उत्तर प्रदेश

जेपी सेंटर विवाद में अखिलेश का हमला बोले कुछ तो गड़बड़ है

Ratna Netam
1 Sept 2026 2:45 PM IST
जेपी सेंटर विवाद में अखिलेश का हमला बोले कुछ तो गड़बड़ है
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लखनऊ : जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (JPNIC) को लेकर उत्तर प्रदेश की सियासत लगातार गरमाती जा रही है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एक बार फिर योगी सरकार और लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) पर निशाना साधते हुए कई सवाल खड़े किए हैं। अखिलेश यादव ने पूछा कि मुख्यमंत्री और सरकारी विभाग जेपीएनआईसी को लेकर इतनी सफाई क्यों दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब किसी फैसले पर बार-बार सफाई देनी पड़े तो जनता के मन में सवाल उठना स्वाभाविक है।
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया के जरिए सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि जनता जानना चाहती है कि आखिर जेपीएनआईसी को लेकर इतनी चर्चा क्यों हो रही है। उन्होंने एलडीए के अधिकारियों की रिपोर्ट पर भी सवाल उठाए और पूछा कि अगर यह परियोजना घाटे का सौदा है तो कोई निजी कंपनी इसे लेने के लिए क्यों तैयार होगी।
JPNIC को लेकर आमने-सामने सपा और भाजपा
जेपीएनआईसी लंबे समय से उत्तर प्रदेश की राजनीति में चर्चा का केंद्र रहा है। अखिलेश यादव इसे समाजवादी विचारधारा और लोकनायक जयप्रकाश नारायण की स्मृति से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट बताते रहे हैं। वहीं सरकार का कहना है कि लंबे समय से अधूरे पड़े इस प्रोजेक्ट को बेहतर तरीके से चलाने के लिए निजी भागीदारी का रास्ता अपनाया गया है।
सरकार की ओर से तर्क दिया गया है कि जेपीएनआईसी के संचालन में भारी खर्च आएगा और इसे व्यवस्थित तरीके से चलाने के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी जरूरी है। दूसरी ओर अखिलेश यादव का आरोप है कि जनता के पैसे से बनी संपत्ति को निजी हाथों में सौंपा जा रहा है।
LDA अधिकारियों से अखिलेश के सवाल
अखिलेश यादव ने लखनऊ विकास प्राधिकरण के अधिकारियों पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि एलडीए की रिपोर्ट में नुकसान की बात कही जा रही है, लेकिन यह समझना जरूरी है कि आखिर ऐसी रिपोर्ट किस आधार पर तैयार की गई।
उन्होंने सवाल किया कि अगर किसी परियोजना में भविष्य की कमाई की संभावना नहीं है तो कोई निजी कंपनी उसमें निवेश क्यों करेगी। अखिलेश ने अधिकारियों से जवाब मांगा कि क्या इस फैसले से पहले सभी पहलुओं की जांच की गई थी।
सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि सरकार जनता की संपत्तियों को निजी हाथों में सौंपने की नीति अपना रही है। उन्होंने कहा कि जेपीएनआईसी केवल एक इमारत नहीं बल्कि एक विचार और इतिहास से जुड़ा स्थान है।
अखिलेश यादव का कहना है कि जिस उद्देश्य से इस परियोजना को बनाया गया था, उसे पूरा करने के बजाय अब इसे व्यावसायिक इस्तेमाल की ओर ले जाया जा रहा है। उन्होंने सरकार से पारदर्शिता बरतने की मांग की।
सरकार का तर्क क्या है
वहीं सरकार की ओर से कहा जा रहा है कि जेपीएनआईसी लंबे समय से अधूरा पड़ा था और इसके रखरखाव पर भारी खर्च आ रहा था। निजी भागीदारी के जरिए इसे बेहतर सुविधाओं के साथ विकसित करने की योजना है। सरकार का दावा है कि इससे प्रोजेक्ट को नई दिशा मिलेगी और लोगों को सुविधाएं मिलेंगी।
सत्तापक्ष का आरोप है कि विपक्ष केवल राजनीतिक कारणों से इस मुद्दे को उठा रहा है। भाजपा नेताओं का कहना है कि सरकार का उद्देश्य किसी संपत्ति को बेचने का नहीं बल्कि उसका बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना है।
चुनावी माहौल में बढ़ी सियासी गर्मी
उत्तर प्रदेश में आने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए जेपीएनआईसी विवाद को राजनीतिक नजरिए से भी देखा जा रहा है। सपा इस मुद्दे के जरिए सरकार पर जनसंपत्तियों को लेकर सवाल उठा रही है, जबकि भाजपा इसे विकास और बेहतर प्रबंधन से जोड़ रही है।
फिलहाल जेपीएनआईसी को लेकर बयानबाजी जारी है। अखिलेश यादव लगातार सरकार से जवाब मांग रहे हैं और एलडीए की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं। वहीं सरकार अपने फैसले को सही ठहराने में जुटी है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा यूपी की राजनीति में और ज्यादा गर्म होने की संभावना है।
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