
चेन्नई : तमिलनाडु में सरकारी कार्यालयों में कथित भ्रष्टाचार पर बड़ी कार्रवाई करते हुए राज्य के भ्रष्टाचार-रोधी एवं सतर्कता विभाग (डीवीएसी) ने शुक्रवार को 35 तालुक कार्यालयों में एक साथ छापेमारी की। इस व्यापक अभियान के दौरान अधिकारियों ने 82.10 लाख रुपये की बेहिसाब नकदी बरामद की। यह कार्रवाई राज्यभर में तालुक कार्यालयों में रिश्वतखोरी और अवैध धन लेन-देन की लगातार मिल रही शिकायतों के आधार पर की गई।
जानकारी के अनुसार, तमिलनाडु में कुल 310 तालुक कार्यालय कार्यरत हैं, जहां भूमि संबंधी रिकॉर्ड, जाति, आय एवं निवास प्रमाणपत्र, पट्टा हस्तांतरण, राजस्व मामलों तथा अन्य प्रशासनिक सेवाओं से जुड़े कार्य किए जाते हैं। आम जनता की ओर से लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि कई कार्यालयों में सामान्य प्रशासनिक कार्यों के लिए भी रिश्वत मांगी जाती है और बिना अवैध भुगतान के फाइलों का निपटारा समय पर नहीं किया जाता।
इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए तमिलनाडु भ्रष्टाचार-रोधी एवं सतर्कता विभाग की महानिरीक्षक (आईजी) एम. माहेश्वरी ने उन तालुक कार्यालयों की पहचान करने के निर्देश दिए, जहां भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतें सबसे अधिक प्राप्त हुई थीं और जहां प्रतिदिन बड़ी मात्रा में नकद लेन-देन होने की आशंका थी। विभाग द्वारा प्रारंभिक जांच और शिकायतों के विश्लेषण के बाद 35 तालुक कार्यालयों को कार्रवाई के लिए चिन्हित किया गया।
शुक्रवार को सुबह से ही भ्रष्टाचार-रोधी विभाग की अलग-अलग टीमें राज्य के विभिन्न जिलों में स्थित इन तालुक कार्यालयों में एक साथ पहुंचीं। अधिकारियों ने कार्यालय परिसरों, रिकॉर्ड कक्षों, नकदी रखने के स्थानों और संबंधित कर्मचारियों के कब्जे में मौजूद दस्तावेजों की जांच की। छापेमारी के दौरान कर्मचारियों से बरामद नकदी के संबंध में पूछताछ की गई और उनसे धनराशि का स्रोत बताने के लिए आवश्यक दस्तावेज भी मांगे गए।
प्रारंभिक जांच में 82.10 लाख रुपये की ऐसी नकदी बरामद हुई, जिसका तत्काल कोई संतोषजनक हिसाब या वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया जा सका। विभाग ने इस धनराशि को जब्त कर लिया है और अब यह पता लगाया जा रहा है कि यह रकम सरकारी कार्यों के दौरान कथित रूप से रिश्वत के रूप में प्राप्त की गई थी या किसी अन्य माध्यम से एकत्र हुई थी।
अधिकारियों के अनुसार, छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, फाइलें और वित्तीय अभिलेख भी जांच के दायरे में लिए गए हैं। इनकी विस्तृत जांच के बाद यह तय किया जाएगा कि किन अधिकारियों या कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध है और किनके विरुद्ध आगे कानूनी या विभागीय कार्रवाई की जानी चाहिए। यदि जांच में भ्रष्टाचार के आरोप प्रमाणित होते हैं, तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण कानून तथा सेवा नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
सूत्रों के अनुसार, इस अभियान का उद्देश्य केवल बेहिसाब नकदी जब्त करना नहीं था, बल्कि उन कार्यालयों में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार के नेटवर्क की पहचान करना भी था, जहां आम नागरिकों को बुनियादी सरकारी सेवाएं प्राप्त करने के लिए अतिरिक्त धनराशि देने के लिए मजबूर होना पड़ता है। विभाग यह भी जांच कर रहा है कि कहीं रिश्वत वसूली का कोई संगठित तंत्र तो नहीं चल रहा था।
तालुक कार्यालय आम नागरिकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक इकाइयों में गिने जाते हैं। भूमि रिकॉर्ड में संशोधन, पट्टा जारी करना, प्रमाणपत्र बनवाना और विभिन्न राजस्व सेवाओं के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग इन कार्यालयों का रुख करते हैं। ऐसे में यदि इन कार्यालयों में भ्रष्टाचार की शिकायतें लगातार मिलती हैं, तो इसका सीधा असर आम जनता के विश्वास और सरकारी सेवाओं की पारदर्शिता पर पड़ता है।
भ्रष्टाचार-रोधी एवं सतर्कता विभाग ने संकेत दिए हैं कि यह कार्रवाई किसी एक दिन तक सीमित नहीं रहेगी। यदि अन्य तालुक कार्यालयों या सरकारी विभागों के खिलाफ भी इसी प्रकार की शिकायतें प्राप्त होती हैं, तो वहां भी इसी तरह की औचक जांच और छापेमारी की जा सकती है। विभाग का कहना है कि भ्रष्टाचार के प्रति शून्य सहिष्णुता की नीति के तहत शिकायतों की निष्पक्ष जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की समन्वित कार्रवाई से सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने में मदद मिल सकती है। हालांकि उनका यह भी कहना है कि केवल छापेमारी पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि शिकायत निवारण प्रणाली को मजबूत करने, सेवाओं का अधिकतम डिजिटलीकरण करने और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने जैसे दीर्घकालिक सुधार भी आवश्यक हैं, ताकि रिश्वतखोरी की संभावनाएं कम हो सकें।
फिलहाल, 35 तालुक कार्यालयों में हुई इस संयुक्त कार्रवाई के बाद पूरे राज्य में प्रशासनिक हलकों में हलचल है। अब सभी की निगाहें भ्रष्टाचार-रोधी एवं सतर्कता विभाग की विस्तृत जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट होगा कि बरामद की गई बेहिसाब नकदी का स्रोत क्या था और इस मामले में किन अधिकारियों या कर्मचारियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी।





