रक्रिया का हिस्सा हैं। सरकार का प्रयास है कि संसद में इन मुद्दों पर व्यापक चर्चा हो और सभी दल लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप अपनी राय रखें।
अठावले ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केंद्र सरकार सामाजिक न्याय, समान अवसर और समावेशी विकास के एजेंडे पर कार्य कर रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि संसद के आगामी मॉनसून सत्र में इन महत्वपूर्ण विषयों पर सकारात्मक प्रगति देखने को मिलेगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयक संसद में पेश किए जाते हैं, तो उन पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है। दोनों विषयों का संबंध देश की लोकतांत्रिक संरचना और प्रतिनिधित्व से जुड़ा होने के कारण इन पर विभिन्न राजनीतिक दलों के विचार सामने आ सकते हैं। ऐसे में आगामी मॉनसून सत्र केवल विधायी कार्यवाही के लिहाज से ही नहीं, बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
केंद्रीय मंत्री के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में इन संभावित विधेयकों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। अब सभी की निगाहें संसद के आगामी मॉनसून सत्र पर टिकी हैं, जहां सरकार की ओर से इन प्रस्तावों को पेश किए जाने और उन पर होने वाली चर्चा को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।





