उत्तर प्रदेश

एक किरदार ने बदल दी कमलेश की किस्मत

Kavita2
22 Oct 2026 5:12 PM IST
एक किरदार ने बदल दी कमलेश की किस्मत
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कानपुर। बॉलीवुड अभिनेता अजय देवगन की सुपरहिट फिल्म 'दृश्यम' का नाम आते ही दर्शकों को विजय सलगांवकर और उनके परिवार की कहानी याद आ जाती है। लेकिन इस फिल्म में एक ऐसा किरदार भी है, जिसे दर्शकों ने खूब नापसंद किया और उसी नफरत ने किरदार निभाने वाले अभिनेता को जबरदस्त लोकप्रियता दिलाई। यह किरदार है सब इंस्पेक्टर लक्ष्मीकांत गायतोंडे का, जिसे अभिनेता कमलेश सावंत ने निभाया है। साल 2015 में रिलीज हुई पहली 'दृश्यम' से लेकर 2 अक्टूबर 2026 को सिनेमाघरों में आई 'दृश्यम: द कन्क्लूजन' तक कमलेश सावंत ने अपने अभिनय से दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी है। फिल्म में उनका किरदार रिश्वत लेने वाला, गुस्सैल और विजय सलगांवकर के परिवार को लगातार परेशान करने वाला पुलिस अधिकारी है। यही वजह है कि दर्शक गायतोंडे से नाराज होते हैं, लेकिन कमलेश सावंत के अभिनय की जमकर सराहना भी करते हैं।

गायतोंडे के किरदार ने दिलाई अलग पहचान

कमलेश सावंत कई वर्षों से हिंदी और मराठी फिल्मों में काम कर रहे हैं, लेकिन 'दृश्यम' में सब इंस्पेक्टर गायतोंडे के किरदार ने उन्हें विशेष पहचान दिलाई।

फिल्म में उनका किरदार एक ऐसे पुलिस अधिकारी का है, जो विजय सलगांवकर और उसके परिवार पर लगातार शक करता है।

वह जांच के दौरान कठोर व्यवहार करता है और कई मौकों पर अपनी शक्तियों का अनुचित इस्तेमाल करता दिखाई देता है।

गायतोंडे के इसी रवैये के कारण दर्शकों में उसके प्रति नाराजगी पैदा होती है।

हालांकि, कमलेश सावंत के अभिनय की विशेषता यह है कि वह किरदार के चेहरे के भाव, आवाज और व्यवहार से उसे प्रभावशाली बना देते हैं।

2015 में पहली बार बने थे गायतोंडे

कमलेश सावंत ने वर्ष 2015 में रिलीज हुई 'दृश्यम' में पहली बार लक्ष्मीकांत गायतोंडे की भूमिका निभाई थी।

निशिकांत कामत के निर्देशन में बनी इस फिल्म में अजय देवगन ने विजय सलगांवकर का किरदार निभाया था।

कहानी एक ऐसे व्यक्ति के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपने परिवार को बचाने के लिए पुलिस जांच से लगातार एक कदम आगे रहने की कोशिश करता है।

इस कहानी में गायतोंडे पुलिस जांच से जुड़े महत्वपूर्ण किरदार के रूप में सामने आता है।

उसकी आक्रामकता और सलगांवकर परिवार के प्रति कठोर व्यवहार ने उसे फिल्म के सबसे चर्चित पात्रों में शामिल कर दिया।

2022 में फिर दिखाई दिया वही अंदाज

वर्ष 2022 में रिलीज हुई 'दृश्यम 2' में भी कमलेश सावंत ने गायतोंडे का किरदार निभाया।

इस फिल्म में विजय सलगांवकर के पुराने मामले की जांच नए मोड़ पर पहुंचती है।

गायतोंडे अब भी विजय पर शक करता है और उसे लगता है कि वह किसी बड़े सच को छिपा रहा है।

इस भूमिका में कमलेश सावंत ने पहले जैसी सख्ती और गुस्से को बरकरार रखा।

फिल्म में उनकी मौजूदगी ने दर्शकों को पहली 'दृश्यम' के तनावपूर्ण दृश्यों की याद दिलाई।

'दृश्यम: द कन्क्लूजन' में फिर लौटे कमलेश

दो अक्टूबर 2026 को रिलीज हुई 'दृश्यम: द कन्क्लूजन' में कमलेश सावंत एक बार फिर गायतोंडे के किरदार में दिखाई दिए।

अभिषेक पाठक के निर्देशन में बनी इस फिल्म में अजय देवगन, तब्बू, श्रिया सरन, जयदीप अहलावत, प्रकाश राज और अन्य कलाकार शामिल हैं।

फिल्म में विजय सलगांवकर और उसके परिवार से जुड़ी पुरानी जांच फिर नए घटनाक्रम के साथ आगे बढ़ती है।

कमलेश सावंत का किरदार इस बार भी दर्शकों का ध्यान खींचने में सफल रहा। फिल्म से जुड़े साक्षात्कारों में उन्होंने गायतोंडे को मिलने वाली प्रतिक्रियाओं पर खुलकर बातचीत की है।

किरदार से नफरत को मानते हैं अभिनय की सफलता

कमलेश सावंत ने एक साक्षात्कार में बताया कि गायतोंडे का किरदार निभाने के बाद दर्शक उन्हें सोशल मीडिया पर नाराजगी भरे संदेश भेजते हैं।

कुछ लोग उन्हें किरदार के व्यवहार के लिए अपशब्द भी कहते हैं।

लेकिन अभिनेता इसे अपने अभिनय की सफलता मानते हैं।

उनका कहना है कि यदि दर्शक गायतोंडे से नफरत कर रहे हैं, तो इसका मतलब है कि वह पर्दे पर उस किरदार को प्रभावशाली तरीके से पेश करने में सफल रहे हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि विजय सलगांवकर एक पारिवारिक व्यक्ति के रूप में दर्शकों की सहानुभूति हासिल करता है, जबकि गायतोंडे का भ्रष्ट और कठोर व्यवहार दर्शकों को उसके खिलाफ कर देता है।

मराठी थिएटर से शुरू हुआ अभिनय का सफर

कमलेश सावंत का अभिनय सफर लंबे संघर्ष और मेहनत से जुड़ा रहा है।

मुंबई के काला चौकी इलाके से आने वाले कमलेश ने मराठी रंगमंच से अभिनय की शुरुआत की।

उन्होंने थिएटर में काम करते हुए अभिनय की बारीकियां सीखीं।

बाद में उन्हें हिंदी फिल्मों में छोटे किरदार मिलने लगे।

साल 2004 में अमिताभ बच्चन और अक्षय कुमार अभिनीत फिल्म 'खाकी' से उन्होंने हिंदी सिनेमा में कदम रखा।

इस फिल्म में वह एक कांस्टेबल की भूमिका में दिखाई दिए थे।

इसके बाद उन्होंने कई फिल्मों में अलग-अलग भूमिकाएं निभाईं।

कई फिल्मों में निभाया पुलिस अधिकारी का किरदार

कमलेश सावंत ने अपने करियर में कई बार पुलिस अधिकारी की भूमिका निभाई है।

'खाकी' के बाद वह 2011 में रिलीज हुई फिल्म 'फोर्स' में पुलिस अधिकारी के किरदार में दिखाई दिए।

इसके बाद 2014 की 'भूतनाथ रिटर्न्स' में भी उन्होंने पुलिस अधिकारी की भूमिका निभाई।

हालांकि, 'दृश्यम' का गायतोंडे उनके पिछले किरदारों से अलग था।

इसमें उन्हें भ्रष्ट और नकारात्मक छवि वाले पुलिस अधिकारी का अभिनय करने का अवसर मिला।

यही भूमिका उनके करियर की सबसे पहचानने योग्य भूमिकाओं में शामिल हो गई।

निर्देशक निशिकांत कामत ने दिया था मौका

कमलेश सावंत ने एक साक्षात्कार में बताया कि 'दृश्यम' के लिए मुंबई, पुणे और ठाणे में ऑडिशन आयोजित किए गए थे।

फिल्म के कास्टिंग डायरेक्टर विक्की सिडाना थे।

कहानी गोवा की पृष्ठभूमि पर आधारित थी और गायतोंडे का किरदार महाराष्ट्र से जुड़ा हुआ था।

निर्देशक निशिकांत कामत को लगा कि कमलेश सावंत इस भूमिका को अच्छी तरह निभा सकते हैं।

इसके बाद उन्हें फिल्म में सब इंस्पेक्टर गायतोंडे का किरदार मिला।

कमलेश के अनुसार, यह उनके लिए महत्वपूर्ण अवसर साबित हुआ क्योंकि किरदार में अभिनय की पर्याप्त गुंजाइश थी।

सोशल मीडिया पर भी लोकप्रिय हुआ गायतोंडे

'दृश्यम' फ्रेंचाइजी के साथ गायतोंडे का किरदार सोशल मीडिया पर भी लोकप्रिय हुआ है।

उसके संवाद, चेहरे के भाव और विजय सलगांवकर के साथ टकराव वाले दृश्य अक्सर चर्चा में रहते हैं।

दर्शक इस किरदार से जुड़े मीम और वीडियो साझा करते हैं।

कमलेश सावंत के लिए यह लोकप्रियता खास है, क्योंकि उन्हें एक ऐसे किरदार से पहचान मिली है जिसे दर्शक कहानी में नापसंद करते हैं।

यह किसी भी कलाकार के अभिनय की प्रभावशीलता को दर्शाने वाला दिलचस्प उदाहरण है।

असल जिंदगी में गायतोंडे से अलग हैं कमलेश

पर्दे पर गायतोंडे गुस्सैल, कठोर और भ्रष्ट पुलिस अधिकारी के रूप में दिखाई देता है।

लेकिन कमलेश सावंत एक पेशेवर कलाकार हैं, जो इस किरदार को केवल अभिनय के रूप में निभाते हैं।

अपने साक्षात्कारों में वह अभिनय, थिएटर और दर्शकों की प्रतिक्रियाओं को लेकर सहजता से बातचीत करते नजर आते हैं।

उनके अनुसार, नकारात्मक किरदार निभाने वाले कलाकार के लिए सबसे बड़ी सफलता यह होती है कि दर्शक उसके अभिनय को वास्तविक महसूस करें।

तीन फिल्मों के बाद भी कायम है गायतोंडे की पहचान

'दृश्यम' फ्रेंचाइजी ने विजय सलगांवकर और उसके परिवार की कहानी को भारतीय दर्शकों के बीच लोकप्रिय बनाया है।

इस कहानी में गायतोंडे ऐसा किरदार है, जो मुख्य पात्र के सामने लगातार चुनौतियां खड़ी करता है।

कमलेश सावंत ने तीनों फिल्मों में इस भूमिका को निभाकर अपनी एक अलग पहचान स्थापित की है।

करीब दो दशक से अधिक समय से हिंदी और मराठी फिल्मों में सक्रिय अभिनेता के लिए गायतोंडे उनके करियर का यादगार किरदार बन गया है।

दर्शक भले ही गायतोंडे से नफरत करते हों, लेकिन उसी किरदार ने कमलेश सावंत को घर-घर पहचान दिलाई है।

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