त्रिपुरा

त्रिपुरा में BSF जवानों पर हमला, 3 घायल

Kavita2
3 Nov 2026 9:29 AM IST
त्रिपुरा में BSF जवानों पर हमला, 3 घायल
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अगरतला। त्रिपुरा में भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा के नजदीक सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवानों पर हिंसक हमले की घटना सामने आई है। राज्य के सिपाहीजला जिले के बॉक्सानगर क्षेत्र स्थित अशाबारी इलाके में सोमवार, 2 नवंबर 2026 को हुई इस घटना में बीएसएफ के तीन जवान घायल हो गए। आरोप है कि तस्करी से जुड़े संदिग्ध लोगों के एक समूह ने जवानों पर हमला किया और उनके सरकारी हथियार छीनने की भी कोशिश की। हमलावरों ने बीएसएफ के वाहन में भी तोड़फोड़ की। घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव फैल गया। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने हमले की कड़ी निंदा करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

जानकारी के मुताबिक, घटना बॉक्सानगर के अशाबारी इलाके में सोमवार सुबह हुई। यहां बीएसएफ जवानों और स्थानीय लोगों के बीच शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया। हमलावरों ने कथित तौर पर लाठी-डंडों और बांस से जवानों पर हमला किया। अचानक हुए हमले के कारण तीन जवान घायल हो गए। इस दौरान बीएसएफ के सरकारी वाहन को भी नुकसान पहुंचाया गया।

प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, तस्करी के संदेह में बीएसएफ के जवान एक व्यक्ति का पीछा कर रहे थे। इस दौरान हफजुर रहमान नामक व्यक्ति को हिरासत में लेने की जानकारी सामने आई है। इसके बाद स्थानीय लोगों और सुरक्षाकर्मियों के बीच तनाव बढ़ गया। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि इसी घटनाक्रम के दौरान भीड़ ने जवानों को निशाना बनाया।

हालांकि, घटना की शुरुआत को लेकर अलग-अलग पक्षों के दावे सामने आए हैं। स्थानीय निवासियों के एक वर्ग का आरोप है कि बीएसएफ जवानों ने एक व्यक्ति को हिरासत में लेने के बाद उसके साथ मारपीट की थी। आरोप है कि इससे उसका पैर चोटिल हो गया। इस घटना से नाराज स्थानीय लोगों ने अशाबारी-रहीमपुर मार्ग पर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। वहीं, सुरक्षाकर्मियों पर हमला करने वाले लोगों के तस्करी से जुड़े होने का आरोप भी लगाया गया है। इन सभी दावों की जांच की जा रही है।

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सोमवार सुबह करीब 10 बजे अशाबारी ग्राम पंचायत के पास नूतन बाजार क्षेत्र में तनाव बढ़ा। इसी दौरान बीएसएफ की 49वीं बटालियन का एक वाहन वहां पहुंचा। बताया जा रहा है कि वाहन में कंपनी कमांडर सहित तीन सुरक्षाकर्मी सवार थे। प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने वाहन को घेर लिया और उसमें सवार जवानों पर हमला कर दिया।

हमले के दौरान जवानों को चोटें आईं और स्थिति तेजी से बिगड़ गई। आरोप है कि भीड़ में शामिल कुछ लोगों ने जवानों के सरकारी हथियार छीनने का प्रयास भी किया। हालांकि, हथियार छीनने में सफलता मिलने की कोई पुष्टि नहीं हुई है। सुरक्षाकर्मियों पर इस प्रकार का हमला सीमावर्ती इलाके में कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता पैदा करता है।

घटना की सूचना मिलते ही अशाबारी सीमा चौकी से अतिरिक्त बीएसएफ जवान मौके पर पहुंचे। स्थानीय कलमचौरा थाने की पुलिस भी घटनास्थल पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास शुरू किए। सुरक्षाबलों और पुलिस के हस्तक्षेप के बाद हिंसक झड़प को शांत कराया गया।

घायल जवानों को तत्काल बॉक्सानगर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उन्हें प्राथमिक उपचार दिया गया। इसके बाद बेहतर इलाज के लिए हापनिया अस्पताल रेफर किया गया। घटना में कुछ स्थानीय लोगों के घायल होने की खबर भी सामने आई है। घायल जवानों की स्वास्थ्य स्थिति पर संबंधित अधिकारी नजर रख रहे हैं।

इस घटना के बाद सीमावर्ती अशाबारी इलाके में तनाव का माहौल बन गया। स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां घटनाक्रम पर नजर रख रही हैं। पुलिस को दोनों पक्षों की ओर से शिकायतें मिलने की जानकारी सामने आई है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के आधार पर घटना के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने बीएसएफ जवानों पर हुए हमले को गंभीर घटना बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ हिंसा की कड़ी निंदा की। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि देश की सुरक्षा में तैनात जवानों पर हमला किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को घटना में शामिल लोगों के खिलाफ त्वरित और कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों के जवान सम्मान और सुरक्षा के हकदार हैं। किसी भी प्रकार की हिंसा से निपटने के लिए कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

त्रिपुरा की अंतरराष्ट्रीय सीमा बांग्लादेश से लगी हुई है। सीमावर्ती क्षेत्रों में तस्करी और अवैध सीमा पार गतिविधियों को रोकने के लिए बीएसएफ लगातार निगरानी करती है। ऐसे इलाकों में सुरक्षा बलों और स्थानीय समुदायों के बीच समन्वय भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

इस घटना ने सीमा सुरक्षा की चुनौतियों के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर विवादों के समाधान की आवश्यकता को भी सामने रखा है। सुरक्षाकर्मियों पर हिंसक हमला गंभीर अपराध है। साथ ही स्थानीय लोगों द्वारा लगाए गए आरोपों की भी निष्पक्ष जांच आवश्यक है, ताकि वास्तविक घटनाक्रम स्पष्ट हो सके।

बीएसएफ के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी घटनास्थल का दौरा कर स्थिति की जानकारी ली है। जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि हिंसा किस वजह से शुरू हुई, भीड़ में कौन-कौन शामिल था और सरकारी वाहन तथा जवानों पर हमले की जिम्मेदारी किन लोगों की थी।

फिलहाल मामले की जांच जारी है। मुख्यमंत्री के सख्त रुख के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया तेज होने की संभावना है। सुरक्षा एजेंसियों के सामने अब क्षेत्र में शांति बनाए रखने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने की चुनौती है।

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