उत्तर प्रदेश

फायर NOC में कमी यूपी के 184 अस्पताल डी इम्पैनल

Ratna Netam
12 Aug 2026 9:58 PM IST
फायर NOC में कमी यूपी के 184 अस्पताल डी इम्पैनल
x
लखनऊ : आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों की सुरक्षा और इलाज की गुणवत्ता से समझौता करने वाले अस्पतालों के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार ने सख्त कदम उठाया है। प्रदेश के **184 निजी अस्पतालों को आयुष्मान भारत योजना से डी-इम्पैनल** कर दिया गया है। अब इन अस्पतालों में आयुष्मान योजना के लाभार्थियों को योजना के तहत कैशलेस इलाज की सुविधा नहीं मिल सकेगी। अस्पतालों के खिलाफ यह कार्रवाई नए सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों के अनुरूप किए गए सत्यापन के बाद की गई है।
उप मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री **ब्रजेश पाठक** ने कहा कि इस कार्रवाई का उद्देश्य आयुष्मान योजना से अस्पतालों की संख्या कम करना नहीं है, बल्कि मरीजों को सुरक्षित वातावरण में बेहतर और गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध कराना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि योजना के तहत केवल उन्हीं अस्पतालों को शामिल रखा जाएगा, जो निर्धारित सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों का पूरी तरह पालन करेंगे।
नए मानकों के तहत हुआ सत्यापन
भारत सरकार की ओर से आयुष्मान भारत योजना से जुड़े अस्पतालों के लिए मरीजों की सुरक्षा और इलाज की गुणवत्ता से संबंधित नियमों को पहले की तुलना में अधिक सख्त किया गया है। इसके तहत उत्तर प्रदेश में योजना से संबद्ध सभी अस्पतालों के दस्तावेजों और वहां उपलब्ध व्यवस्थाओं का विस्तृत सत्यापन कराया गया।
सत्यापन के दौरान अस्पतालों से कई जरूरी दस्तावेज और व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने को कहा गया। इनमें **फायर एनओसी, बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट** समेत मरीजों की सुरक्षा और अस्पताल संचालन से जुड़े अन्य अनिवार्य मानक शामिल थे।
जांच के दौरान यह देखा गया कि संबंधित अस्पताल निर्धारित नियमों और सुरक्षा मानकों का पालन कर रहे हैं या नहीं। जिन अस्पतालों में आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे या व्यवस्थाएं निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं मिलीं, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की गई।
मार्च से दिया जा रहा था समय
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के मुताबिक अस्पतालों को मानकों को पूरा करने के लिए मार्च से लगातार अवसर और जरूरी सूचनाएं दी जा रही थीं। अस्पतालों को अपनी कमियां दूर करने और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए पर्याप्त समय दिया गया था।
इसके बावजूद कई निजी अस्पताल निर्धारित अवधि में जरूरी शर्तें पूरी नहीं कर सके। खासतौर पर **फायर एनओसी** जैसे मानक मरीजों की सुरक्षा से सीधे जुड़े हुए हैं। ऐसे महत्वपूर्ण मानकों में कमी पाए जाने के बाद विभाग ने नियमों के तहत कार्रवाई करते हुए 184 अस्पतालों को आयुष्मान योजना से बाहर कर दिया।
अब नहीं मिलेगा कैशलेस इलाज
डी-इम्पैनल किए गए 184 निजी अस्पतालों में अब आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों को कैशलेस इलाज की सुविधा नहीं मिलेगी। यानी इन अस्पतालों में इलाज कराने वाले आयुष्मान लाभार्थी योजना के तहत मिलने वाली सुविधाओं का लाभ नहीं उठा सकेंगे, जब तक संबंधित अस्पताल दोबारा योजना में शामिल नहीं हो जाते।
सरकार का कहना है कि आयुष्मान योजना का लाभ लेने वाले मरीजों को सुरक्षित और मानक सुविधाएं उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। इसी वजह से अस्पतालों की व्यवस्थाओं और दस्तावेजों की जांच को गंभीरता से लिया जा रहा है।
दोबारा इम्पैनलमेंट का रास्ता खुला
सरकार ने डी-इम्पैनल किए गए अस्पतालों के लिए योजना में दोबारा शामिल होने का रास्ता बंद नहीं किया है। यदि संबंधित अस्पताल भविष्य में सभी अनिवार्य सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों को पूरा कर लेते हैं तथा जरूरी दस्तावेज उपलब्ध करा देते हैं, तो वे नियमानुसार दोबारा इम्पैनलमेंट के लिए आवेदन कर सकते हैं।
इसके बाद अस्पताल के आवेदन और वहां उपलब्ध व्यवस्थाओं का फिर से सत्यापन किया जाएगा। मानकों पर खरा उतरने वाले अस्पतालों को प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोबारा योजना से जोड़े जाने पर विचार किया जा सकता है।
मरीजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग का स्पष्ट संदेश है कि आयुष्मान भारत योजना में **मरीजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता** है। इलाज की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों में किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
सरकार की इस कार्रवाई से उन अस्पतालों को भी स्पष्ट संदेश गया है, जो आयुष्मान योजना के तहत मरीजों का इलाज करते हैं। अस्पतालों को अब निर्धारित सुरक्षा नियमों और गुणवत्ता मानकों का पालन करना होगा। इससे योजना के लाभार्थियों को बेहतर और सुरक्षित इलाज उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है।
Next Story