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उत्तर प्रदेश
छात्रों की फीस के दुरुपयोग का आरोप, फिटजी की 71.88 करोड़ की संपत्ति जब्त करने की मांग
nidhi
17 Oct 2026 7:27 AM IST

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32 केंद्र बंद होने से प्रभावित हुए हजारों छात्र
लखनऊ: प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले संस्थान फिटजी लिमिटेड के खिलाफ छात्रों की फीस के कथित दुरुपयोग का मामला अब विशेष अदालत पहुंच गया है। प्रवर्तन निदेशालय के लखनऊ क्षेत्रीय कार्यालय ने कंपनी और उसके निदेशकों दिनेश कुमार गोयल तथा मोनीला गोयल के खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल की है। एजेंसी ने जांच के दौरान जब्त और अस्थायी रूप से कुर्क की गई कुल 71.88 करोड़ रुपये की संपत्तियों को जब्त करने की मांग की है। यह शिकायत 15 अक्टूबर को गाजियाबाद की विशेष पीएमएलए अदालत में दाखिल की गई।
32 केंद्र बंद, 14,411 छात्र प्रभावित
ईडी के अनुसार, मई 2024 से फरवरी 2025 के बीच फिटजी के 32 कोचिंग केंद्र अचानक बंद हुए। इससे 14,411 ऐसे विद्यार्थी प्रभावित हुए, जिन्होंने पढ़ाई के लिए फीस जमा की थी। एजेंसी का आरोप है कि छात्रों को भुगतान के बदले वादा की गई कोचिंग उपलब्ध नहीं कराई गई। केंद्र बंद होने से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी बाधित हुई। मामले में फीस की वसूली, उसका इस्तेमाल और संस्थान की वित्तीय स्थिति जांच के प्रमुख विषय हैं। ईडी ने अपनी शिकायत में कंपनी के संचालन से जुड़े निर्णयों पर भी सवाल उठाए हैं।
दो से चार साल के लिए अग्रिम फीस
पुलिस में दर्ज मामलों के अनुसार, जेईई जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के दो से चार वर्ष के कार्यक्रमों के लिए प्रति छात्र लगभग 2.80 लाख से 3.50 लाख रुपये तक अग्रिम फीस ली गई थी। विद्यार्थियों को पूरा पाठ्यक्रम कराने का भरोसा दिया गया था। ईडी का आरोप है कि शिक्षकों को वेतन नहीं मिलने से उन्होंने काम छोड़ दिया और केंद्र बिना पूर्व सूचना बंद कर दिए गए। इसके बावजूद नए विद्यार्थियों से फीस लेने का सिलसिला जारी रहा। एजेंसी ने आरोप लगाया कि प्रबंधन ने फीस की रकम दूसरे उद्देश्यों में इस्तेमाल की।
85.79 करोड़ रुपये के दुरुपयोग का आरोप
जांच एजेंसी ने अपने पास रखी गई और कथित रूप से दुरुपयोग की गई फीस का मूल्य 85.79 करोड़ रुपये निर्धारित किया है। इसे मामले में अपराध से अर्जित आय बताया गया है। एजेंसी के मुताबिक, कंपनी लगातार घाटे की स्थिति के बावजूद दाखिले लेती रही। कुछ कार्यक्रम मार्च 2029 तक चलने वाले थे। आरोप है कि प्रबंधन को सेवाएं पूरी करने में असमर्थता की जानकारी होने के बावजूद विद्यार्थियों से राशि ली गई। ये जांच एजेंसी के आरोप हैं, जिन पर अदालत में विचार किया जाएगा।
निदेशकों के वेतन पर उठाए सवाल
ईडी ने निदेशकों को किए गए भुगतान का भी उल्लेख किया है। एजेंसी के अनुसार, वित्त वर्ष 2022-23 से दिनेश कुमार गोयल और मोनीला गोयल ने कुल 24.92 करोड़ रुपये वेतन के रूप में लिए। दिनेश को लगभग 56 लाख रुपये प्रतिमाह और मोनीला को 25 लाख रुपये से अधिक प्रतिमाह मिलने की बात कही गई है। एजेंसी का आरोप है कि दूसरे कर्मचारियों के वेतन में देरी या भुगतान रुकने के दौरान भी निदेशकों को रकम मिलती रही। कंपनी में गोयल परिवार की 86.31 प्रतिशत हिस्सेदारी का भी उल्लेख किया गया है।
पहले हो चुकी है कुर्की और तलाशी
इस मामले में ईडी ने 24 अप्रैल 2025 को सात परिसरों में तलाशी ली थी। उस कार्रवाई में 10 लाख रुपये नकद और 4.86 करोड़ रुपये मूल्य के आभूषण जब्त किए गए थे। इसके बाद नौ अक्टूबर 2026 को 66.92 करोड़ रुपये की संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क की गईं। इन संपत्तियों और पहले की जब्ती को मिलाकर कुल 71.88 करोड़ रुपये का आंकड़ा बनता है। अब एजेंसी ने अदालत से इन्हें अंतिम रूप से जब्त करने का अनुरोध किया है।
चार एफआईआर के आधार पर शुरू हुई जांच
धनशोधन की जांच उत्तर प्रदेश के नोएडा और ग्रेटर नोएडा तथा मध्य प्रदेश के भोपाल में दर्ज चार एफआईआर के आधार पर शुरू हुई। नोएडा पुलिस ने भी आरोपपत्र दाखिल किया है। ईडी के मुताबिक, उसमें लगभग 300 पीड़ितों, कोचिंग केंद्र संचालकों और अन्य गवाहों के बयान, फीस की रसीदें तथा जांच में जुटाई सामग्री शामिल है। शिकायत दाखिल होना दोषसिद्धि नहीं है। संपत्तियों की अंतिम जब्ती और आरोपियों की जिम्मेदारी पर अदालत निर्णय करेगी। फिलहाल छात्रों को फीस लौटाने की किसी निश्चित समयसीमा की घोषणा सामने नहीं आई है। मामले में आगे की जांच जारी है।
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